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भाभी की चुदाई पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 1,021 बार

चूत मेरे ही घर में थी

आकाश यादव

01 Aug 2025 को प्रकाशित

चूत मेरे ही घर में थी
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हाय दोस्तो, मैं आकाश.. कैसे हैं आप सब!मैं कानपुर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। मैं दिखने में ज्यादा स्मार्ट तो नहीं हूँ लेकिन इतना हूँ कि किसी भी अच्छी लड़की को आसानी से पटा लूँ।

यह कहानी मेरी और मेरी भाभी के बीच की तब की है.. जब मैं 12 वीं में था।मुझे शादी-शुदा औरतें बहुत ज्यादा पसंद हैं।

मैं एक अच्छे अमीर घर से हूँ.. और मेरा घर बड़ा था। मेरे घर में किराए पर एक बंगाली परिवार रहता था। उनके परिवार में तीन लोग थे। भैया भाभी और उनका एक 5 साल का लड़का।

भाभी की उम्र कोई ज्यादा नहीं थी.. यही कोई 28 या 29 की होगी।क्या बताऊँ दोस्तो, वो तो एक जन्नत की परी से भी ज्यादा सुन्दर लगती थीं।

जब वो पहले दिन आई थीं तभी से मैंने सोच लिया था कि इनको चोदना ही है।आप लोग तो जानते ही हैं कि बंगाली औरतें कितनी सुन्दर होती हैं। उनका फिगर तो क्या बताऊँ… उनके सामने तो जन्नत की हूर भी शरमा जाए। उनका फिगर साइज़ 36-26-36 का था।

मैं बस उनको किसी तरह चोदने का प्लान बनाने लगा और उनसे बात करने के बहाने ढूंढने लगा।

शुरूआत में मेरी हल्की-फुल्की बात ही उनसे होती थी लेकिन धीरे-धीरे हम लोग आपस में काफी घुल-मिल गए थे। अब मैं उनसे मजाक भी करने लगा था।

एक दिन यूं ही उनसे बात कर रहा था- क्या बात है भाभी आज तो बहुत सुन्दर लग रही हो.. लगता है आज एक-दो की जान तो जरूर जाएगी।भाभी- हट बदमाश.. मैं और सुन्दर.. तू कितना झूठ बोलने लगा है और मैं भला किसी को क्यों मारने लगी.. जिसको मरना है.. वो तो मरता नहीं है।वो अपने पति के बारे में कह रही थीं।

मैं- तो क्या हुआ भाभी अभी आपका देवर तो जिन्दा हैं ना.. आप कहें तो आपके लिए जान भी हाजिर है.. जान ही क्यों.. सब कुछ हाजिर है।भाभी- अच्छा जी.. लगता है आज आप बड़े रोमांटिक मूड में हो।मैं- एक बार चांस तो दो..इतना कह कर मैं हँसने लगा।

तभी हमारे पड़ोस की एक लड़की आई और उनको अपने साथ अपने घर ले गई मुझे उस पर तेज गुस्सा आई लेकिन वो जो लड़की आई थी.. वो भी कुछ कम नहीं लगती थी।लेकिन उसका फिगर साइज़ थोड़ा छोटा था। खैर जाने दो..उस दिन तो मैंने उनके नाम की मुठ मार कर काम चलाया।

फिर अगले दिन मैं उनके कमरे में गया.. तो उनका बेटा बहुत रो रहा था।मैंने पूछा- क्या हुआ?तो उन्होंने कहा- पता नहीं क्यों रो रहा है।

फिर मैंने उनके लड़के से.. जिसका नाम अंश था.. कहा- आओ हम लोग छुपा-छुपी खेलते हैं।उसने भी रोना बंद करके कहा- हाँ मैं खेलूँगा।फिर मैंने कहा- जाओ जा कर तुम छुप जाओ।

