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भाभी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 870 बार

भैया नरम भाभी गरम

सुमीत हैंडसम गोरखपुर

14 Jul 2025 को प्रकाशित

भैया नरम भाभी गरम
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वैसे कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आप लोगों को अपने बारे में बता दूँ. मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ. मेरी कद काठी बहुत ही सिम्पल है, मेरी लम्बाई करीब 6 फिट है. रंग सांवला, और दिखने में साधारण हूँ.

मेरी यह आप बीती आज से करीब दो साल पहले की है, जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था. हमारे पापा दो भाई हैं और हम लोगों का अभी संयुक्त परिवार है. बड़े पापा के एक लड़का और दो लड़कियां हैं… और हम कुल तीन भाई हैं.

हमारे बड़े भाई की बीवी, जिनका नाम साधना है… वो हमारी ही उम्र की है. वो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं. मैं जब भी साधना भाभी को देखता तो मेरा लंड खड़ा हो जाता. मगर मैं उनके नाम की मुठ मार कर अपने मन को मना लेता. साधना भाभी दिखने में इतनी सुन्दर लगती हैं कि मैं बता नहीं सकता. मेरी भाभी का रंग गोरा, कद 5 फीट 3 इंच, उन का फिगर करीब 34-28-32 का है. भाभी के गोल गोल खरबूजे देखकर किसी के भी मन में पानी आ जाए. मैं हमेशा उनको चोदने के बारे में सोचता रहता, मगर कभी मौका नहीं मिल पाया.वैसे मैं भाभी से अक्सर मजाक कर लिया करता था. भाभी भी कभी पीछे नहीं रहती थीं, वो भी खूब मजे लेती थीं.

मेरे बड़े भाई एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं. कुछ समय बाद उनको अपनी कंपनी के किसी काम से दो महीने के लिए दिल्ली जाना पड़ा. अंत में वो दिन आ ही गया जिसका हमें इन्तजार था, भैया दिल्ली चले गए. भाभी अब उदास रहने लगी थीं. लेकिन मैं पूरी कोशिश करता था कि भाभी कभी उदास न रहें.

मैं एक दिन भाभी से बोला- भाभी, आप इतना उदास क्यों रहती हो?तो उन्होंने कहा- देवर जी, जब तुम्हारी शादी हो जाएगी और तुम्हारी बीवी मायके चली जाएगी, तब तुम्हें पता चलेगा.मैंने कहा- भाभी, बीवी भले ही मायके चली जाए मगर हम तो आपके साथ खुश रह लेंगे.

गर्मी का महीना था, हमारे यहाँ गर्मियों में सभी लोग छतों पर ही सोया करते हैं. भाई के चले जाने पर भाभी भी अब छत पर ही सोया करती थीं. वैसे मैं बता दूँ कि मेरे घर की छत काफी बड़ी है.एक रात मैंने महसूस किया कि कोई फोन पर बात कर रहा है. मैंने करीब जा कर देखा तो भाभी छत के किनारे जा कर किसी से बात कर रही थीं. मैं छुप कर अब उन की बातें सुनने लगा. मैंने देखा कि भाभी भैया से बातें कर रही थीं. वो भैया से सेक्स की बातें कर रही थी. बातें करते करते भाभी गर्म हो गईं और वो अपनी मम्मे दबाने लगीं. फिर थोड़ी देर बाद वो अपनी चूत में उंगली भी करने लगी थीं.. साथ ही खूब सारी सेक्स की बातें भी कर रही थीं.

उन को ये सब करते देख मेरा भी लंड हिचकोले खाने लगा. मेरे मन में यही आ रहा था कि अभी जाऊं और अपनी भाभी को चोद दूँ.. मगर मैं डर रहा था.

तभी मुझे खांसी आ गई और मैं तुरंत वहाँ से भाग कर अपने बिस्तर पर सो गया. शायद भाभी को भी पता चल गया था कि मैं उन की सारी बातें सुन चुका हूँ. भाभी भी कुछ देर बाद आ कर अपने बिस्तर पर सो गईं. मैं भी सोने का प्रयास करने लगा.

