दोस्तो, आज आपके लिए एक नई कहानी पेश है।यह एक ऐसी कथा है जो बताती है कि जब काम दिमाग में चढ़ जाता है तो फिर और कुछ नहीं सूझता।यह कहानी है इलाहाबाद के रहने वाली एक बहुत ही संभ्रांत घर की महिला जिसका नाम है सरोजिनी।अब इलाहबाद में सरोजिनी को ढूंढने मत निकाल पड़ना क्योंकि सरोजिनी की पहचान छुपाने के लिए शहर का नाम बदल प्रिया गया है। बाकी कहानी में आने वाले सभी पात्रों के नाम असली हैं और सभी घटनाएँ बिल्कुल सच्ची हैं।
मैं, सरोजिनी, उम्र करीब 53 वर्ष, इलाहाबाद के एक अमीर और रसूखदार घर की मालकिन हूँ। पति के बहुत से कारोबार हैं, दोनों बेटे और मेरे पति मिल कर कारोबार संभालते हैं।मगर जितना बड़ा कारोबार होता है, उतनी ही परेशानियाँ भी होती हैं।इन्हीं परेशानियों की वजह से मेरे पति को हाई शूगर हो गई, शूगर का सबसे ज़्यादा असर उनकी आँखों, स्किन और सेक्स पावर पर हुआ। जो आदमी मुझे आधा पौना घंटा रगड़ता था वो इंसान अब इस हालत में था कि मैं जो मर्ज़ी कर लूँ मगर उसके अंग में कोई करार नहीं आता था, ज़िंदा मुर्दा एक समान था।
अब तो हालत यह हो गई कि पति देव मेरी चाटते, मैं उनका मरा हुआ लिंग चूसती, वो खुद उस नकली लंड को मेरी योनि में पेलते, और जब दोनों शांत हो जाते तो सो जाते।कभी कभी मैं अकेली भी कर लेती, कभी कभी जब मेरा दिल करता तो पति के सामने ही कर लेती… वो भी हंस देते, उन्हें पता था कि मैं जो भी कर रही हूँ उनके सामने ही कर रही हूँ।
बेशक मेरी सेक्स की ज़रूरत पूरी हो रही थी, मगर फिर दिल में एक बात बार बार आती कि अगर कोई सच में ऐसा मर्द हो जिसका लंड सच में इस डिल्डो (नकली लंड) जितना तगड़ा हो तो उससे चुद कर क्या मज़ा आए!मगर इसके लिए मुझे बाहर किसी और मर्द से चुदवाना पड़ता और वो मेरी बदनामी का कारण हो सकता था।चलो खैर…
शाम को हम कभी कभार क्लब चले जाते थे, अब जब घर में बेइंतेहा पैसा हो तो पैसा अपने साथ बहुत सी बुरी आदतें भी लाता है। हमारे घर में सभी को शराब, सिगरेट की आदत थी। सभी मर्दों को और औरतों को भी।घर की बहुएँ भी पीती थी, मैं तो सास थी, मैं कैसे पीछे रह जाती।पति को जुआ खेलने की भी लत थी। सिर्फ यही नहीं और सब तरह की बुरी बातें भी हमारे घर में हो रही थी।मुझे पता था के मेरे दोनों बेटों की बाहर भी सेटिंग थी और तो और मेरी दोनों बहुओं के भी बाहर यार रखे हुये थे, मगर हाई सोसाइटी में इन बातों को कोई महत्व नहीं प्रिया जाता।
दिवाली की रात थी, हम सब क्लब में थे, सबने उस दिन खूब दारू पी।करीब ढाई बजे जब मुझे लगा कि मुझे ज़्यादा हो गई है तो मैंने अपने पति से घर चलने को कहा।मगर उनके तो पत्ते फंसे थे, वो बोले- तुम जाओ घर, मैं तो अभी और खेलूँगा।
मैं क्या करती, बाहर आई, नशे में मैं लड़खड़ा रही थी, कार में बैठी और ड्राइवर घर तक ले आया।कार से उतर कर जाने लगी तो लड़खड़ा के गिर पड़ी। ड्राइवर भागा भागा आया और आकार उसने मुझे उठाया- अरे मैम संभाल कर!बेशक उसने मुझे सहारा देकर उठाया, मगर उसके हाथों के छूने से मैं पहचान गई कि साला मौके का फायदा उठा रहा है। वर्ना संभालने में कोई किसी औरत की छाती पकड़ता है।मैंने उसका हाथ आराम से हटा प्रिया।
फिर एक बार सोचा, आज घर में कोई नहीं है, अगर मैं इसे ही अपने बेडरूम में ले जाऊँ तो?फिर सोचा, नहीं नहीं, यह तो पता नहीं किस किस को बताएगा कि मैंने मेम साब की ली है।छोड़ो इसे, मैं खुद को संभालती अपने बेडरूम में आ गई ए सी ऑन किया, बाथरूम में गई, अपने सारे कपड़े उतारे, पहले तो शावर के नीचे बैठे के खूब नहाई, फिर वापिस अपने कमरे में बिना कोई कपड़ा पहने ही आ गई!