वह छुप गया.. फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसको ढूँढ लिया।मैंने कहा- अब छुपने की बारी मेरी.. तुम मुझे ढूँढना।‘ठीक है..’फिर मैंने उसको बोला- तुम बाहर जाकर अन्दर आ जाओ।

फिर वो बाहर गया और मैं भाभी के पैरों के पास जा कर छुप गया। उस दिन भाभी ने लाल साड़ी पहनी थी। मैं उनके पैरों के बीच में जा कर चुप गया।

फिर अचानक भाभी को क्या हुआ उन्होंने अपनी साड़ी उठाई और मुझको अपनी साड़ी के अन्दर छुपा लिया।

उफ्फ.. क्या बताऊँ दोस्तों.. उस वक्त तो मैं एकदम हक्का-बक्का रह गया। मैं उनकी साड़ी के अन्दर था.. मुझे उनकी चूत की अब खुश्बू आने लगी.. जिससे मेरा लंड खड़ा हो गया।मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और अपनी नाक को उनकी चूत के पास ले गया।

मुझे कुछ दिख तो नहीं रहा था.. क्योंकि मैं उनकी साड़ी के अन्दर था। मैंने जब उनकी चूत को सूंघा.. तो क्या बताऊँ…उस वक्त मेरा तो पानी ही निकल जाता.. लेकिन मैंने अपने आपको कण्ट्रोल किया।

मैंने अपनी जीभ से जब उनकी चूत को छुआ.. तो वो एकदम से उछल पड़ीं।

फिर उन्हें याद आया कि मैं कहाँ हूँ.. तो उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी से मुझको बाहर निकाला और अपनी नजरें झुका लीं।

मैंने उनकी तरफ देखा और उनके गाल पर किस करते हुए उनको थैंक्स बोलकर तुरंत बाथरूम में गया और उनके नाम की मुठ मार कर अपने कमरे में जाकर सो गया।

अगले दिन मैं उनके कमरे में गया और कहा- भाभी जरा थोड़ा सा दूध मिलेगा?भाभी- दूध क्या.. मलाई भी मिलेगी..

मैं- नहीं नहीं.. मेरे पास मलाई है.. आपको चाहिए क्या?इतना सुनते ही भाभी हँसने लगीं..

मैंने कहा- भाभी आज तो आपको देख कर कुछ-कुछ हो रहा है।भाभी ने कहा- हो जाने दो न देवर जी..मैंने कहा- चलो कहीं बाहर चलते हैं.. मजे करेंगे।लेकिन भाभी नहीं मानी और उन्होंने बोला- मजे करना है तो यहीं घर में करते हैं न..

इतना सुनते ही मेरा तो लंड खड़ा हो गया। मैंने उनको जोर से पकड़ लिया और उनके गाल पर एक जोर से किस कर प्रिया।

भाभी मेरे इस अचानक हुए हमले के लिए तैयार नहीं थीं.. इसलिए उन्होंने मुझको धक्का प्रिया और मुझको बाहर निकाल कर दरवाजा बंद कर प्रिया।और अन्दर से कहा- बाकी काम आज शाम को करते हैं।

अब तो मेरे होश उड़ गए मैं तो अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था, मैंने भाभी से कहा- प्लीज भाभी.. एक बार दरवाजा तो खोलो ना..लेकिन भाभी ने कहा- नहीं.. अभी नहीं.. थोड़ा सब्र कर लो.. शाम को पूरे मजे लेंगे।

मैं ‘ओके’ बोलकर तुरंत अपने कमरे में गया और मुठ मार ली।अब तो मुझे बस शाम का इन्तजार था।

जैसे-तैसे शाम हुई और मैंने देखा कि उनके घर में कोई नहीं था।मैंने पूछा- सब कहाँ गए?तो उन्होंने बताया- मेरे पति और बेटा डिनर पर गए हैं.. और वो रात से पहले नहीं आएंगे।