तभी मैंने देखा कि भाभी अपना बिस्तर मेरे बगल में लगा रही हैं. मैं भी कुछ नहीं बोला, मेरी तो डर के मारे गांड फट गई.थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि भाभी मेरे बगल में अपने बिस्तर पर सोई हैं.

अब वो अपना मुँह मेरी तरफ करके सोई थी. वो जानने की कोशिश कर रही थीं कि मैं सोया नहीं हूँ.वो कुछ देर बाद ऐसे ही लेटी रहीं और फिर धीरे से बोलीं- सुमित?मैं जानबूझ कर कुछ नहीं बोला. मैं ये दिखाना चाह रहा था कि मैं सो रहा हूँ.

फिर भाभी मेरे कान में आकर बोलीं- अरे सुमित बाबू..अब मैं जग गया और बोला- हाँ भाभी बोलो.. और आप यहाँ कैसे?तो वो बोलीं- यार आज मैंने एक बहुत ही ख़राब सपना देखा और मैं बहुत डर गई हूँ, इसीलिए यहाँ तुम्हारे पास सो गई.मैंने कहा- कोई बात नहीं भाभी, आप यहीं सो जाओ.फिर वो बोलीं- कुछ देर हमसे बातें करो ना.मैंने कहा- ठीक है आप कोई बात शुरू करो.तो भाभी बोलीं- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?मैंने कहा- नहीं भाभी.. मगर आप कहो तो मैं आपको बना लूँ?तो भाभी बोलीं- तो बना लो ना रोका किस ने है?

मुझे कुछ हौसला आया, मैंने बोला- आपको तो पता ही है कि लोग अपनी गर्लफ्रेंड के साथ क्या करते हैं.भाभी बोलीं- देवर जी, मुझे तो नहीं पता.. आप बता दो.मैंने कहा- रहने दो भाभी.. कुछ नहीं करते, आप बस सो जाओ.फिर भाभी बोलीं- हाँ, हमें पता है कि क्या करते हैं.मैं तुरंत बोला- तो मैं भी वही करूँ?

भाभी भी जैसे वही सुनना चाहती थीं.. वो फट से बोलीं- तो रोका किसने है, जो मन करे वो करो.. अब तो मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ न..!मैंने भी सोच लिया कि आज कुछ भी हो, भाभी को चोद के ही रहूँगा.मैंने कहा- भाभी मैं कुछ कहूँ तो बुरा तो नहीं मानोगी न?वो बोली- नहीं.. बोलो!मैंने कहा- भाभी मैं आपको चोदना चाहता हूँ.वो बोलीं- अरे मेरे भोलू देवर जी, मैं तो बहुत दिन से इसी का इन्तजार कर रही थी… मगर यहाँ कैसे करोगे?मैं बोला- तो फिर चलिए… नीचे मेरे कमरे में चलिए.वो बोलीं- देवर जी, पहले तुम चले जाओ, फिर मैं आती हूँ.

उसके बाद मैं अपने कमरे में नीचे आ गया और भाभी भी थोड़ी देर बाद वहां आ गईं.

कमरे में आते ही मैंने अपनी भाभी को बांहों में भर लिया और उनके होंठों को कस कर काट लिया. अब भाभी भी पूरी रंग में थीं वो भी मुझे किस पर किस किए जा रही थीं. मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था, तो मैंने भाभी को पूरा नंगी किया.. उनके बदन के पूरे कपड़े उतार दिए.

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जब भाभी पूरी नंगी हुईं तो मैं उनका पूरा मदमस्त बदन देखने और सूंघने लगा. भाभी एक दम से चिहुँक उठीं और मेरे होंठों पर होंठ रख कर चूमने लगीं. मैं भी पूरे जोश में था.. मैं उनके मम्मों को दबाने लगा और अपने मुँह में भर कर उनके रसीले चूचों को पीने लगा. मैं भाभी के मम्मों को इस तरह से दबाने लगा कि वो अपने होश खो बैठीं.

भाभी के मुँह से अजीब आवाजें आने लगीं- चोद दो.. मुझे.. मेरी प्यास बुझा दो.. कितने दिन से मैं इस वक्त की प्रतीक्षा कर रही ओह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… अब रहा नहीं जाता.. मुझे चोद दो.. अपनी भाभी की चूत फाड़ दो.

