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Parivar Me Chudai पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 1,022 बार

मेरी चुदक्कड़ चाची-6(Meri chudakkad chachi-6)

rsaasr

18 Jul 2014 को प्रकाशित

मेरी चुदक्कड़ चाची-6(Meri chudakkad chachi-6)
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पिछला भाग पढ़े:-मेरी चुदक्कड़ चाची-5

अब जैसा आपने पिछली कहानी में पढ़ा कि मैं तीन सालों के बाद चाची से मिलने गया था, और फिर कैसे मैं उनको खेत में छोड़ कर उनकी अधूरी प्यास को मिटाता हूं। अब आगे देखिये कि चाची और मैं, एक शादी में, जो कि चाची के फूफा की लड़की की दो दिन बाद होने वाली थी, वहाँ जा रहे थे।

मैं, चाची, उनका दस साल का लड़का (छोटू) और चाची का फूफा जो हमें लेने आया था, हम सब गाँव जा रहे थे। सुबह दस बजे का समय था। फूफा के गाँव जाने में चार घंटे का समय लगने वाला था। छोटू और फूफा जी आगे की सीट पर सो गये, और फिर पीछे बस में मैं और चाची अकेले ही लंबी सीट पर थे। बस में सब लोग बैठे हुए थे। चाची खिड़की की तरफ बैठी हुई थी और मैं उनके बाजू में था।

कुछ एक घंटे के सफर के बाद चाची की आँख लग गयी, और बस भी काफी खाली हो गयी थी। फिर मैंने देखा खिड़की में हवा से चाची की साड़ी का पल्लू खिसक गया था और चाची के स्तनों से बनी ब्लाउज में दरार दिखने लगी। मैं चाची के मम्मों पर हाथ फेरने लगा, धीरे-धीरे चाची की चूचियाँ कड़क होने लगी।

मैंने ब्लाउज में हाथ डाला और चूचियाँ दबाने लगा। इतने में चाची सिसकियाँ लेकर नींद से उठ गयी। मेरा हाथ ब्लाउज में देख कर, चाची घबरा गयी। चाची ने बस में नज़र घुमायी, बस में सब सोये हुए थे। हम दोनों पीछे अकेले थे।

चाची: “ये क्या कर रहा है, कोई देख लेगा तो?”

मैं: “क्या करूँ चाची, तेरे गोरे बदन को देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया। मेरे लंड को शांत करना मुश्किल हो रहा था।”

चाची: “रुक तू, मैं अभी इसकी आग मिटाती हूं।”

चाची ने फौरन मेरी पैंट की बटन खोली और मैंने खड़ा लंड चड्डी में से बाहर निकाल दिया। चाची मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उनके मम्मे दबाते रहा। बस में हिलते हुए कभी मेरा लंड चाची के मुँह में पूरा अन्दर तक जा रहा था, और मुझे पूरा आनंद महसूस हो रहा था।

चाची मादक होकर मेरा लंड चूस रही थी और मैं आँखें बंद कर पूरा मज़ा ले रहा था। हम दोनों पूरी बस से बेफिक्र होकर एक-दूसरे का मज़ा ले रहे थे। हमारे शरीर की गर्मी में हम दोनों लिपटे हुए थे।

कुछ देर बाद मैं चाची के मुँह में झड़ गया। पर अब चाची की आँखों में मुझे हवस दिखने लगी। मैं तो शांत हो चुका था, पर वो शांत नहीं थी। इससे पहले चाची कुछ करती, मैंने चाची के होंठों को मुँह में भर लिया और झट चाची की कमर में हाथ फेरते हुए, चाची के पेटीकोट में डाल कर चूत में उँगली करना शुरू किया।

मैं पूरी ताकत से चाची की चूत में उँगलियाँ भर कर चूत सहलाने लगा। चाची बार-बार होंठों की किस्स को छोड़ कर, चीखना चाहती थी। पर मैं पूरी ताकत से चाची की चूत मारता रहा।

कुछ देर बाद चूत से हल्का पानी निकलने लगा और मैं रफ्तार बढ़ाते हुए जोर से चारों उँगलियों को चाची की चूत में भरा और चलते हुए बस के हिलने से चाची ऊपर-नीचे होने लगी। फिर चाची ने मेरा हाथ पकड़ा और खुद ही सीट पर आगे-पीछे होने लगी।

फिर रास्ते में एक बड़ा गड्ढा आया और मेरी उंगलियाँ चाची की चूत के पूरा अन्दर तक चली गयी, और चूत का पूरा पानी निकल गया। बस की पूरी सीट और चाची का पेटीकोट गीला हो चुका था। फिर चाची झड़ने के बाद सीट पर ही मेरी गोदी में सो गयी और मेरी भी आँख लग गयी।