मगर यह क्या, कमरे की बत्ती क्यों बंद है, मैं तो जला कर गई थी।जैसे ही मैं बत्ती जलाने लगी, किसी ने मुझे पीछे से धर दबोचा और मुझे पटखनी देकर नीचे कालीन पे ही गिरा प्रिया।उसने एक हाथ से मेरा मुँह बंद किया और बोला- देखो आंटी अगर चुप रहोगी तो जान बच जाएगी।
मैंने उसे इशारे में हाँ कही।उसने मेरे मुँह से धीरे से अपना हाथ हटा लिया।‘क्या चाहते हो?’ मैंने थोड़ा कड़क कर पूछा।‘मैं एक चोर हूँ और तेरे घर में चोरी करने आया हूँ।’ वो बोला।
मैंने पलट कर उसकी तरफ देखा, उसके मुँह पे कपड़ा बंधा था। मगर मैंने यह भी महसूस किया था कि जैसे उसने मुझे नीचे गिराने में और मुझे दबा के रखने में अपनी ताक़त दिखाई थी, वाकई वो एक तगड़ा मर्द था।मेरे दिमाग में तभी एक खुराफात ने जन्म ले लिया, मैं बोली- कितने की चोरी करोगे हमारे घर में?वो बोला- जितने की हो सके!मैंने कहा- अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ तो क्या तू मेरे लिए एक काम करेगा?‘क्या काम’ उसने पूछा।मैंने कहा- पहले छोड़ तो!वो बोला- अगर तुमने शोर मचा प्रिया तो… मैं ये चक्कू तुम्हारे आर पार कर दूँगा।मैंने कहा- अबे चूतिये, जो ये तू हाथ में लिए फिरता है न, इससे बड़े बड़े से खेली हूँ, मैं, ठाकुरों की लड़की हूँ, इन छोटी मोटी चीजों से नहीं डरती।
उसकी पकड़ मुझ पर ढीली पड़ गई।मैंने उसे धक्का दे के नीचे गिरा प्रिया और उठ कर कमरे की बत्ती जलाई।‘ओ तेरे दी, आप तो नंगी हैं?’ कह कर उसने अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया।मैंने कहा- न जब पिछले पाँच मिनट से मुझे नीचे दबा कर लेटा था, तब नहीं पता था कि मैं नंगी हूँ?‘जी, मैंने ख्याल नहीं किया!’ वो बोला।‘अच्छा, और ये जो तेरी पेंट में उठा हुआ दिख रहा है, वो क्या?’ कह कर मैं ड्रॉअर के पास गई, उसमें से एक सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाला, एक सिगरेट खुद लगाई एक उस को दी और जाकर बेड पे बैठ गई।
मैंने उसे पास बुलाया और बेड पर बैठने का इशारा किया।वो आकर बेड के एक किनारे पे बैठ गया और मेरे गुप्तांगों को चोरी चोरी देखने लगा।‘क्यों, कभी कोई औरत नहीं देखी?’ मैंने एक कश लगा कर उससे पूछा।वो बोला- जी बहुत देखी हैं, मगर आपकी उम्र की पहली बार देखी है।‘क्यों, क्या खराबी है मेरी उम्र में?’ मैंने कहा।
‘क्यों, मैं क्या तुम्हें औरत नहीं दिखती, जो इतना हैरान हो रहे हो?’ मुझे भी थोड़ा सा बुरा लगा।‘मगर आंटी, मैंने आज तक कभी इतनी उम्र की औरत के साथ नहीं किया।’ वो बोला।‘देख सबसे पहले तो मुझे आंटी मत बोल, दूसरी बात, अगर तुम्हें मज़ा और पैसे दोनों मिले तो दिक्कत क्या है यार?’ मैंने कहा।उसने फिर से मेरे नंगे बदन को देखा और बोला- पैसा कितना दोगी?मैंने कहा- तुझे कितना चाहिए?वो बोला- 5 हज़ार।
मैंने दराज़ से पैसे निकले और बिना गिने उसकी तरफ फेंक दिये।उसने पैसे उठाए और गिने- ये तो 9 हज़ार हैं।‘गो टू बाथरूम और नहा कर आओ!’ मैंने उसको हुकुम सुनाया।वो बाथरूम में चला गया।
मैंने एक पेग और बना लिया और धीरे धीरे पीने लगी।पेग ले कर मैं बाथरूम के दरवाजे पे गई, दरवाजा खोला, वो अंदर बिल्कुल नंगा नहा रहा था मेरी तरफ उसकी पीठ थी।मैंने उसका काला बदन, चौड़ा सीना, मजबूत जांघें निहारी और वहीं से खड़ी खड़ी मैंने कहा- जब नहा लो तो कपड़े मत पहनना, ऐसे ही बाहर आ जाना।
