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Behan Ki Chudai पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 228 बार

पड़ोसी ने तोड़ी मेरी दीदी की सील-3(Padosi Ne Todi Meri Didi Ki Seal-3)

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15 Jun 2023 को प्रकाशित

पड़ोसी ने तोड़ी मेरी दीदी की सील-3(Padosi Ne Todi Meri Didi Ki Seal-3)
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हिंदी सेक्स स्टोरी अब आगे-

मम्मी: नहीं बेटी, ज़माना ठीक नहीं है। भाई को लेकर जाओ जाना है तो। वरना मत जाओ।

फिर दीदी अपने कमरे में जाती है, और थोड़ी देर बाद आती है। फिर मुझे साथ चलने को बोलती है। हम घर से बाहर आते हैं। दीदी रास्ते में मम्मी पर बड़बड़ाते हुए चल रही थी।

दीदी: यह मेरी मां भी ना बड़ी कुतिया है। साली मेरी जवानी घर में ही बरबाद कर देगी।

मैं दीदी के साथ चुप-चाप चल रहा था रास्ते में। हमारे घर से थोड़ी दूरी पर ही एक पतली सी गली है। उधर कोई रहता भी नहीं था, और बहुत कम ही लोग आते-जाते थे। दीदी पतली गली की तरफ ही जा रही थी। तभी मुझे ऐसा लगा हमारे पीछे कोई आ रहा था। मैंने पीछे देखा तो वो सलीम था। वह हमसे आगे निकल कर पतली गली के अंदर चला जाता है।

दीदी: अमित तुम थोड़ी देर यही खड़े रहो, अगर कोई आता हुआ दिखे तो तुम उससे पहले मेरे पास आ जाना, और मैं जैसा बोलूं तुम्हे वैसे ही करना होगा।

मेरी दीदी मुझे गली के कोने पर खड़ा करके अंदर चली जाती है। उनके कुछ दुरी पर जाते ही मैंने गली में देखा, अंदर सलीम भी खड़ा हुआ था। दीदी उसके पास जाके खड़ी हो जाती है। मुझे अब समझ आया मेरी दीदी बहाना बना कर सलीम से मिलने आई थी। फिर वो दोनों बाते करते हैं, जो मुझे भी सुनाई दे रही थी।

सलीम: जान इतनी देर क्यों लगा दी आने में? मैं कब से तड़प रहा हूं तुमसे मिलने के लिए।

दीदी: सलीम जी बस मेरी मां नहीं आने दे रही थी। उसकी वजह से मैं लेट हो गई। आपसे मिले बगैर तो मेरे से भी नहीं रहा जा रहा था।

सलीम दीदी को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ लेता है। दीदी भी उससे बिना शर्म के लिपट जाती है।

सलीम: जान तुम कितनी रसीली हो। तेरी मां नहीं चाहती कि मैं तेरा यह रस निचोड़ लूं।

दीदी: सलीम आप मेरी जिंदगी में पहले मर्द आए हो। मैं अभी तक कच्ची कली हूं। आपका जैसे मन करे वैसे चूसो।

सलीम: मेरी तो किस्मत ही खुल गई।

सलीम फिर मेरी दीदी का पूरा फेस चूमने लगता है। दीदी भी उसका पूरा साथ दे रही थी। फिर दोनों के लिप्स आपस में मिल जाते है। दीदी सलीम का फेस दोनों हाथों से पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगती है। सलीम अपने हाथ दीदी कि कमर से गांड तक फेर रहा था।

मेरी मंजू दीदी सलीम के हॉट बड़े जोश में चूस रही थी। कुछ 5 मिनट दोनों के लिप्स लॉक रहते हैं। फिर दीदी अपने लिप्स सलीम से अलग करती है, और लंबी-लंबी सांसे लेने लगती है।

सलीम: मेरी जान तेरे होठों का रस बहुत ही मीठा है। बस मन करता है चूसता ही रहूं।

दीदी: तो रोका किसने है, चूसो ना।

सलीम एक बार फिर दीदी के लिप्स चूसने लगता है, और उनके होंठ चूसते हुए सलीम अब दीदी की गोल टाइट चूचियों पर भी अपने हाथ फेर रहा था। फिर थोड़ी देर में अपने हाथ दीदी की टी-शर्ट में डाल देता है, और दीदी की नंगी चूचियों को दबाने लगता हैं।

मेरी दीदी अपने संतरे जैसी चूचियों पर मर्द का हाथ लगते ही बिलबिलाने लगती है। दीदी और जोश में सलीम के होंठ चूसने चबाने लगती है। सलीम दीदी का जोश देख कर उनकी टी-शर्ट ऊपर करने लगता है। दीदी तुरंत सलीम से अपने होंठ अलग करती है, और बोलती है-

दीदी: सलीम जी यहां ऐसा मत करो। यहां मेरा भाई भी आया हुआ हैं। अगर किसी ने हमें ऐसे देख लिया तो?

