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भाभी की चुदाई पठन समय: 18 मिनट पढ़ा गया: 1,319 बार

पड़ोसन भाभी ने मेरी गर्लफ्रेंड बन कर चुत चुदवा ली

सन्नी हैदराबाद

15 Feb 2026 को प्रकाशित

पड़ोसन भाभी ने मेरी गर्लफ्रेंड बन कर चुत चुदवा ली
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फ्रेंड्स, मेरा नाम सन्नी है और अभी में हैदराबाद में रहता हूँ. मैं 25 साल 6 फुट लम्बा एक बहुत ही हैंडसम लौंडा हूँ, मेरा कलर एकदम फेयर है.

यह बात उन दिनों की है, जब मैं 2013 में नया-नया ही हैदराबाद आया था, ना कोई दोस्त था, ना कोई गर्लफ्रेंड थी. बहुत अकेला महसूस होता था. पूरा दिन जॉब और रात में स्टडी. बस ऐसे ही दिन कट रहे थे. क्या करूँ… मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. मेरे पास ना पैसे बचते थे, ना टाइम था कि कोई लड़की पटा सकूं. रोज़ रात को थकान दूर करने के लिए ब्लू-फिल्म देख कर मुठ मार के अपने लम्बे लंड को सुला कर सो जाता था.

पर वो कहते हैं ना कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं… बस वो ही हुआ.

मेरे घर के पास यूपी से एक नवविवाहित जोड़ा रहने आया. उनका नाम विकास और दिया था. बस मियां-बीवी दो ही बंदे थे. उनकी शादी एक साल पूर्व 2012 में हुई थी और व्यापार के सिलसिले में वो लोग हैदराबाद आए थे.जब मैं रात को घर आया तो उन लोगों से मिला और बातचीत की. मैंने पड़ोसी होने के नाते उनसे कहा- कोई भी ज़रूरत हो तो बेझिझक बोल देना.ये कह कर मैं जाने लगा तो विकास बोले- यार फर्स्ट टाइम घर आए हो… चाय तो पीकर जाओ.मैंने कहा- नहीं भाई… फिर कभी.

पर वो जोर देने लगा कि चाय तो पीकर ही जाना पड़ेगा.

तभी मैंने देखा कि दिया बाथरूम से शावर लेकर बाहर आई. मैं तो बस उसको देखता ही रह गया… क्या मस्त लड़की थी यार… हल्की सी सांवली… लंबी और बेहतरीन गठा हुआ फिगर… और उसमें भी वो इस वक्त शॉर्ट्स में थी.आह… क्या माल लग रही थी वो…

वो चल कर हमारे पास आने लगी और मैं तो बस उसे ही अपलक देखे जा रहा था. उसके गुलाबी होंठ, बड़ी आँखें, फूल सा बदन और 38-30-36 की मचलती फिगर.तभी उसने मुझे मीठी सी आवाज में हाई कहा… तब जाकर मेरा ध्यान टूटा.फिर तो मैं भी चाय पीने से मना नहीं कर पाया.

दिया चाय बनाने के लिए किचन में जाने लगी और मैं उसके शॉर्ट्स में कैद थिरकते चूतड़ों देखते ही रह गया. ऐसा लग रहा था जैसे कोई दो मक्खन की मटकियां किलोलें कर रही हों. मेरा दिल तो कर रहा था कि अभी लपक कर उसकी दोनों मटकियां फोड़ दूँ और उसके चुचे दबा कर पूरा दूध निकाल कर उसकी चुत से चाट लूँ. मेरी कामुक नजर उसके चूचों चुत और गांड तीनों पर मचलने लगी थी.

वो कहर बरपाती हुई किचन में चली गई और विकास मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछने लगा.मैंने उसे मना किया तो बोला- ऐसा हो ही नहीं सकता कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड ना हो.तो मैं बोला- भाई टाइम ही नहीं मिलता कि गर्लफ्रेंड पटा सकूँ.इस पर विकास बोला- भाई, तुम्हें पटाने की ज़रूरत ही क्या है… लड़की खुद पट जाएगी.