सफर खत्म होने से एक घंटा पहले फूफा हमें उठाने आया और हमारी सीट पर ही बैठ गया। फिर मैं, चाची और फूफा आपस में बातें करने लगे।

फूफा: “अनुज तुम तो सरिता को कॉलेज के दिनों से जानते हो। उसने मुझे तुम्हें भी साथ लाने के लिये जिद करके कहा था।”

चाची: “हाँ फूफा जी, अनुज बेटा सरिता का अच्छा दोस्त था।”

मैं: “सरिता ने काफी जिद की और मैं उसे मना भी नहीं कर पाया।”

कुछ देर बाद फूफा चला गया और मैं फिर चाची से बतियाने लगा। फिर हम गाँव पहुँच गये और शादी वाले घर गये। वहाँ पूरा घर सजा हुआ था। हमारे पहुँचते ही सरिता आयी और चाची ने उसे गले लगा लिया। फिर सरिता और मेरी आँखें मिली और खुश होकर उसने मुझे भी गले लगा लिया।

खैर, हमारे घर पहुँचने के एक घंटे बाद दूल्हा और उसका परिवार भी आ गया। दरअसल दूल्हे का गाँव लगभग सौ किमी दूर था, इसलिये वो एक दिन पहले ही आ गये थे। खैर, उनका स्वागत हुआ और फिर फूफा जी ने मुझे दूल्हे से मिलवाया।

चाची और मेरा सामान एक कमरे में रख दिया। रात को खाना खाने के बाद, देर रात तक संगीत का कार्यक्रम हुआ। रात को सब सोने चले गये और मैं सरिता के कमरे में, चाची और मैं बातें कर रहे थे। हम हमारे कॉलेज के दिनों की बातें करने लगे कि तभी चाची उठ कर चली गयी। चाची के जाते ही हम दोनों धीमी आवाज में बात करने लगे।

सरिता: “तूने किसी को बताया तो नहीं ना, कॉलेज में जो हम दोनों के बीच था उसके बारे में?”

मैं: “नहीं रे, तू भी मेरे किस्से चाची या किसी को भी मत बताना।”

दोस्तों, सरिता बहुत ही हवसी लड़की थी। मेरे कॉलेज के कई सीनियर लोगों और मेरी क्लास वालों से मरवा चुकी थी। एक बार मेरे एक दोस्त के साथ मैंने उसे चुदाई करते हुए देख लिया था। फिर उसी रात मैंने मेरे दोस्त के बाद उसकी चूत का स्वाद चखा था। खैर, चाची को मैंने अभी ये सब नहीं बताया था।

सरिता की आँखों से पता चल रहा था कि वो अभी भी उतनी ही कामुक थी। वो मेरे करीब आयी और बोली-

सरिता: “कसम से कितने दिनों से घर पर ही हूं, और मेरी चूत पूरी प्यासी तड़प रही है।”

मैं: “तो क्या इस गाँव में किसी से भी नहीं मरवायी है क्या तूने?”

सरिता: “नहीं यार, तू आया है। प्लीज मेरी जान तोड़ चुदाई कर ना।”

मैं तुरन्त उसके करीब गया और उसके लम्बे बालों में हाथ फंसा कर, किस्स करना शुरू किया। हम दोनों पूरी जान से एक-दूसरे को चूम रहे थे। धीरे से मैंने उसके लहंगे को ऊपर किया और वो मेरे पजामे में हाथ डाल मेरे सने लंड को पकड़ सहलाने लगी।

कमरे में पूरा गरम माहौल था और हम दोनों लिपट कर एक-दूसरे को चूस रहे थे। माहौल काफी गरम था, और फिर मैं पीछे होकर उसके सलवार के ऊपर के बटन खोलने लगा। सरिता के स्तन चाची जैसे नहीं थे पर उसके कटीले बदन का रूप ही ऐसा था कि मानो सलवार फाड़ कर टूट पडूँ।

खैर, मैं सलवार खोल कर उसके मम्मे कस के दबाने लगा और वो सिसकियाँ भरने लगी। हम दोनों पूरे भूखे जानवर की तरह एक-दूसरे के बदन को कस के जकड़ लिये थे। फिर धीरे से मैंने ब्लाउज खोला और सरिता के मम्मे दबाने लगा। हम दोनों एक-दूसरे में इतना लीन थे कि तभी अचानक से दरवाजे के पास किसी की आवाज आयी।