सलीम: मंजू बस मुझे तुम्हारे रसीले होठों की तरह यह तुम्हारी चूचियों का रस भी पीना है। अब दिखा भी दो। यहां कोई नहीं आता, मान जाओ ना यार।

दीदी एक बार मेरी तरफ देखती है। मैं छुप जाता हूं, तो दीदी सलीम से बोली: मुझे शर्म आ रही है, और घर भी जाना है‌। मम्मी गुस्सा करेगी।

सलीम: जान बस थोड़ी देर। प्लीज मंजू मान जाओ।

दीदी शर्माते हुए सलीम की ज़िद देख कर कुछ देर सोचती है। फिर अपने दोनों हाथों की माला बना के सलीम के गले में डाल देती है, और बोली: बस थोड़ी देर।

फिर सलीम अपने हाथों से दीदी की टी-शर्ट धीर-धीरे ऊपर करता हुआ दीदी के गले तक कर देता है। चांद की रोशनी में दीदी की गोरी-गोरी गोल टाइट चूचियां चमक रही थी। सलीम दीदी की चूचियों को देख हैरान सा हो जाता है, और कहीं खो सा जाता है।

दीदी: क्या हुआ? अब कहा खो गया हो सलीम जी?

सलीम: क्या खुबसूरती है। नज़र हटाने का मन ही नहीं कर रहा है।

दीदी: सलीम जी अब जो करना हैं जल्दी करिए। मेरे से भी सबर नहीं हो रहा हैं।

फिर सलीम अपने दोनों हाथों से दीदी की एक-एक नंगी चूची पकड़ता है। दीदी एक-दम से सिसक सी जाती है आआह उफ्फ। सलीम चूचियों को खूब मसलने लगता है। कुछ देर बाद सलीम अपना मुंह दीदी की एक चूची पर लगा कर उसे चूसने लगता है। दीदी एक-दम से पीछे हटने की कोशिश करती है। सलीम फिर दीदी को और मजबूती से दबोच लेता है, जिससे मेरी दीदी उसके चंगुल से हिल ना पाए। फिर सलीम आराम से मेरी मंजू दीदी की एक चूची को मुंह मे भर के चूसता है, फिर दूसरी को। ऐसे ही दोनों चूचियों को सलीम चूसता रहता हैं, जैसे उनमें से दूध निकल रहा हो। बड़े ही मजे से चूस रहा था।

दीदी भी उसके सर पर हाथ रख कर उसे अपनी चूची खुद चुसा रही थी, और लंबी-लंबी आहें और सिसकारियां ले रही थी-

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दीदी: आह आह आअअ उफ्फ सलीम, चूस लो। मेरी इन चूचियों का रस निचोड़ दो पूरा। बहुत तंग करती है जब से यह बड़ी हुई है आआ हह आअआअ उफ्फ आई काटो मत दर्द होता हैं।

दोनों अपनी कामवासना में डूबे हुए थे। तभी मुझे कोई आता हुआ दिख जाता है। दीदी ने मेरे से बोला था कोई आता हुआ दिखे थो मेरे पास आ जाना। मैं वैसा ही करता हूं। मैं दीदी के पास जाने लगता हूं। मैं दीदी से कुछ कदम की दूरी पर ही था, तभी मेरी दीदी सलीम को अपने से अलग कर देती है, और तुरंत अपनी टी-शर्ट को नीचे करके नंगी चूचियों को ढक लेती है। दोनों मुझे पास देख कर चौंक जाते है।

दीदी: अमित तुम्हे उधर खड़े होने के लिए बोला था ना। यहां क्यों आए?

मैं: दीदी उधर से कोई आ रहा है। यहीं बताने आया था।

दीदी तुरंत अपने आप को ठीक करती हैं।

दीदी: सलीम अब मुझे जाना होगा, कोई देख लेगा।

सलीम: जान कितना मजा आ रहा था। थोड़ी देर और रुक जाओ ना।

दीदी: मजा तो मुझे भी आ रहा था। पर अब घर भी जाना होगा। मम्मी गुस्सा करेगी।

फिर सलीम मुझे बोला। अच्छा किया जो किसी के आने से पहले बता दिया।

फिर दीदी मुझे दूसरी तरफ देखने को बोली, और एक लास्ट किस सलीम को करती है। उसके बाद हम घर के लिए निकल पड़ते हैं।

रास्ते में दीदी मेरे से बोली: अमित मम्मी को यह सब मत बताना मैं सलीम से मिली हूं। प्लीज भाई वो गुस्सा होगी।

मैं: ठीक है दीदी, मम्मी से नहीं बोलूंगा। दीदी आप सलीम के साथ गले क्यों मिल रही थी?

दीदी बोली: भाई वो मेरे दोस्त है ना। इसलिए हम गले मिल रहे थे। वैसे तुझे कैसे लगे सलीम?

