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माँ की चुदाई • पठन समय: 13 मिनट • पढ़ा गया: 232 बार

मैं, मां और ट्रेन का सफर-2(Main, maa aur train ka safar-2)

rajeshkumarxx

09 Jan 2011 को प्रकाशित

मैं, मां और ट्रेन का सफर-2(Main, maa aur train ka safar-2)
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पिछला भाग पढ़े:-मैं, मां और ट्रेन का सफर-1

जैसे मैंने पिछले पार्ट में बताया जब हम स्टेशन पहुंचे और अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, वहीं हमारी साइड में एक 27-28 साल का लड़का और लगभग 35 साल की महिला अपने 3 साल के बच्चे के साथ बैठी थी। बस यही वो जगह थी जहां से मैं और मेरी जिंदगी बदल गयी। पिछले भाग में आपके कमेंट बहुत कम थे। तो हमें कमेंट करें।‌ अब आगे-

साइड बेंच पर बैठा लड़का मेरी मां को बार-बार घूर रहा था। तो कभी दोनों की नज़र मिल रही थी। मैं ये सब चुप-चाप देख रहा था। मुझे उस लड़के पर थोड़ा गुस्सा आने लगा, क्योंकि वो मेरी मां को ग़लत नज़र से देख रहा था। मोबाइल चलाने के बहाने से कभी मां की छाती, तो कभी होंठों के देख कर अपने होंठों पर जीभ फिराता। मम्मी भी शायद ये सब नोटिस कर रही थी, और वो भी उसे बीच में देख रही थी। तभी वो लड़का मां के थोड़े पास आया और बोला-

लडका: हैलो आंटी।

मां: हैलो।

लडका: ये दिल्ली से होकर जो ट्रेन जम्मू जाती है, वो कब तक आयेगी?

मां: हम भी उसी का इंतजार कर रहे हैं। 15 मिनट में आती होगी।

लड़का: अच्छा, वैसे आप भी दिल्ली जा रहे हो?

मां: नहीं, हम जम्मू जायेंगे, आप दिल्ली जाओगे?

लड़का: जी आंटी।

और मम्मी की आंखों में आंखें डाल कर देखने लगा और मां भी उसे देखने लगी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी इतनी सीधी मां भी एक जवान लड़के के साथ नैन मटक्का कर रही थी। और वो लड़का भी डर नहीं रहा था। इतने में मैं उस लड़के को जलाने के लिए बोला, “आपके के साथ वो कौन भाभी है क्या तुम्हारी?”

लड़का: वो दीदी है मेरी, उन्हें ही घर छोड़ने जा रहा हूं।

मैं: बड़ी खूबसूरत है। वैसे आपकी सीट कोन से कम्पार्टमेन्ट में है?

लड़का: first ए.सी.।

मै: अच्छा हमारा भी फर्स्ट ए.सी. में है।

मम्मी और वो लड़का अब भी दोनों आपस में नज़र मिला रहे थें। जबकि उस लड़के की बहन हमसे पांच कदम की दूरी पर अपने बच्चे को खिलाने में मस्त थी। तभी मैं पानी पीने का बोल कर वहां से पानी पीने चला गया और मैं वहां से उनसे छुप कर उन्हें देखने लगा। वो लड़का और मां अब भी बात कर रहे थे। तभी उस लड़के ने कुछ कहा और मां अपना मुंह घुमा कर हल्की सी हंसी।

फिर उस लड़के ने कुछ कहा और मम्मी का मोबाइल उनके हाथों से लिया और कुछ टाइप करनें लगा। तो मैं जल्दी से वहां जाने लगा, क्योंकि मुझे लगा वो मम्मी का मोबाइल नंबर ले रहा होगा। तभी उसका मोबाइल बजा तो उसने मां का फोन दे दिया और मुझे आता देख मम्मी को कुछ कहा और वहां से जाकर अपनी दीदी के पास जाकर बैठ गया। मैंने मम्मी से कहां-

मै: क्या हुआ मम्मी, वो आपके फोन में क्या कर रहा था?

मम्मी: हड़बड़ाते हुए, वो फोन थोड़ा हैंग हो गया था, बस उसे देख रहा था।

मै: क्या मां, किसी अनजान को ऐसे फोन नहीं देते!

मां: अरे कुछ नहीं अच्छा लड़का है।

फिर मैं चुप हो गया और मुझे मां पर तब से शक होने लगा व गुस्सा भी आ रहा था। पर क्या करता, वो मेरी मां थी। पर मां का ये रूप देख कर मैं दंग था और मां को देख कर मेरे मन मैं उल्टे-सीधे ख्याल आने लगे जिससे मेरा लंड अकड़ने लगता। इसी उधेड़-बुन में 7 बज गये और ट्रेन आ गयी हम ट्रेन में चढ़े तो हमारा केबिन B था तभी वो लड़का और उसकी दीदी भी आयी तो वो बोला-

लड़का: आंटी आपका ये कूप है?

मम्मी: हां और तुम्हारा?

