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भाभी की चूत की गर्मी को मिली ठण्ड

दीपक मलिक

12 Feb 2016 को प्रकाशित

भाभी की चूत की गर्मी को मिली ठण्ड
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हेल्लो दोस्तो, मैं दीपक, सोनीपत जिले (हरियाणा) से आपके लिए फिर से एक कहानी लेकर हाजिर हूँ। उम्मीद करता हूँ आपको यह कहानी पसंद आयगी और आपके लण्ड और चूत में हलचल मचा देगी।

मेरी पिछली कहानी को आप लोगों ने बहुत सराहा, बहुत प्यार दिया उसके लिए आप सबका धन्यवाद।

पिछली कहानी में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने परी के घर जाकर उसकी चूत मारी और सेक्स करते हुए उसकी भाभी ने हमें देख लिया और मुझसे सेक्स करने की इच्छा जाहिर की।

उस दिन मैं परी से सेक्स करके और भाभी को किसी दिन मिलकर खुश करने का वादा करके वहाँ से निकल आया।

कुछ दिन यही सोचकर दिन निकल गए कि कब भाभी की चूत मारने को मिलेगी।

और फिर एक रात परी ने बताया कि भाभी मिलना चाहती हैं, घर पर कोई नही है, कल आ जाना चूत चुदाई करने।

अगला दिन जैसे तैसे मैंने काट लिया और रात को घर से बहाना बनाकर मैं निकल लिया परी के घर के लिए।घर जाकर पहले हम तीनों ने खाना खाया और बात करने लगे।

फिर भाभी बोली- बात ही करोगे या कुछ और भी?

इतना सुनते ही परी हम दोनों को अंदर कमरे में छोड़कर बाहर चली गई।फिर भाभी उठकर मेरी गोदी में बैठ गई और मेरे होंठों को चूसने लगी और मैं भी साथ देने लगा।

मेरे हाथ अपने आप भाभी की चूचियों का जायजा लेने लग गए। उनके चूचे 38″ के तो रहे होंगे जिसको दबाने में जो मजा आ रहा था, मैं ब्यान नहीं कर सकता।

चुम्बन करते हुए कभी वो मेरे होंठों को काट लेती थी और फिर प्यार से उस पर अपनी जीभ फेरने लगती। मतलब दर्द देकर प्यार करना उसको अच्छे से आता था।

होंठों को चूसने के बाद मैंने एक एक करके उसके सारे कपड़े निकाल दिए और गौर से उसको निहारने लगा।

क्या लग रही थी वो.. 38″ के चुच्चे.. पतली कमर और 38″ के ही भारी चूतड़, मस्त उभरी हुई गांड और प्यारी सी गुलाबी होंठों वाली चूत…जिसको देखकर लगता था कि आज तक इसकी अच्छे से चुदाई नही हुई, इसलिए मुझसे चुदवाने को तैयार हो गई।

उसके एक उरोज को मैं मुंह में लेकर चूसने लगा और एक को हाथ से दबाने लगा।उसका एक हाथ मेरे लण्ड को पैंट के ऊपर से ही दबा रहा था।

मैं कभी प्यार से एक स्तन को चूसता कभी दूसरे को काटता। उसके मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी थी और एक हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी थी वो!

मेरे चूसने और काटने से उसके चूचे एकदम लाल हो गए थे और जहां मैंने काटा था वहाँ नीले निशान बन गए थे।उसके पेट पर चूमता चाटता हुआ मैं नीचे आया तो देखा कि उसकी चूत से चिपचिपा सा पानी निकल रहा था, मतलब वो झड़ रही थी।

पानी देखते ही मेरे मुँह से लार टपकने लगी तो मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया और 69 की पोजीशन में आ गया।अब वो गपागप मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं जीभ से उसकी चूत को चोद रहा था, वो अपनी गांड उठा कर मेरी जीभ को अपनी चूत में अंदर तक ले रही थी।

जैसे ही मैं उसके चूत के दाने को छेड़ता, वो मेरे लण्ड को जोर से दबा देती।

बहुत देर तक उसके रसीले होंठों के अंदर रहकर मजे लेने के बाद मेरे लण्ड का लावा फ़ूट पड़ा और मैंने सारा वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया, उसने चाट कर मेरा लण्ड साफ़ कर दिया।

कुछ देर हम ऐसे ही एक दूजे की बाहों में पड़े रहे और अपनी जिन्दगी के हसीं पलों का मज़ा लेने लगे।

कुछ देर बाद मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा और चूत को होंठों से काटने लगा और वो मेरे लण्ड को चूसने लगी।

जैसे ही चूत के दाने को काटता, वो मेरा सर अपनी चूत पर दबा देती जैसे की अंदर ही डाल लेगी।अब वो मुझसे चूत में लण्ड पेलने की प्रार्थना करने लगी थी।

मैं उठकर उसकी टांगों के बीच में आया और उसकी चिकनी गीली चूत पर लण्ड रखकर जैसे ही हल्का सा धक्का लगाया तो लण्ड का आगे का सुपारा उसकी चूत में घुस गया और उसकी चीख निकल गई।

मैंने उससे चिल्लाने का कारण पूछा तो कहने लगी- तेरा लण्ड मेरे पति के लण्ड से मोटा है, तो आराम से डाल!

