आशा है आपने पिछली सेक्स कहानी को पढ़ लिया होगा। इस कहानी में पढ़िए कैसे कालेज ट्रिप की शुरुआत होती है और फिर सपना को मसूरी में चार प्रोफेसर कुछ फायदे बता कर उसके साथ हमबिस्तर होते हैं।
कमल और कुणाल सर की नज़र तो सपना पर पहले से ही थी। पर फेयरवेल पार्टी में बीते वे सुहाने पल को याद करके कमल और कुणाल सर के मन में सपना के साथ कुछ और वक्त बिताने का ख्याल आता है। जी हां, आपको बता दूं कि जब सपना कालेज के 3rd ईयर में थी, तो सीनियर के फेयरवेल पार्टी के दौरान, सपना ने काली साड़ी पहन रखी थी, जो कि सपना पर खूब जच रही थी।
पार्टी के बाद कमल और कुणाल सर दोनों सपना को अपने गाड़ी में बिठा कर, घर छोड़ने की बात करके, उसे रास्ते में ही चोद देते हैं, और फिर अपने घर ले जाकर उसके जिस्म के साथ खेलते हैं और जम कर चोदते हैं। जो फिर सपना को भी अच्छा लगने लगता है। फिर दूसरे दिन सुबह घर छोड़ देते हैं।
पर कमल सर के घर पर हुई चुदाई को अभी सपना भूली भी नहीं थी, कि तभी पड़ोस के लड़के सपना की जोरदार चुदाई होली के दूसरे दिन कर दिए, और फिर पड़ोस के लड़के कहीं घूमने का प्लान बनाने को बोल रहे थे, जो आपने पिछली कहानी में पढ़ लिया होगा। इधर पड़ोसी लड़को की चुदाई में जल रही सपना की आग अभी ठंडी हुई भी नहीं थी, कि तभी होली के बाद कालेज देरी से खुलने का नोटिस आ गया कि किसी कारण से कालेज जो 2 दिन बाद खुलने वाला था, अब वो 5 दिन बाद खुलेगा।
पर सपना ने जब नोटिस देखा तो उसके मन में थोड़ी खुशी हुई, फिर वो तुरन्त नहाने के लिए बाथरूम में चली गयी। जब उसने अपने सारे कपड़े अपने बदन से अलग किये, और फिर उसने अपने आप को देखा, तो उसे खुद पर बहुत शर्म आ रही थी। वो जब बाथरूम में अपने शरीर को देखने लगी, तो उसे अपने शरीर पर उन पड़ोसी लड़कों के काटने के बहुत से निशान दिख रहे थे। वो सभी मिल कर सपना के बदन पर अपने दांतो के निशान दे चुके थे, कि सपना के गर्दन से लेकर चूत तक करीब 20-22 निशान थे। उन लोगों ने सपना को बेदर्दी से चोदा था।
सपना की चूचियां खूब चूसी जा चुकी थी और गांड जम कर चुदी थी, तो उसकी मदमस्त जवानी निखरने लग गयी थी।उसकी चूचियों का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि उसके ब्रा की साइज 34″ है। और वो जब भी कुर्ती पहनती है तो कुर्ती चूचियों पर ऐसे टाईट दिखती है, जैसे कि कोई भारी भरकम पपीता हो। और अगर गलती से स्पोर्ट टी-शर्ट पहन ले, तो फिर पूछो ही मत क्या गजब की माल लगती है।
और माल लगे भी क्यूं ना? अभी कुछ ही महीनों पहले पड़ोसी लड़को ने सपना की जम कर चुदाई की थी। वहां से आने के बाद सपना करीब एक हफ्ते कालेज नहीं गई, तो आप सोच ही सकते है कैसे चुदाई हुई होगी।
ये सब बीता ही था कि जब सपना कालेज गयी तो कमल और कुणाल सर दोनों ने सपना की चढ़ती जवानी और चूचियों के बढ़ते साईज को देख भाप लिए, कि उनकी स्टूडेंट, जिसे अभी कुछ दिन पहले ही फेयरवेल पार्टी के बाद रगड़ कर चोदे थे, जिसकी चूचियां तब इतनी नहीं भारी दिख रही थी। अब वो पूरी तरह जवान लग रही थी।
उसको जवान होते देख कमल और कुणाल के मन में खुराफात जग चुका था। वो दोनों एक-दूसरे को देखते हैं और इशारे में ही बोलते हैं कि छमिया जवान हो रही चलो फिर रगड़ते हैं। और ये सब बातें करके, वो कालेज ट्रिप ले जाने की घोषणा करते है और फिर मंसूरी ट्रिप पर सपना के साथ कमल सर कुणाल सर और महेश सर रात रंगीन करते हैं।
तो कहानी की शुरुआत करते हैं। मेरठ के मशहूर ‘दीवान कॉलेज’ के गेट पर सुबह से ही गहमागहमी थी। मसूरी के एजुकेशनल ट्रिप की बस खड़ी थी, लेकिन लड़के-लड़कियों की बातों से लग रहा था कि यह ट्रिप पढ़ाई से ज्यादा ‘गॉसिप’ के लिए है। बस के पीछे वाली सीट पर बैठे ग्रुप में फुसफुसाहट शुरू हो गई थी। बस जैसे ही मुजफ्फरनगर क्रॉस कर सहारनपुर की ओर बढ़ी, बातों का रुख कॉलेज की सबसे खूबसूरत और टैलेंटेड स्टूडेंट सपना की ओर मुड़ गया।
“यार, तूने नोटिस किया? कुणाल सर ने आज अपनी फेवरिट लेदर जैकेट पहनी है, सिर्फ सपना को इम्प्रेस करने के लिए,” रिया ने अपनी सहेली से धीरे से कहा।
तभी बगल वाली सीट से राहुल बोला, “सिर्फ कुणाल सर ही क्यों? हमारे कमल सर तो पूरे रास्ते सपना को अपनी पुरानी कविताएं सुनाने के बहाने उसके करीब बैठने की कोशिश कर रहे हैं। देखो तो सही, मैगजीन पकड़ाने के बहाने कैसे हाथ टच करने का मौका ढूंढ रहे हैं!”
