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नौकर-नौकरानी पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 1,231 बार

छोटी मेमसाब की चूत सुजा दी

राज बिहारी

14 Jun 2008 को प्रकाशित

छोटी मेमसाब की चूत सुजा दी
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यह कहानी एक साल पुरानी है जिसमें मैंने अपनी ही मालकिन की बेटी को चोदा।दोस्तो, मैं एक बिहार के छोटे गाँव में पला – बढ़ा हूँ और मेरे पैदा होने कुछ महीनों बाद ही मेरा बाप भी चल बसा।मेरा नाम राज पड़ा, मैं अपनी माँ का अकेला बेटा था और मेरी तीन बहनें भी थी।हम बच्चे धीरे – धीरे माँ के ऊपर अब बोझ बनने लगे जिसके बारे में सोच मेरा दिमाग घूम जाया करता था।

तभी एक दिन मेरी मुलाकात एक भईया से हुई जिन्होंने मुझे मुंबई के बड़े से मकान में नौकर का काम करने के लिए प्रस्ताव प्रिया।मैं जैसे – तैसे अपनी माँ और बहनों को राम भरोसे गाँव में छोड़ पैसे कमाने शहर आ गया।

मेरी मालकिन की एक ही बेटी थी जिसका नाम नेहा था उसे मैं छोटी मेमसाब कहता था और जब हमें समय मिलता तो हम खेल भी लिया करते।अब मुझे उनके यहाँ काम करते हुए 6 साल हो चुके थे और मैं 19 साल का हो चुका था।

मैं समय – समय पर अपने गाँव में माँ के पास रुपये भी भेजा करता था, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था पर अब मेरी जवानी की दस्तक ने मेरी आने वाली पूरी जिंदगी ही बदल दी।

मैंने कभी लड़की के स्पर्श को महसूस नहीं किया था हालांकि चोदने का सारा ज्ञान मेरे दिलो-दिमाग में बसा हुआ था।

एक दिन मेरी मालकिन एक महीने के लिए अपने किसी काम से बाहर गई हुई थी और इस बीच अब घर में मैं और उनकी बेटी नेहा ही अकेले रह गए थे।छोटी मेमसाब भी काफी बड़ी हो चुकी थी और उम्र में मुझसे सयानी भी।

एक दिन नहाने के बाद छोटी मेमसाब नेहा का कॉलेज जाने वक्त हुआ तो उसने मुझसे कहा– राज.. आज मेरा मन नहीं है.. कॉलेज जाने का..!!मैं– क्यूँ छोटी मेमसाब.. चली जाइये..!!नेहा– नहीं बस सोच रही थी.. क्यूँ ना आज कुछ वक्त तुम्हारे साथ गुज़ार लूँ..!!

जिस पर मैंने बस चुप्पी मार ली और शान्ति से अपने कमरे में चला गया। मैं समझ चुका था कि छोटी मेमसाब के दिमाग में अब कुछऔर ही चल रहा है पर मेरे अंदर शुरुआत करने की ज़रा सी भी हिम्मत ना थी।

इतने में छोटी मेमसाब मेरे कमरे में आई, उसने केवल नीचे तौलिया पहने हुआ था और ऊपर हल्का सा कोई कपड़ा औढ़ा हुआ था।

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मैं नेहा को देख पगला गया और शर्म के मारे अपनी मुंडी घुमा ली।इतने में उसने मेरे चेहरे को अपनी तरफ घुमाते हुए अपने ऊपर वाले कपड़े को उठाते हुए कहा– मैं जानती हूँ.. तुम मुझे चुपके चुपके देखते हो.. तो लो आज कुआँ खुद चलकर प्यासे के पास आया है।

मैं सीधा खड़ा हुआ और नेहा के होठों को चूसते हुए उसके दोनों चूचों को भींचने लगा।कुछ देर बाद मैं थोड़ा नीचे की ओर आया मुंह में भर भर के दोनों को चूसने लगा। उसके चूचे एकदम सख्त हो गए थे जिन्हें मैं लगातार थप्पड़ मारते हुए ढीले कर रहा था।

अब धीरे–धीरे मेरा हाथ उसके तौलिये तक पहुंचा और मैंने आखिरकार उसके तौलिए को खोलते हुए देखा कि उसने अंदर पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी।अब मेरे सामने छोटी मेमसाब बिल्कुल जन्मजात नंगी खड़ी थी जिसे मैंने अपने बिसतर पर लिटाया और उसकी चूत को अपनी जीभ से सहलाने लगा, जिस पर उत्सुक होकर नेहा अब उँगलियों अपनी चूत के ऊपर रगड़ते हुए चिल्लाने लगी- चोद दो राज मुझे.. बुझा दो इस रांड की प्यास।

नेहा अब मस्त वाली सिसकारियाँ भर रही थी।तभी मैंने अपनी अंगुलियाँ उसकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर प्रिया। मेरी दस मिनट की मेहनत से नेहा की पूरी की पूरी चूतगीली हो चुकी थी।

नेहा ने अपनी जाँघों की पंखुड़ियों को खोल प्रिया और अचनक ना जाने मेरे लंड में कहाँ से इतनी ताकत आ गई और वो एकदम तन गया और अब मेरा लंड सही उसकी चूत के मुहाने के सामने टिका हुआ था।फिर क्या था, मैंने आखिरी बार नेहा की चूचियों की चुसकी लेते हुए बस अपने चूतड़ों के ज़ोरदार के झटके से अपने लंड को उसकी चूत की गहराई में गुम कर प्रिया और उसकी जोर की चीख निकल पड़ी।

अब मेरे मुंह से भी गाली निकल पड़ी– ले… माँ की लौड़ी, आज से तू मेरी कुतिया है।अब मैं अन्धाधुंध बस उसकी चूत में अपने लंड की गोलियाँ ही बरसाता चला गया। वो मटक मटक मेरे लंड को बड़े ही चाव से लेती रही और अब तो उसकी छीकें भी मज़े में परिवर्तित हो चुकी थी।

मैंने अपने लंड का मुठ भी अपनी नेहा रांड मेमसाब के ऊपर ही डाल प्रिया और लगभग एक महीने तक मैं उसे 50 से ज्यादा बार चोद चुका था।मैंने एक महीने में उसकी चूत इतनी ठोकी – बजाई कि उसके चूतड़ों का नाप 28 से 32 हो गया जिससे मेरी मालकिन के आते ही हमारी रंगरलियों के बारे में पता चल गया और उन्होंने अपनी इज्ज़त बचाने के लिए अपनी बेटी नेहा की शादी मेरे साथ करवा दी।

अब मैं इतना अमीर हो चुका हूँ कि मैंने अपनी तीनों बहनों की शादी करा दी और अपनी माँ के साथ सुखद जीवन बिता रहा हूँ।दोस्तो, आज हम पति पत्नी हैं पर चुदाई के मामले में नेहा आज भी मेरी कुतिया ही है।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अजय त्रिपाठी

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

रिशु राज

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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