लड़का: ये G हमारा है।

तभी उसकी दीदी ने आवाज लगाई और फिर वो आगे चले गये। और मैंने सामान रखा और मम्मी को भी अन्दर बुलाया। फिर हम अपनी‌ सीट पर बैठ गये। तभी मम्मी बोली, “चल 7 बज गये है तो खाना भी खा लेते‌ है।” क्योंकि मम्मी घर से खाना पैक करके लेकर आयी थी तो हम खाना खाने बैठ गये। खाते वक्त बार-बार मम्मी के फोन पर मैसेज टोन बजती, तो मुझे शक हुआ कहीं उस लड़के ने पक्का मम्मी का नम्बर तो नहीं ले लिया। तभी मैंने कहा-

मै: मम्मी आपका फोन बार-बार रिंग क्यों कर रहा है।

मां (मम्मी बात को टालते हुए): अरे बेटा छोड़ना, व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई मैसेज आया होगा।

फिर हम खाना खाकर अपने कपड़े पहनें। मैंने सिर्फ कच्छा पहना और मम्मी ने नाइटी पहन ली थी। फिर हम अपनी-अपनी सीट पर लेट गये। मैं ऊपर वाली बर्थ पर और मम्मी नीचे वाली बर्थ पर लेट कर अपने मोबाइल को चला रही थी। मुझे मम्मी पर शक था‌‌ कि वो उस लड़के से ही चैट कर रहीं थी। और सोच कर अचंभित भी था। मेरी मां जो इतनी संस्कारी थी, वो अपने बेटे की उम्र के लड़के से पट गयी थी।

मुझे अब चैक करना था मम्मी किससे बात कर रही थी, तो मैंने अपना दिमाग लगाया और अपने फोन में एक एप डाउनलोड की जिससे आफ स्क्रीन भी विडियो बन जाती है। और पता भी नहीं चलता। तो मैंने अपने फोन में रिकार्डिंग शुरू करके नीचे उतरा तो मम्मी ने फोन को छुपाने की कोशिश की।

मम्मी: क्या हुआ?

मैं: मम्मी वो फोन चार्ज करना है।

मम्मी: ठीक है लगा दे और लेट जा, ठंड हो रही है।

फिर मैंने फोन को चार्जिंग पर लगाया और मम्मी के बिल्कुल सर के पीछे ऐसे चिपका दिया जिससे उसमें सब रिकार्ड हो सके और उपर जाकर लेट गया। तब तक रात के साढ़े आठ बजे चुके थे। मम्मी फिर से अपना फोन चलाने लगी थी और मेरे दिमाग में बस ये ही घूम रहा था कि दादा जी चलो ठीक है, पर मम्मी एक जवान लड़के से पट गयी। क्या वो‌ उससे चुदाई करना चाहती है?

मम्मी वैसे खुबसूरत और कसावटी बदन की महिला है जो किसी भी लड़के और बूढ़े आदमी का लंड खड़ा कर दे। उनकी गांड चोड़ी और चूंचियां अभी भी तनी हुई है। शायद वो लड़का भी इसी वजह से फिदा हुआ होगा। क्योंकि मम्मी के बारे में सोच कर जब सगे बेटे का लंबा लंड खड़ा हो जाये, तो वो लड़का फिर भी अनजान था।

फोन को चार्जिंग पर लगायें 20 मिनट से ज्यादा हो गये थे। तो मैं अपना फोन लेने के लिए जब नीचे आया तो मम्मी अब भी फोन चला रही थी, पर मुझे देख कर फिर से फोन में कुछ और खोल दिया। मैंने भी जल्दी से फोन को चार्जिंग से हटाया और अपनी सीट पर आकर लेट कर रिकॉर्डिंग देखने लगा। उसमें कुछ साफ तो नहीं दिखाई दिया बल्कि थोडा जब मैंने विडियो रोक कर देखा तो उसमें कुछ चैट दिखी।

लड़का: तुम बहुत हाट हो।

मम्मी: अच्छा, अब तो मेरी उम्र हो गयी है। मैं तुमसे बड़ी भी हूं।

लड़का: उम्र कहां छोड़ो, तुमसे मुझे पहली नजर में प्यार हो गया है।

फिर थोड़ी और देखने पर मुझे एक जगह फिर चैट दिखी-

मम्मी: अभी बेटा जगा है, कैसे मिलोगे?

लड़का: आप बाथरूम में आ जाओ, ज्यादातर सब सो चुके हैं।

मम्मी: अभी नहीं, थोड़ा रूको।

लड़का: कितना टाइम? तुमसे नजदीक से मिलना है।

मम्मी: 9:30 के करीब इतने राजेश भी सो जायेगा, और नजदीक से का क्या मतलब?