सरिता और मैं डर के दोनों अलग हुए और सरिता ने कपड़े वापस पहने और फिर दरवाजे पर देखा तो चाची कमरे में आई।

चाची: “चल अनुज, और कितनी बातें करेगा, सोने भी दे सरिता को अब।”

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मैं उठ कर वापस चाची के कमरे में चला गया और सो गया। फिर अगले दिन, दिन भर शादी के कार्यक्रम हुए और फिर रात को सभी मेहमान लगभग जा चुके थे। बस अब घर के लोग और दूल्हा और उसका परिवार रुका हुआ था। फिर दूल्हा-दुल्हन का कमरा सजाया गया और बाकी सब अपने-अपने कमरे में चले गये। पूरे दिन में बस चाची के साथ एक अकेले कमरे में जाने को उत्सुक था। पर चाची मानो जबरदस्ती मेरे से दूरी बना कर तड़पा रही थी।

चूंकि दूल्हा मेरे कॉलेज का सीनियर था, तो मेरी उससे अच्छी दोस्ती हो गयी थी। फिर दूल्हे के दोस्तों ने और मैंने छत पर दारू का प्रोग्राम बनाया, और मैं भी उसमें शामिल हो गया। फिर मैंने दूल्हे को बताया कि चाची को शक ना हो इसलिये मैं उनके कमरे में सोने के बाद आता हूं।

फिर मैं चाची के पास गया और चाची, मैं और छोटू तीनों उसी कमरे में सोने चले गये। कमरे में घुसते ही छोटू सो गया और मैं चाची को पकड़ कर उनके बदन पर टूट पड़ा।

चाची: “क्या कर रहा है, पागल है क्या? छोटू उठ गया तो मुसीबत हो जाएगी।”

दो दिन से चाची के जिस्म से दूर रह कर मेरी हवस चरम सीमा पर थी।

मैं: “क्या बोल रही हो तुम, सो गया है वो, कुछ नहीं होगा।”

चाची: “चल हट जा, बहुत हो गया है आज वैसे भी, मैं थक गयी हूं।”

फिर चाची पलंग पर सो गयी और मैं नीचे लगे बिस्तर पर सो गया। देर रात तक मैं चाची के सोने का इंतज़ार करने लगा और आँखें बंद कर लेटा हुआ था। फिर मैं उठा और देखने लगा कि छोटू और चाची सो गये हैं। और फिर मेरी ओर देख कर संतुष्टि ली, मैंने फौरन आँखें बंद की। चाची धीरे से कमरे से बाहर चली गयी।

मैं चुपके से उनके पीछे गया। हमारे कमरे के बाजू में ही दूल्हा और दुल्हन की सुहागरात वाला कमरा था। इतने में सुहागरात वाले कमरे पर मेरी नज़र पड़ी। खिड़की से झाँक कर देखा कि सरिता अकेली थी। वो मोबाइल में पोर्न वीडियो देख, अपनी चूत रगड़ रही थी। मैं दरवाजा खोल कमरे में घुस गया। सरिता मुझे देख कर फौरन पलंग से खड़ी हो गयी। मैं चुप-चाप उसके पास गया।

सरिता: “क्या देख रहा है, किसी ने देख लिया तो दोनों मरेंगे।”

मैं: “कौन ही देखेगा, और तेरा पति सुहागरात के दिन भी दोस्तों के साथ नशे में लथ-पथ है।”

सरिता: “नहीं यार, वो चूतिया अपने दोस्तों के साथ पी रहा है! अब नशे में आएगा पता नहीं कितनी मर्दानगी रहती है उसमें।”

मैं: “कॉलेज के दिनों से जानता हूं उसे, उसको शराब ज्यादा पीने पर भी नहीं चढ़ती है। और फिर उसने तो क्या कई अच्छे-अच्छों ने तेरी गांड तोड़ पेला है, अब क्या डर रही है तू।”

सरिता: “हाँ साले, जैसे तूने तो मेरा स्वाद नहीं चखा होगा। याद नहीं क्या पहले साल में तूने जो मेरी सील तोड़ी थी, और कितनी रगड कर चूत फाड़ी थी।”

मैं: “कहो तो शायद आज तेरा पति ना आये। वैसे भी कल की आग अभी भी बाकी है, मैं तेरी चूत को फिर से खोलना चाहूंगा।”

सरिता मेरे करीब आयी और मेरे लंड पर पजामे के ऊपर से ही सहलाने लगी।

सरिता: “आजा यार, मेरी चूत बहुत गीली हो रही है। वैसे भी तेरी मर्दानगी और तेरे लंड के लिये मेरी चूत कब से तड़प रही है।”