इतने में दिया चाय लेकर आ गई और मुस्कुराते हुए बोली- क्या बात हो रही है?विकास बोला- सन्नी भाई बोल रहे हैं कि इनकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, इन्हें टाइम नहीं है.उतने में दिया बोलने लगी- हो ही नहीं सकता…उसने हम दोनों को चाय दे दी.

मैं चाय पीते पीते बोला- भाभी जी गर्लफ्रेंड पटाने के लिए टाइम कहाँ से निकालूँ और अगर तुम्हारे जैसी कोई सामने से भी पट गई तो उसका खर्चा मैं उठा ही न पाऊं और ना ही टाइम दे पाऊं.ये सुन कर दिया जोर-जोर से हंसने लगी और बोली- अच्छा जनाब… सब कुछ फोकट का चाहिए और नज़र मेरे ऊपर?इस बात पर विकास भी हंसने लगा.

मैंने कहा- नहीं भाभी जी… आपके ऊपर नजर नहीं है… और फोकट में क्यों माँगा? उसको इतना हैंडसम लड़का भी तो मिलेगा ना.‘हाँ ये तो सच है…’दिया बोली- अच्छा जनाब, चलो मैं ही बन जाऊं क्या? इसी बहाने तुम मुझे भाभी तो नहीं बुलाओगे.इतना कह कर दिया हंसने लगी और हम दोनों भी हंसने लगे.

फिर मैंने इजाज़त ली और घर चला गया.

बस पूरी रात दिया की बातों को सोचता रहा और दो बार मुठ मारी, पर तब भी ये लंड शांत ही नहीं हो रहा था. दिया का बदन था भी तो बहुत सेक्सी.

एक महीना ऐसे ही निकल गया. विकास काम पर रहता और मैं रोज़ शाम ऑफिस से आते ही दिया के साथ गप्पें लड़ाने बैठ जाता. मेरी स्टडी का समय मैंने दिया को पटाने में लगा प्रिया. अब हमारी अच्छी दोस्ती हो गई.

धीरे-धीरे मैंने देखा कि दिया कुछ उदास सी रहने लगी थी, उसकी हँसी में भी उदासी आ गई थी.मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?पर वो बात को टाल गई और काम का बहाना करके चली गई. मैंने सोचा कोई घरेलू मामला होगा. मैंने भी इतना ध्यान नहीं प्रिया.

कुछ दिन बाद मुझे मेरे ऑफिस से मूवी टिकट मिले और डिनर कूपन भी थे. मैंने तुरंत विकास को कॉल किया कि मेरे पास कपल डिनर और मूवी टिकट हैं, तुम दोनों कल शाम को चले जाओ.उस पर उसने बड़ी बेरुखी से कहा- हुन्न देखते हैं, तुम घर पहुँचो… हम वहां बात करते हैं.

में घर पहुंचा तो दिया उदास सी कोने में बैठी थी. मैं उसके पास गया और बोला- क्या हुआ भाभी जान… देख रहा हूँ कुछ मुरझाई हुई सी लग रही हो.पर वो कुछ बोली नहीं और पानी लेने चली गई. इतने में विकास आ गया.मैंने उससे पूछा- कुछ प्राब्लम है क्या?वो बोला- यार ये बीवियां भी ना… हुआ कुछ नहीं है, बस घूमना है इन लोगों को और हमारे पास टाइम नहीं है. वो इसे नहीं दिखता, बस इनको तो अपने शौक पूरे करने है.

बस ये सुनते ही दिया पानी रख कर बेडरूम में चली गई और मैं पूरी बात समझ गया.मैं कूपन वहां छोड़ कर चला आया.

दूसरे दिन मैंने दिया से पूछा- कब जा रहे हो तुम लोग… आज या कल?वो बोली- कभी नहीं, उनके पास टाइम थोड़ी ना है?मैंने कहा- ह्म्म्म्म … चलो मैं लेकर जाता हूँ तुम्हें… वैसे भी मेरी छुट्टी है दो दिन तक… और मैं विकास को भी बता दूँगा.वो बोली- कैसे बताओगे? वो तो सुबह सुबह दिल्ली चले गए, उसको थोड़ी ना पता है कि उसकी एक बीवी भी है.मैंने कहा- चलो गुस्सा थूको और रेडी हो जाओ… आख़िर ये तुम्हारा मुँह बोला ब्वॉयफ्रेंड कब कम आएगा?तो वो हंसने लगी और बोली- कहाँ घुमाओगे?मैं बोला- तुम चलो तो…वो बोली- विकास?मैं बोला- मैं बात कर लेता हूँ ना…!वो बोली- नहीं उन्हें कुछ मत बताओ… वो झगड़ा करेंगे, वैसे भी वो कल शाम को आएँगे, चलो मैं आती हूँ, तुम तैयार हो जाओ.