मैं: बहुत अच्छे हैं सलीम।

फिर हम घर आ जाते हैं। मम्मी हमें गुस्सा करती हैं। इतना समय क्यों लगा दिया? काफी कुछ बोलती हैं। फिर खाने के बाद मैं अपने कमरे में सोने आता हूं। मैं देखता हूं दीदी की ब्रा उनके बेड पर ही पड़ी थी, जो शायद दीदी सलीम से मिलने जाने से पहले ही उतार के गई थी।

कुछ दो दिन बाद रविवार था। उस दिन मैं सुबह सो के जल्दी उठा, तो मुझे मम्मी कहीं दिखाई नहीं दी। दीदी किचन में नाश्ता बना रही थी। दीदी से मैंने पूछा तो दीदी ने बताया कि मम्मी आज जल्दी ही ऑफिस के किसी काम से गई थी, और उन्हें घर आने में देर हो जाएगी। यह बात बताते हुए दीदी काफी खुश लग रही थी।

मैं: दीदी आज तो रविवार हैं, और आज मम्मी का ऑफिस बंद रहता है।

दीदी: हां भाई, पता नहीं ऑफिस के काम से गई है, या मम्मी मजे करने गई है, पता नहीं। ले तू नाश्ता कर। मैं नहाने जा रही हूं।

फिर मैं नाश्ता करके छत पर जा रहा था। तभी मुझे बॉथरूम से बाल्टी गिरने की आवाज़ आई, और मैं बॉथरूम की तरफ गया। देखा तो मेरी आंखें खुली रह गई। मेरी दीदी पूरी नंगी हो कर अपनी चूत के बाल साफ कर रही थी। एक हाथ में रेजर था, एक हाथ से चूत की फांकों को खोल रही थी, कि अच्छे से झांटे साफ हो सके।

झांटे साफ होने के बाद दीदी ने जब अपनी चूत पानी डाल कर चूत साफ करी, मैं तो देखता ही रह गया। वाह क्या चूत थी मेरी दीदी की! मोटे-मोटे होंठ जो आपस में चिपके हुए थे, और बीच में निकला हुआ लाल दाना। ऊपर उनकी गोरी चूचियां ब्राउन निप्पल जो खड़े हुए थे। मेरी मंजू दीदी पूरी नंगी एक कामवासना की देवी लग रही थी।

फिर मेरी दीदी अपनी टांगे छोड़ी करके नीचे बैठ जाती है। उनकी चूत पूरी खुल जाती हैं। चूत की खुली फांकों के बीच का गुलाबी नजारा मैं देख ही रहा था, कि तभी दीदी पेशाब करने लगी। चूत की फांकों के बीच से निकलती मूत की धर शर-शर की आवाजें कर रही थी। फिर मेरी दीदी नहा कर नंगी ही मम्मी के कमरे में चली जाती है। मैं जल्दी से अपने कमरे में भाग जाता हूं, ताकि दीदी मुझे देख ना ले। थोड़ी देर में दीदी मुझे बुलाती है।

जब मैं अनके पास आया तो देखा मेरी दीदी लाल बेबी डॉल मेक्सी में थी, जो उनके घुटने तक ही आ रही थी। दीदी के हाथों में लाल चूड़ियां, पैरों में पायल, लाल लिपस्टिक थी। दीदी पूरी शादी-शुदा औरत लग रही थी, और काफी खूबसूरत भी। मंजू दीदी का यह रूप देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया।

फिर दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया और बोली: अमित बताओ मैं कैसी लग रही हूं?

मैं: दीदी आप सच में बहुत अच्छी और खूबसूरत लग रही हो। पर आप आज ऐसे तैयार क्यों हुई हो?

दीदी बोली: वो सब में तुझे बाद में बता दूंगी। लो 200 रूपए, जाके दोस्तों के साथ मजे करो। शाम तक घर आना।

और मैं घर स बाहर निकल गया। मैं सोचने लगा आज मम्मी घर में नहीं थी, और दीदी का ऐसे तैयार होना मुझे कुछ समझ नहीं आया।‌ मैं थोड़ी देर बाहर घूम के फिर घर चलता हूं।

मैं कुछ आधे घंटे बाद घर आया। देखा घर का गेट बंद था। फिर में घर के पीछे एक टूटे हुए घर से अपने घर के अंदर आया। तभी मुझे मम्मी के कमरे से दीदी की आवाज आई, और मैं दबे पांव मम्मी के कमरे के बाहर लगी विंडो से अंदर देखा, तो मेरी मंजू दीदी

मैंने ऐसा विंडो से क्या देखा आपको आगे बताऊंगा। इसके लिए मेरे साथ बने रहे।आपको मेरी कहानी कैसी लग रही हैं, वो कमेंट करके बताइए, मेरी ईमेल आईडी support@mohakkisse.comपर मेल करे, धन्यवाद।

अगला भाग पढ़े:-पड़ोसी ने तोड़ी मेरी दीदी की सील-4

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