यह सुनकर मुझे मजा आ गया और उसके होंठों को अपने होंठों से बन्द करके मैंने एक और धक्का लगा दिया, पूरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी पर लगा और उसकी चीख मेरे मुँह में दब कर रह गई।

उसकी आँखों से आँसू निकल आये थे और उसने अपने नाख़ून मेरे कमर में गाड़ दिए।मुझे नाख़ून लगने से दर्द हुआ पर टाइट चूत में लण्ड डालने के मजे से ज्यादा नहीं था।

मैंने बिना रुके लण्ड आगे पीछे करना शुरु कर दिया था।उसको दर्द हो रहा था और वो लण्ड निकलने की मिन्नतें करने लगी पर मैं बेदर्दी से उसकी चूत बजाता रहा।

थोड़ी देर में उसका दर्द कम हुआ तो वो कमर उठा कर मेरा साथ देने लगी।

कुछ देर ऐसे ही करने के बाद उसने मेरा लण्ड अपनी चूत से निकाल दिया और अपनी चूत को शीशे में देखने लगी।उसकी चूत सूज गई थी।

वो बेड पर उल्टी होकर लेट गई और अपनी चूत को हाथ से दबाकर दर्द को कम करने लगी।

मैंने पीछे से जाकर एकदम से उसकी चूत में लण्ड डाल दिया और उसको घोड़ी पोजीशन में लेकर चोदने लगा और हाथों से उसके चूचों को मसलने लगा।

उसको दर्द हो रहा था पर अब मजा भी आने लगा था, उसके मुख से अब दर्द की कराहट के बदले प्यार की मीठी सिसकारियाँ निकलने लगी थी- आह्ह उह्ह्ह्ह जोर से चोदो.. आज आया असली चुदाई का मजा..

मैंने पीछे से चुदाई करते हुए एक उंगली उसकी गांड में डाल दी जिससे वो एकदम चिहुँक पड़ी और बोली- आज सिर्फ चूत को सुकून दो, गांड अगली बार फाड़ना।

मैं लण्ड को उसकी चूत में पूरा बाहर लेकर एकदम से अंदर डाल रहा था, जिससे उसको मजा आ रहा था।हमारे शरीर आपस में टकराने से फच्च फच्च फच्च…. की आवाज़ से कमर गूंज रहा था।

15-20 मिनट की ऐसे ही चुदम-चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था, मैंने उससे पूछा तो कहने लगी- अंदर ही झड़ जाना। मैं चुदाई का पूरा मजा लेना चाहती हूँ और तुम्हारे वीर्य को अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूँ।

थोड़े धक्के लगाने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और गर्म गर्म वीर्य उसके चूत में जाने से वो भी गांड उठा कर झड़ने लगी।

मैं अपना लण्ड निकाल कर उसकी साइड में लेट गया। लण्ड निकालते ही उसका और मेरा कामरस मिक्स होकर उसकी चूत से बाहर निकलने लगा।

थोड़ी देर बाद परी कमरे में अंदर आई तो हम दोनों को नंगा देखकर भाभी से पूछने लगी- कैसा लगा चुदाई करवा कर?भाभी कहने लगी- ऐसी चुदाई आज तक नहीं हुई, इतना मोटा लण्ड पहली बार मेरी चूत में गया है। चूत फट गई है मेरी!

परी कहने लगी- और चुदाई करवानी है या अब मैं चुदवा लूँ?

भाभी कहने लगी- इसने मेरी चूत के परखच्चे उड़ाकर रख दिए। अब मुझमें हिम्मत नहीं है इसका लण्ड और झेलने की… चीख निकलवा दी इसके लण्ड ने तो आज मेरी पर मजा आ गया चुदवाने में।

इतना सुनते ही परी मेरे लण्ड को चूसने लगी और उसको खड़ा करके उस पर बैठकर चुदने लगी।भाभी जाने की कहने लगी तो परी ने रोक लिया और कहा- हमारी चुदाई देखकर जाना जैसे बाहर से मैंने आपकी चूत फाडू चुदाई देखी है।

कुछ देर में मैंने परी को उठाकर मेज पर बिठा दिया और उसकी टांगों को कंधों पर रखकर उसकी चूत में एकदम से लण्ड पेल दिया।परी की आह्ह्ह निकल गई और उसके बाद 10 मिनट की चुदाई करने से हम दोनों एक साथ झड़ गए और तीनों नंगे वहीं पड़े रहे।

सुबह जाने से पहले मैंने भाभी को नहाते हुए एक बार और चोदा और नाश्ता करके वहाँ से निकलने लगा तो भाभी ने कुछ पैसे मुझे दिए।

यह मेरी जिंदगी की पहली कमाई थी जिनको लेकर मैं अपने घर आ गया।

उसके बाद मैंने भाभी को बहुत बार चोदा और आज वो मेरे बच्चे की माँ बन गई है।यह बात सिर्फ मुझे, भाभी और परी को पता है।

तो दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसे लगी। बताना जरूर, मुझे आप सबकी प्यार भरी मेल का इंतज़ार रहेगा।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

विराट सिंह

6 days ago

देवर भाभी की ये कहानी सच में कमाल की थी। लेखक ने बहुत बारीकी से लिखा है।

अमन आपका दोस्त

3 weeks ago

मजा आ गया भाई! भाभी को अच्छे से मनाया। अगला पार्ट भी जल्दी पब्लिश करना।

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