फिर मैंने जल्दी से टाइम देखा तो 9:30 बजने‌ में 15 मिनट ही बचे थे। फिर मैंने सोने की एक्टिंग के लिए कम्बल ढक लिया और फोन को आफ स्क्रीन रिकार्डिंग पर छोड़ कर इंतजार करने लगा। मेरे दिमाग में बार-बार यहीं आ रहा था कि मम्मी एक अनजान लड़के से अकेले में बाथरूम में मिलने को मान कैसे गयी? क्या उन्हें पता है वो लड़का बाथरूम में मां को चोद भी सकता है? सकता क्या चोदने के लिए ही बुला रहा था। मैंने भी सोच लिया में ये नहीं होने दूंगा। इतनी ही गर्मी है तो पापा से जाकर कर लेती।

तभी मम्मी उठीं मेरी ओर देख कर चुप-चाप बाहर जाने लगी। मेरा फ़ोन रिकार्डिंग पर ही लगा था तो मैं भी चुप-चाप उठा और अपने कूप से बाहर देखा तो मम्मी जा रही थी। आगे वो लड़का खड़ा था। मैंने मोबाइल पर उनकी विडियो बनानी जारी रखी।

मम्मी जैसी ही उस लड़के के पास पहुंची, उसने मम्मी को एक-दम अपनी बाहों में ले लिया और वहीं पर चूमने की कोशिश कर ही रहा था, कि मम्मी ने उसे रोका और उसकी बाहों से बाहर हुई तो वो लड़का मम्मी को बाथरूम की तरफ ले जाने लगा। तो मैं भी चुप-चाप उनसे छुप कर आगे बढ़ा।

वो दोनों जैसें बाथरूम के अन्दर गये मैंने मोबाइल को ऐसी जगह रखा जहां से सारी बाथरूम के अन्दर से बाहर तक रिकार्ड हो जाये और फिर बाथरूम का दरवाजा खटखटाया।

मैं: मम्मी दरवाजा खोलो, दरवाजा खोलों जल्दी।

मां (घबराहट भरी आवाज में): क्या हुआ बेटा, तुम चलो मैं आती हूं।

मै: मम्मी मुझे पता है आप के साथ कोई और भी घुसा है बाथरूम में, जल्दी खोलों।

मां: बेटा कोई नहीं है। तुझे वहम हुआ होगा।

मैं: मां जल्दी खोलों अगर मै शोर मचाने लगा तो सब इकट्ठा हो जायेंगे।

तभी मां ने दरवाजा खोला तो मैंने देखा जल्दबाजी में मम्मी अपने कपड़े भी ठीक नहीं किये थे। फिर वो लड़का भी निकला तो मैंने उसे पकड़ कर मारने ही वाला था, कि मम्मी बोली-

मां: छोड़ दें, अगर किसी पता लगा तो बदनामी होगी।

मै: इसकी हिम्मत कैसे हुई ये सब करने की?

तभी बीच में वो लड़का बोला-

लड़का: मैंने जबरदस्ती नहीं की। तुम्हारी मां अपनी मर्जी से आयी है।

इस पर मैंने उसे झटके से छोड़ा और भाग जा कहां। वो वहां से चला गया। फिर मैंने अपना फोन उठाया और मम्मी की तरफ देखा तो रोने लगी थी। मैं वहां से कूप में जाने लगा और मम्मी को देख कर बोला-

मै: मुझे पापा को बताना पड़ेगा।

मम्मी‌ (एक-दम से): नहीं बेटा ऐसा मत करना।

और फिर मैं वहां से कूप में आ गया मम्मी भी मेरे पीछे-पीछे आ गयी और दरवाजा को अच्छे से बंद करके बोला।

मां: बेटा अपने पापा को मत बताना मैं तेरे हाथ जोड़ती हूं। सब बर्बाद हो जायेगा।

मैं: आपने ये सब करने से पहले नहीं सोचा, वो मेरी उम्र का लड़का है।

मां: मुझसे ग़लती हो गयी बेटा माफ कर दे।

मैं: नहीं पापा को तो बताना पड़ेगा, और सबूत के लिए मैंने तुम्हारी विडियो भी बनाई है।

मां: बेटा प्लीज़ ऐसा मत कर ग़लती हो गयी।

मैं: तुम यहां एक अनजान लड़के के साथ ही शुरू हो गयी तो पता नहीं किस-किस के साथ क्या-क्या किया होगा।

मां: मैंने किसी के साथ कुछ नहीं किया। बेटा तू अपने पापा को मत बता। जो तू बोलेगा में करुंगी।

मै: मुझे कुछ नहीं कराना। बताना तो पड़ेगा।

मां: प्लीज़ बेटा मैं तेरी हाथ जोड़ती हूं।

मैंने सोचते हुए कहां-

मै: ठीक है नहीं बताने का अपने कपड़े उतारो और घूम कर झुक जाओ।

मां: ये क्या बोल रहा है? शर्म नहीं आ रही तुझे, ये सब करेगा मेरे साथ?

मै: ठीक है मत करो।

मैंने जैसे से फोन निकाला और पापा को लगा दिया।

मां: रूक जा मैं करती हूं।

मैं: करो तब काल कट होगी ( फोन में रिंग जा रही थी)।

दोस्तों अगले भाग में पढ़े कैसे मैंने मां को सबक सिखाया। अगर कहानी अच्छी लगी तो मुझे ईमेल करें। पहले पार्ट में मेल दिया हुआ है। उस पर आप मुझे अपनी कहानी भी ईमेल कर सकते हैं।

अगला भाग पढ़े:-मैं, मां और ट्रेन का सफर-3

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