मैंने अपनी पैंट उतार फेंकी और फिर कड़ा लिंग हवा में तन कर खड़ा हो गया। सरिता की आँखें अभी भी बंद थी, उसके होंठ हल्के से काँप रहे थे, उसका शरीर पूरी तरह उस पल के लिए तैयार था। मैंने अपनी चड्डी को एक झटके में नीचे खींचा और खुद को उसकी गरमाहट और नमी के बीच झोंक दिया।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और सरिता ने मेरे गोटे चूसने शुरू कर दिये। मेरा लंड सलामी देने लगा। सरिता मेरे सामने खड़ी हुई और लहंगा निकाल कर सिर्फ ब्लाउज और चड्डी में थी। मैंने उसका ब्लाउज खोल कर अलग किया और मम्मे दबाने लगा।मेरी उँगलियों का स्पर्श पाते ही मानो उसके शरीर में अलग ही कंपन होने लगी। मैंने अपने दाँत से उसके एक मम्मे को काट लिया और अब उसके शरीर में अलग ही सरसराहट दौड़ रही थी। उसने अपने हाथ से मेरे बाल जकड़ लिये और दबा कर कस के अपने जिस्म से लगा लिया।

मैं उससे अलग हुआ और सरिता के होंठों को चूमते हुए बिस्तर पर लेटा दिया। फिर मैंने उसकी पैंटी को निकाला और उसकी चिकनी गुलाबी चूत पर हल्के बाल थे। चूत देखने में साफ़ दिखाई पड़ा कि काफी समय से उसकी चूत में लंड का स्पर्श नहीं मिला है। अतः मैंने समय ना गंवाते हुए उसकी चूत में अपना लंड सेट किया और धीरे से लंड का टोपा अन्दर डालने लगा। सरिता की धीमी सिसकियाँ निकलने लगी।

आह्ह्ह्ह… मैंने फिर एक झटके में उसकी टाइट चूत में पूरा लंड डाल दिया। पर सिर्फ आधा लंड ही अन्दर जा पाया। सरिता की जोर से चीख निकली।

सरिता: “आह्ह्ह्ह, क्या कर रहा है, आराम से कर ना।”

मैं फिर पूरा लंड बाहर निकाला और एक बार फिर से धक्का देकर पूरा लंड अन्दर डाल दिया। सरिता जो मेरी पीठ को कस के जकड़े थी, उसने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिये। मैं इस दर्द से और जोर से झटके देने लगा और चूत से उसकी बच्चा-दानी तक मेरा लंड घुस रहा था।

हर झटके के साथ उसकी चीख और जोर से निकल रही थी। फिर कुछ 30 झटकों के बाद वो मेरे जिस्म से चिपक गयी और मैं उसे बिस्तर से उठा कर अपनी गोद में लेकर दीवार से टिका दिया। वो अपने पैर मेरी कमर में फँसा कर मेरी गोद में थी। फिर वो मेरे होंठ चूमने लगी और धीरे में मैंने अपना लंड सेट कर उसकी चूत में फिर से घुसा दिया। हमारे होंठ एक-दूसरे में कसे हुए थे तो सरिता धीरे-धीरे सिसकियाँ ले रही थी।

फिर कुछ दस बार ऐसे ही मैं उसकी चूत ठोकता रहा और फिर उसे खड़ा करके उल्टा घुमाया।

मैं: “अब तेरी गांड तोड़ने की बारी है। दीवार पर झुक जा।”

घुमाकर वो दीवार के सहारे थोड़ा झुक गयी, जिससे उसकी गांड थोड़ी पीछे की तरफ बाहर आ गयी। पीछे से उसकी गांड में लंड सेट कर एक जोर में ही पूरा अन्दर डाल दिया। जोर से डालते ही उसकी चीख निकली और वो दीवार पर पूरा नीचे झुक गयी। मैं जोर-जोर से थोड़ी देर तक उसकी गांड तोड़ता रहा, फिर मैंने लंड बाहर निकाला और उसकी चूत में डाल दिया। अभी जोर-जोर से ठोकने पर उसकी चूत से पानी टपकने लगा था। फिर वो बोली-

सरिता: “बस हुआ साले, मेरा पानी निकलने वाला है। रुक जा अब।”

मैं: “ऐसे कैसे जाने दूँ, अभी मेरा काम कहाँ हुआ है।”

मैं जोर-जोर से पूरी जान लगा कर पूरा लंड अन्दर तक घुसेड़ रहा था कि तभी अचानक से आवाज आयी।

कचक… और देखा कि रोहित, सरिता का पति रूम में आ गया।

अगला भाग पढ़े:-मेरी चुदक्कड़ चाची-7

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