अब तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने सोचा कि जाकर मेडिकल शॉप से कंडोम ले आऊँ.. जैसे ही मैं पीछे की तरफ मुड़ा.. तो भाभी ने मुझको पीछे से जोर से पकड़ लिया और मेरे कान पर किस करने लगीं।

मैंने पूछा- क्या हुआ?तो वो बोलीं- कहाँ जा रहे हो?मैंने कहा- जाकर जरा कंडोम तो ले आऊँ।वो बोलीं- अरे मैंने सारा जुगाड़ कर रखा है।

मैं खुश हो गया और पीछे मुड़ कर उनको जोर से उनके होंठों पर किस कर प्रिया।

मैंने बोला- वाह भाभी.. क्या बात है.. लगता आज तो चुदने का पूरा जुगाड़ बना कर रखी हो।मेरे मुँह से यह बात सुन कर भाभी को शरम आ गई और वो अपने कमरे में भाग गईं।

मैं उनके पीछे गया और कहा- भाभी आज मैं आपकी चूत की खुश्बू सूंघ कर ही रहूँगा.. उस दिन आपने बड़ा तड़पा प्रिया था। मन तो था उसी दिन आपको चोद दूँ.. लेकिन बहुत कंट्रोल किया था। आज तो आपकी चूत का भोसड़ा बना कर रहूँगा।

इतना सुनते भी वो हँसने लगीं और बोलीं- चलो देखते हैं कितना दम है इस शेर में।मैंने कहा- अरे जाकर दरवाजा तो बंद कर दो।

फिर भाभी उठ कर दरवाजा बंद करने जा रही थीं.. तो मैं उनकी मटकती गाण्ड देख रहा था।

जब भाभी वापस आईं.. तो वो मेरी गोद में बैठ गईं और मेरे होंठों पर किस करने लगीं।

मैंने पहली बार किसी को किस किया था तो उस वक्त तो मानो मैं जैसे जन्नत में उड़ने लगा था। आपको बता नहीं सकता कि मुझे कितना मजा रहा था।मैं भी पागलों की तरह उनके मुलायम होंठों को काटने लगा। कभी मैं उनके मुँह में अपनी जीभ डालता.. तो कभी वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डालतीं।

मैं अपना सारा थूक उनके मुँह में डालने लगा और वो भी बहुत मजे से मेरा साथ दे रही थीं।अब मैं उनकी मस्त मोटी-मोटी उभरी चूचियों को दबा रहा था और उनके मुँह से भी सिसकारी निकलने लगी थी।

मैं धीरे-धीरे अपने हाथ उनकी कमर से लेकर उनकी मस्त मुलायम गाण्ड को दबाने लगा। वो बहुत गर्म हो गई थीं। फिर मैं एक हाथ से उनकी चूची दबा रहा था।

मैंने जब एक हाथ से उनकी गर्म चूत पर ले गया और उनकी चूत को छुआ.. तो वो एकदम से उछल पड़ीं और मुझे जोर से पागलों की तरह चूमने लगीं।

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मैं पूरे जोश में आ गया और उनकी चूत को जोर-जोर से रगड़ने लगा, उनकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी।

अब मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े निकालने शुरू किए, सबसे पहले मैंने उनकी साड़ी उतारी.. फिर ब्लाउज और फिर पेटीकोट!

भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं और क्या बताऊँ…वो ब्रा और पैंटी में इतनी हॉट लग रही थीं कि अगर आप लोगों में से कोई उन्हें देख लेता.. तो तुरंत ही उनको चोद देता।

अब मैंने अपना एक हाथ उनकी पैंटी में डाला और उनके दाने को रगड़ने लगा। वो जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगीं ‘आआह्ह्ह.. आह्ह्ह.. बहुत मजा आ रहा है.. आह्ह..’मैंने कहा- यह तो शुरुआत है भाभी.. आगे तो और मजा आएगा।

मैंने पीछे हाथ डाल कर उनकी ब्रा को खोल प्रिया और उनके दोनों कबूतरों को जोर-जोर से दबाने लगा।

भाभी अब और जोश में आ गईं.. और कहने लगीं- आआह्ह्ह.. प्लीज.. और जोर से दबाओ.. आहह्ह.. ऊओह्ह्ह..