जैसे ही बस मंसूरी की पहाड़ियों पर चढ़ने लगी, सबका ध्यान महेश सर पर गया। महेश सर कॉलेज के सबसे गंभीर प्रोफेसर माने जाते थे, लेकिन आज उनकी गंभीरता कहीं खोई हुई थी।
कुणाल सर जो यंग, हैंडसम और फिटनेस फ्रीक हैं वो सपना को ‘पहाड़ों की फोटोग्राफी’ सिखाने के नाम पर अपने जाल में उलझा रहे थे। कमल सर अपने शायराना मिजाज से वो सपना को कुदरत और रूहानियत की बातें बता कर इमोशनली कनेक्ट करने की कोशिश कर रहे थे।
महेश सर पावर और पैसे का रौब दिखा रहे थे। वो सपना को करियर और इंटर्नशिप के बड़े-बड़े सपने दिखा कर अपनी ओर खींच रहे थे।
मंसूरी पहुँचते ही सबसे पहले सब कैम्पटी फॉल गए। ठंडे पानी की बौछारों के बीच असली ड्रामा शुरू हुआ।
कुणाल सर ने सपना का हाथ पकड़ कर उसे पत्थर पार कराए और धीरे से कहा, “सपना, तुम्हारे जैसी लड़की को मेरठ में नहीं, मुंबई के रैम्प पर होना चाहिए। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ।”
लंच के समय माल रोड पर टहलते हुए कमल सर ने एक बेंच पर सपना को बिठाया और कहा, “ये पहाड़, ये धुंध… ये सब अधूरे हैं, जैसे मेरी लाइफ में कोई खास कमी है। क्या तुम मेरी प्रेरणा बनोगी?”
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शाम को लाल टिब्बा पर सनसेट देखते वक्त महेश सर ने सपना को अलग ले जाकर कहा, “देखो सपना, ये लड़के और छोटे प्रोफेसर तुम्हें सिर्फ कुछ पल की खुशी देंगे। मैं तुम्हें वो लाइफ दे सकता हूँ जिसका तुमने सपना देखा है। बस मुझ पर भरोसा करो।”
रात को जब स्टूडेंट्स गन हिल के पास डिनर कर रहे थे, तो वहां का माहौल बड़ा अजीब था। सपना तीनों प्रोफेसरों के बीच घिरी हुई थी। कभी कुणाल सर उसके लिए कॉफी ला रहे थे, कभी कमल सर उसके शॉल की तारीफ कर रहे थे, तो कभी महेश सर उसे स्पेशल डिनर का ऑफर दे रहे थे।लड़के आपस में हंस रहे थे— “भाई, सपना तो ‘ट्रिपल थ्रेट’ में फंस गई है। तीनों सर उसे अपने प्रेम जाल में फंसाने के चक्कर में एक-दूसरे को नीचा दिखाने पर तुले हैं।”
सपना, जो एक साधारण मेरठ की लड़की लग रही थी, असल में बहुत समझदार थी। उसने देखा कि कैसे तीन जिम्मेदार लोग अपनी मर्यादा भूल कर एक स्टूडेंट के पीछे पागल थे।
कहानी में एक नया और गहरा मोड़ आता है। मेरठ से चली वो बस जब मंसूरी की धुंधली वादियों में खोई, तो सपना को अंदाजा भी नहीं था कि वह एक ऐसे चक्रव्यूह में फँस चुकी थी जिससे निकलना अब नामुमकिन था।
मसूरी के माल रोड की चमक-धमक के बीच, कुणाल सर ने सपना को अपनी ‘कूल’ इमेज से पूरी तरह प्रभावित कर लिया। उन्होंने उसे महंगे कैफे में ले जाकर वो सपने दिखाए जो मेरठ के तंग मोहल्लों में कभी नहीं दिखते थे। सपना को लगा कि कुणाल ही वह इंसान है जो उसे एक मॉडर्न और हाई-प्रोफाइल लाइफ दे सकता है। कुणाल का ‘फ्रेंडली’ व्यवहार धीरे-धीरे अधिकार में बदलने लगा और सपना उनकी बातों के जादू में खो गई।