हम लोग इनोक्स में गए और सिंघम की टिकट लेकर दिया को अन्दर भेजा और मैं पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक्स लेकर अन्दर गया. हम दोनों मूवी देख रहे थे और मैं उसे… आज वो बहुत खुश थी.फिल्म खत्म करके हम लोग खाना खाने निकल गए. आफ्टर डिनर में उसे आइसक्रीम खिलाने ले गया और कुल्फी खाते-खाते बात करने लगा.वो बोली- थैंक्स सन्नी… पूरे 6 महीने में मैंने हैदराबाद में कुछ नहीं देखा था. आज तुमने घुमाया… थैंक्यू सो मच.

मैं बोला- थैंक्यू से काम नहीं चलेगा… पहले ये बताओ कि हुआ क्या है, इतनी मुरझाई हुई सी क्यों रहती हो?वो बोली- सन्नी क्या बताऊं? विकास को बस काम दिखता है, मैं नहीं… वो इस बात को नहीं समझता है कि पैसों के सिवाए औरत की और भी ज़रूरत होती है.और वो अचानक से चुप हो गई.

मैं सब समझ गया… तभी वो रोने लगी. मैंने उसे हग किया और पूछा- कब से?वो बोली- लास्ट 6 महीने से.मैंने कहा- चलो छोड़ो वो बात… मैं हूँ ना!तो वो बोली- सन्नी मज़ाक नहीं!मैंने कहा- अरे बाबा मज़ाक नहीं सच्ची… जब से तुम्हें देखा था, तब से ही आई लाइक यू… बट तुम लोगों की नई शादी हुई थी, तो मैंने सोचा तुम खुश होगी इसलिए मैंने इज़हार नहीं किया.

वो बस मेरे सामने देखती ही रही और मैंने अपने होंठ उसकी गीली आँखों पर लगा दिए और उसके आँसू पी गया. मैं बोला- मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं देखना चाहता हूँ.वह मेरे सीने से लग कर रोने लगी.मैंने उसे चुप कराया और कसके अपने बाहुपाश में जकड़ लिया. वो भी खुद को समर्पित करते हुए मेरे सीने में गड़ गई.

फिर मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ा और उसे समझाने लगा. अपने होंठ उसके होंठ पर रख कर एक किस किया तो उसने इतनी गहरी साँस ली कि मैं उसके होंठ को चूसता ही रहा.थोड़ी देर के बाद सब शांत हो गया और वो बोली- चलो यहाँ ये सब नहीं… बहुत देर हो चुकी है, घर चल के ‘बात’ करते हैं.मैं ‘बात’ का मतलब समझते हुए उसे लेकर घर चला आया.

घर पर आते ही वो बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर चेंज करके आ गई. मैं उसका इंतज़ार ही कर रहा था. वो जैसे ही बाहर आई, मैंने उसे पकड़ लिया और किस करने लगा. उसके होंठों को चूसने लगा. वो भी मेरे साथ मजा लेने लगी. मैंने उसे बिस्तर पर लेटा प्रिया और जोर-जोर से उसके होंठ चूसने लगा. वो मुझे कसके अपनी बांहों जकड़ने लगी. उसने साँस लेने को अपना मुँह खोला तो मैंने उसकी जीभ को चूसना स्टार्ट कर प्रिया.

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वो भी गर्म हो चली थी और मेरे होंठों को काटने लगी. यहाँ मैं उसके बड़े-बड़े मम्मों को कपड़े के ऊपर से ही दबाने लगा. अब दिया तड़पने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझको पूरा उसके अन्दर समा लेना चाहती थी. मेरा लंड फटता जा रहा था और तभी दिया ने मेरे लंड को जोर से दबा प्रिया.