मैंने सीधे उनकी मस्त मुलायम चूचियों को अपने मुँह में ले लिया और एक-एक करके चूसने लगा।फिर मैं सीधे उनकी चूत पर आ गया और उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को सूंघने लगा।

मैं- भाभी उस दिन आपकी चूत की खुश्बू से मैं पागल हो गया था.. आज तो मैं आपकी चूत को फाड़ कर ही रहूँगा.. आपने मुझे बहुत तड़पाया है.. माँ की लौड़ी..मैंने चुदास की मदहोशी में भाभी को गाली बक दी थी तो वे भी खुश हो गईं।

भाभी- हाँ चाट ले मादरचोद.. मेरी चूत और बना ले मुझे अपनी रंडी भोसड़ी वाले!

अब मैंने उनकी पैंटी उतारी और उनकी चूत को चाटने लगा।अब तो वो बिल्कुल पागल ही हो गई थीं, वो अपने हाथ से मेरा सर अपनी चूत में दबाने लगीं और मैं भी अपनी जीभ से उनकी मस्त चूत को चाटने लगा।

मैंने पहली बार किसी की चूत को चाटा था, मुझे बहुत मजा आ रहा था।मैं उनकी चूत को अपने मुँह से चोदने लगा। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, चूत से लगातार रस बह रहा था। मैं कभी उनकी चूत के गुलाबी होंठों को चूसता.. तो कभी उनके दाने को दाँतों से हल्के से काटता।

वो लगातार मादक सीत्कार कर रही थीं, उनकी सिसकारियाँ लगातार बढ़ रही थीं.. जिससे मुझे ओर ज्यादा जोश आ रहा था।वो ‘आआह्ह्ह.. ऊओह्ह्ह.. उफ्फ्फ..’ कर रही थीं।

फिर उन्होंने मुझे नंगा किया और मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।क्या बताऊँ दोस्तो, मुझे उससे ज्यादा मजा आज तक और किसी चीज में नहीं आया।फिर मैं और भाभी 69 की अवस्था में हो गए और एक-दूसरे से खेलने लगे।

मैं इतना गर्म हो गया था कि ज्यादा देर नहीं रुक पाया और भाभी के मुँह में ही झड़ गया, भाभी मेरा सारा माल पी गईं।मेरे कुछ देर बाद भाभी भी झड़ गईं और उनका सारा रस मैं पी गया।

क्या स्वाद था उसका.. जिसने पिया होगा वो ही जानता होगा।

अब मैं और भाभी थक कर एक-दूसरे के बगल में लेट गए।

मैंने भाभी से कहा- भाभी आपकी चूत पीने में बहुत मजा आया।भाभी हँसने लगीं और बोलीं- अभी मजा तो बाकी है मेरी जान!

वो मेरे लंड हो अपने हाथों से हिलाने लगीं और मैं भी उनकी चूचियां दबाने लगा।अब तक मेरा लंड खड़ा हो गया था।

भाभी ने कहा- मेरे देवर राजा.. अब देर न करो अब मुझसे नहीं रहा जाता।मैंने देर न करते हुए भाभी से कहा- भाभी जरा कंडोम तो पहनाना।

भाभी उठीं और अलमारी से एक कंडोम निकाल कर मेरे लंड को थोड़ी देर चूस कर उस पर कंडोम चढ़ा प्रिया।

फिर वे रण्डियों की तरह अपनी टाँगें फैला कर लेट गईं और चूत पर थपकी देते हुए बोलीं- आ जा मेरे राजा.. मेरे ऊपर चढ़ जा।