जब वो नहा लिया तो मेरे कहे अनुसार नहा के नंगा ही बाहर आ गया, जब वो बाहर आया तो मैंने उसका लंड भी देखा।मैंने उसे इशारे से अपने पास बुलाया।वो मेरे पास आया, तो मैंने उसका लंड पकड़ के उसे अपने पास खींच लिया और उसका लंड सीधे अपने मुँह में ले लिया।एक मिनट से भी कम समय में उसका लंड तन कर लोहा हो गया।
मैं चाहती थी के उसका लंड मैं चबा कर खा जाऊँ।‘मेरी चूत चाटेगा?’ मैंने उससे पूछा।वो बोला- हाँ चाट लूँगा, पैसे जो मिले हैं।
उसने मेरी कमर के दोनों तरफ अपनी बाहें कसी और खुद बेड पर लेट गया और मुझे अपनी ताकत से घूमा कर मुझे अपने ऊपर लेटा लिया।वाह क्या ताकत थी, उसकी इसी अदा पर मैं निहाल हो गई।
वो मेरी चूत चाटने लगा, मुझे बहुत मज़ा आया तो मैंने भी उसका लंड जितना हो सकता था अपने मुँह के अंदर तक लेकर चूसा।दो मिनट की चूसा चासी के बाद उसने मुझे नीचे लेटा प्रियाऔर खुद ऊपर आ गया, उसने अपना लंड मेरी योनि पे रखा और एक ही धक्के से आधे से भी ज़्यादा लंड मेरे जिस्म में उतार प्रिया।मैं दर्द से बिलबिला उठी, मगर उस पर अब काम सवार हो गया था, उसने मेरी दोनों छातियाँ अपने सख्त हाथों में पकड़ ली और मसल के रख दी।
ऊपर वो मेरी छातियाँ मसल रहा था और नीचे लोहे जैसे अपने लंड से मेरे जिस्म के दो टुकड़े करने में लगा था।हर बार उसका लंड मेरी योनि के आखरी सिरे पे जाकर ज़ोर से लगता और मेरी हल्की से चीख निकल जाती।वो अपना पूरी लंड बाहर निकाल कर फिर से अंदर डालता और मेरी योनि के होंठों से लेकर मेरी बच्चेदानी तक उसके सख्त लंड की मार झेल रही थी। मैं तो सिर्फ एक चुदाई चाहती थी, मगर ये तो एक चुदाई से कहीं ज़्यादा थी।
मेरी तो जान निकली जा रही थी, वो कभी मेरे होंठ चूसता, कभी मेरे गालों को अपने दाँतो से काटता, मेरे स्तनों पर सभी जगह उसके दाँतों के निशान पड़ चुके थे।मैं इस ताकतवर संभोग के लिए तैयार नहीं थी, आज मुझे एहसास हो रहा था कि मैं सच में बूढ़ी हो गई हूँ।एक नौजवान औरत ही इस तरह के ताकतवर संभोग को झेल सकती है, मैं नहीं।शायद इसी लिए, मैं 3-4 मिनट की जोरदार चुदाई में ही झड़ गई।
मगर मेरे झड़ने से उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वो उसी जोश और जुनून से मुझे चोद रहा था।मैं तो बेहाल हो कर नीचे पड़ी थी।
करीब सात मिनट उसने मुझे और चोदा और फिर अपनी पूरी ताकत झोंक कर वो मेरी बूढ़ी चूत में स्खलित हुआ।उसके वीर्य की धारें मुझे मेरी चूत के अंदर मेरी बच्चेदानी पर पड़ती ऐसे लगी जैसे कोई पिचकारी से पानी की धार मार रहा है।उस नौजवान मर्द की एक चुदाई ने ही मेरे बदन को तोड़ कर रख प्रिया।
वो मेरी बगल में लेट गया।मैं उठी और मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा, उसमें अब भी बहुत करार था।मैंने उसे अपनी जीभ से चाटा और मुँह में लेकर चूसा, उसके वीर्य को उसके लंड से चाट चाट कर खा गई।
‘क्यों आंटी, मज़ा आया?’ वो बोला।‘सच कहूँ, तूने तो मेरी माँ चोद के रख दी, बहुत ताकत है रे तुझमें।’ मैंने उसके सीने पे हाथ फिरते हुये कहा।‘और चुदेगी?’ उसने मेरे निप्पल को अपनी उँगलियों से मसलते हुये पूछा।‘नहीं, मेरी तो एक बार में ही तसल्ली करवा दी तूने, नाम क्या है तेरा?’ मैंने पूछा।‘उमेश, यह मेरा फोन नंबर है, फिर कभी ज़रूरत पड़ी तो फोन करना, पर एक बात कहूँ, मुझे भी तेरी लेकर बड़ा मज़ा आया, इस उम्र में भी तू बड़ी हॉट है।’ कह कर वो उठा और कपड़े पहनने लगा।