वो सिसकने लगी थीं. फिर भाभी ने अपना हाथ मेरी चड्डी में डाल प्रिया.. तो मेरा लंड एक नाग की तरह फुंफकारता हुआ बाहर आ गया. इस वक्त मेरा लंड पूरा जवान हो कर 7 इंच का लम्बा और 2.5 इंच मोटा हो चुका था. उसे देख कर वो बहुत खुश हुईं.. वो उसे हाथ में लेकर सहलाने लगीं और फिर अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं.अब वो कहने लगीं- इतने बड़े लंड से मैं पहली बार चुदाई करवाने जा रही हूँ.

मैं भी भाभी की चूत चाटने लगा.. हम देवर भाभी 69 की पोजीशन में थे, हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था एक दूसरे के गुप्तांगों को चूसने चाटने में! पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज उठा था. इसी बीच भाभी एक बार झड़ चुकी थीं. मैंने भाभी की चूत को इतना चाटा कि वो मेरे लंड को काटने सा लगीं और जोर जोर से अपने चूतड़ उछाल उछाल कर फुदकने लगीं.

मैं भी जोश में था.. मैं क्या कर रहा हूँ इस की मुझे परवाह नहीं थी. भाभी ने मेरा लंड अपनी चूत पर रखवा प्रिया.. जोर जोर से मुझसे लिपटने लगीं और लंड को सहलाने लगीं.भाभी बोलीं- मेरे देवर जी, अब और न तरसाओडाल दो लंड मेरी चूत में.

मैंने भी देर न करते हुए भाभी की चूत में पहले ही धक्के में अपना लंड घुसाने की तैयारी की और साथ ही उनके मुँह में अपना मुँह लगा कर चूमने लगा. इधर भाभी लंड की नोक की गर्मी से मस्त हुई और उधर मैंने एक ही बार में पूरा लंड उनकी चुत में डालने लगा.

भाभी कराह कर बोलीं- थोड़ा सब्र करो देवर जी.. मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ, अब मैं तुम्हारी हूँ.. थोड़ा धीरे धीरे डालो, मुझे दर्द होता है.“भाभी तुम तो लंड से खेली खाई हो, तुम्हें दर्द कैसे?”भाभी बोलीं- ज्यादा दिन हो जाने के कारण मेरी चुत टाईट हो गई है.मैंने लंड का दबाव बढ़ाया तो वो दर्द से कहती रहीं- हाय मैं मर गई.. इतना बड़ा लंड… देवर जी, अपनी भाभी पर रहम करो… मैं तुम्हारी सगी भाभी हूँ, कोई पराई नहीं!

मैंने भाभी की बात सुनी पर मैंभाभी की चूत मेंबेरहमी से ठोकरें लगाता ही गया. कुछ देर बाद उन का दर्द कम होने लगा और मैं और तेज से धक्के देने लगा. हमारी सिसकारियों से कमरा पूरा गूँज उठा. मैं और जोर से भाभी की चूत में धक्के देता रहा, भाभी की चूत चुदाई करता रहा. कुछ देर के बाद वो झड़ गईं.

अब मैं भी झड़ने वाला था.. तब मैं और भी तेज होने लगा. भाभी ने कहा- मेरे प्यारे भोलू देवर, अपना माल मेरे अन्दर ही छोड़ दो.

थोड़ी देर बाद मैं भी भाभी की चूत में ही झड़ गया.. मैंने 5-6 पिचकारी भाभी की चूत में मार दीं. इससे भाभी की चूत मेरे वीर्य से भर गई. करीब दस मिनट तक हम वैसे ही लेटे रहे.

उस रात में मैंने और भाभी ने 2 बार चुदाई की.. सुबह 4 बजे हमने बाथरूम में जाकर सब कुछ साफ किया.

इसके बाद हम देवर भाभी को जब भी मौका मिलता है, मैं भाभी को बार बार चोदता रहा. भाभी को मुझ से चुदाई करवा के बहुत मजा आता था और उन्हें पूरी सन्तुष्टि मिलती है.

दोस्तो, आप लोगों को मेरी हिंदी सेक्स स्टोरी कैसी लगी, जरूर बताइएगा, मुझे आपके जवाब का इन्तजार रहेगा.मेरी मेल आई डी हैsupport@mohakkisse.com

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