मैंने उनके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और उनकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.. जिससे भाभी और ज्यादा गर्म आवाजें निकालने लगीं। वो लगातार ‘आआह्ह्ह.. आहह्ह..’ कर रही थीं।

मैंने अपने लंड को चूत के गेट पर सैट किया और उनकी चूत में हल्का सा धक्का प्रिया।

उनकी चूत थोड़ी टाइट थी.. जिससे उनको थोड़ा दर्द हुआ.. तो उनके मुँह से हल्की सी ‘आहह..’ निकली।मैंने पूछा- क्या हुआ?तो कहने लगीं- तू बस धक्का लगा।

इतना सुन कर अबकी बार मैंने पूरी जोर से धक्का मारा और मेरा आधे से ज्यादा लंड भाभी की चूत में चला गया। मैं वैसे ही हल्के-हल्के धक्के लगाने लगा।

भाभी अब काफी गर्म हो गई थीं और वो अपने होंठों को अपने दाँतों से काटने लगीं और अपनी चूचियां खुद दबा रही थीं।इस सबसे उनकी आँखें बंद थीं।

मैंने फिर एक जोर का धक्का मारा जिससे मेरा पूरा लंड उनके अन्दर समां गया। मैंने देखा तो भाभी की आँखों से आँसू की कुछ बूँदें आ गईं।

मैं उनके दर्द की परवाह न करते हुए लगातार जोर-जोर से धक्के मारने लगा.. जिससे पहले तो भाभी को कुछ दर्द हुआ मगर बाद में वो अपनी गाण्ड उठा कर मेरा साथ देने लगीं।

भाभी- आहह्ह और जोर से मेरी जान.. आह्ह.. और दम लगा.. ऊओह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है.. मैं कब से ऐसी चुदाई के लिए तड़प रही थी.. आज फाड़ दे मेरी चूत.. ये बहुत मादरचोद खुजा रही थी।मैं- ले मादरचोदी रण्डी.. चुदवा अपनी चूत.. बहुत तड़पाया है तूने..

मैं अपनी पूरी ताकत से उनको चोदने में लगा था। पूरे कमरे में बस भाभी की सिसकारियां गूंज रही थीं। भाभी लगातार ‘आहह्ह.. ऊओह्ह्ह.. हम्म.. फ़क बेबी..’ कर रही थीं।

मैंने ऐसे ही उनको बहुत देर तक अलग-अलग पोजीशन में चोदा। अब तक भाभी 3 बार झड़ चुकी थीं और वो थक गई थीं.. लेकिन मेरा लंड झड़ ही नहीं रहा था।

भाभी- साले क्या खा कर आया है.. झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा है।मैं- पता नहीं.. क्या हुआ भाभी..भाभी- चल मादरचोद.. मैं तेरा मुँह में लेकर झाड़ देती हूँ।

उन्होंने मेरा लंड मुँह में लिया और पूरी जोर से चूसने लगीं.. जिससे मैं ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और उनके मुँह में ही झड़ गया।भाभी मेरा सारा माल पी गईं।

उस दिन मैं पहली बार इतना झड़ा था कि मेरे अन्दर की सारी ताकत कम हो गई थी और मैं निढाल हो कर उनके बाजू में ही नंगा लेट गया।

हम दोनों कुछ देर तक यूं ही नगें लिपटे पड़े रहे।

फिर मैंने उठ कर खुद को साफ़ किया भाभी ने भी अपने कपड़े पहने और मैं अपने कमरे में चला गया।

ऐसे ही हमने बहुत समय तक चुदाई की और अभी तक कर रहे हैं।

आगे बताऊंगा कि कैसे मैंने उनकी बहन को चोदा।

मुझे मेल कीजिएगा और बताइए.. कि कैसी लगी मेरी कहानी।आपके जवाब का इन्तजार है।धन्यवाद।support@mohakkisse.com

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