लेकिन जैसे ही कुणाल सर कहीं व्यस्त होते, कमल सर अपनी शायरी और जज्बातों के साथ हाजिर हो जाते। क्लाउड एंड की तन्हाई में उन्होंने सपना से कहा:“सपना, कुणाल तुम्हें चमक-धमक दे सकता है, पर सुकून सिर्फ मेरे पास मिलेगा। मैं तुम्हें वो रूहानी मोहब्बत दूँगा जो किताबों में होती है।”
कमल सर की बातों में एक ऐसी मासूमियत थी कि सपना को लगा कि शायद यही उसका ‘सोलमेट’ है। वह उनके जज्बातों के दलदल में धंसती चली गई।
सबसे खतरनाक खेल महेश सर खेल रहे थे। जब ट्रिप धनौल्टी की ओर बढ़ा, तो उन्होंने अपनी पावर का इस्तेमाल किया। उन्होंने सपना को अकेले में बुलाकर कॉलेज के कुछ कॉन्फिडेंशियल पेपर दिखाए और कहा: “तुम्हारे करियर की चाबी मेरे पास है सपना। तुम इन दोनों के साथ सिर्फ वक्त बर्बाद करोगी। मेरे साथ रहोगी तो यूनिवर्सिटी टॉप भी करोगी और गोल्ड मेडल भी तुम्हारा होगा।” भविष्य के डर और कामयाबी के लालच ने सपना को महेश सर का ‘जी-हजूर’ बना दिया।
उस दिन मसूरी की वह रात बेहद सर्द थी। बाहर बर्फबारी जैसी ठंड थी और होटल की खिड़कियों पर कोहरा जम चुका था। गॉसिप का बाजार और भी गर्म हो गया जब छात्रों ने देखा कि सपना अपने कमरे में जाने के बजाय कुणाल सर, कमल सर और महेश सर के वीआईपी सुइट में रुक गई है।
होटल के उस बड़े से कमरे में सन्नाटा था, लेकिन तनाव और साजिश की लहरें साफ महसूस की जा सकती थी। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी मेज पर शराब और कबाब सजे थे। अंगीठी जल रही थी, जिसकी नारंगी रोशनी सपना के चेहरे पर पड़ रही थी। वह थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन उन तीनों की बातों के जाल ने उसे वहीं रुकने पर मजबूर कर दिया था।
कुणाल सर ने म्यूजिक सिस्टम पर धीमा संगीत बजा दिया और सपना के करीब आकर बोले, “देखो सपना, बाहर दुनिया क्या कहती है उसकी परवाह मत करो। आज की रात तुम्हारी है। यह आजादी तुम्हें मेरठ के तंग गलियों में नहीं मिलेगी।”
उन्होंने सपना को एक ड्रिंक ऑफर की, जिसे सपना मना नहीं कर पाई। कमल सर ने माहौल को और भी गहरा कर दिया। उन्होंने डायरी खोली और बोले, “सपना, इस सर्द रात में तुम हमारी महफिल की शमा हो। हम तीनों तुम्हें चाहते हैं, और तुम हम तीनों की प्रेरणा हो। यहाँ कोई किसी से कम नहीं।” उनकी बातों ने सपना को एक काल्पनिक और मायावी दुनिया में धकेल दिया।
महेश सर ने सबसे भारी दांव खेला। उन्होंने सपना के कंधे पर हाथ रखा और बेहद धीमी आवाज में कहा, “सपना, आज रात तुमने जो फैसला लिया है, वह तुम्हारे करियर का टर्निंग पॉइंट है। अब तुम सिर्फ एक स्टूडेंट नहीं, हमारी खास हो। कल सुबह जब सूरज निकलेगा, तो कॉलेज में तुम्हारी हैसियत बदल चुकी होगी।”
रात आधी बीत चुकी थी जब का वो मंजर बाहर कॉरिडोर में दबे पांव चल रहे कुछ छात्रों ने दरवाजे के पास से सुना कि अंदर ठहाके लग रहे थे और फिर अचानक गहरी खामोशी छा गई।
आखिर क्या हुआ उस ठंडी बर्फीली आधी रात जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ। कमेन्ट करके प्रतिक्रिया जरूर दें।
धन्यवाद!
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