ये मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने अपना लंड उसकी चुत पर जोर से दबा प्रिया. साथ ही उसके चूची की एक घुंडी पर जोर से चुटकी काट ली.

वो मीठी ‘आहह…’ से भर उठी. तभी मैंने उसके होंठ को काट लिया और उसने चिल्लाते और मुझे दूर धक्का दे प्रिया. मैंने उसे देखा तो वो शरारत से मुझे देख रही थी और अपने होंठ काट के एक हाथ से अपनी चुत और दूसरे से अपने चूचियों को दबा रही थी.

मैं फिर से पास हुआ तो अपने पाँव से मुझे रोक कर अपने कपड़े उतारने लगी. ये देख कर मैं भी अपने कपड़े उतारने लगा. हम दोनों लगभग एक साथ नंगे हो गए. वो मेरे खड़े लंड को देखने लगी और मैं उसके पूरे बदन को निहारने लगा, भूखे शेर की तरह उसके ऊपर टूट पड़ा और सीधा उसके एक चूचे को अपने मुँह में लेकर काटने लगा और दूसरे चूचे के निप्पल को जोर-जोर से उमेठते हुए मसलने लगा.

इसके जवाब में उसने मेरा लंड पकड़ कर मसलना चालू कर प्रिया और मेरा सिर पकड़ कर अपने चूचे पे दबाने लगी

मैं बारी-बारी से मम्मों को चाटने और चूसने लगा… साथ ही दूसरे हाथ से उसकी चुत में उंगली भी करने लगा. इसके जवाब में उसने मुझे काटना स्टार्ट कर प्रिया.

अब हम दोनों से रहा नहीं जा रहा था. उसने मुझे फिर से धक्का दे प्रिया और मेरे ऊपर चढ़ गई. मैं उसके मम्मों को पकड़ कर मसलने लगा. उसने मेरे लंड को चुत पर टिकाया और बैठने लगी और एक ही झटके में उसने लंड को अपनी चुत के अन्दर ले लिया. उसकी चुत इतनी टाइट थी कि लंड घुसते ही उसकी चीख निकल गई.

मैंने उसके मम्मों पर काट लिया… वो मेरे ऊपर यूं ही पड़ी रही. ऐसे ही अपनी ज़ुल्फों को मेरे ऊपर लहराने लगी. मुझे लगा शायद वो झड़ चुकी… तो मैंने उसे हग कर लिया और उसकी गर्दन, कंधे और कान को काटना और चाटना स्टार्ट कर प्रिया ताकि ये फिर से गर्मा जाए.

मैंने नीचे से धीरे-धीरे उसकी चुदाई स्टार्ट की और एक हाथ से उसकी बड़ी गांड में चमाट मारना चालू किया. मैंने दूसरे हाथ से उसकी मक्खन गांड के छेद को सहलाना और उंगली करना स्टार्ट कर प्रिया. वो गर्म होने लगी और अपनी कमर हिलाने लगी… और मैं उसे चाट चाट कर चोद रहा था. मेरी स्पीड बढ़ रही थी और वो भी अब ऊपर उठ कर एक हाथ मेरे कंधे पर और दूसरा अपने चूचे पर रख करलंड की सवारीका मजा लेते हुए चुद रही थी.

मैं एक हाथ उसकी गांड पर और एक उसके चूचे पर रख कर नीचे से लंड की ठोकर दे रहा था.

हम दोनों पागल से हो गए थे. एक-दूसरे में इतने खो गए थे कि हमें और कुछ पता ही नहीं था. वो गांड उछाल-उछाल कर मेरा लंड अपनी चुत में जड़ तक ले रही थी. जैसे ही वो ऊपर होती कि मैं अपना लंड ऊपर करके अन्दर डाल देता. हम जानवरों की तरह चुदाई किए जा रहे थे.

तभी वो चिल्लाने लगी- बस सन्नी… अह… अब और नहीं… निकाल दो मेरे अन्दर… मैं पूरी टूट चुकी हूँ… आह… मेरा निकल जाएगा आआह… अब मुझसे नहीं होगा.वो लंड अन्दर लिए बगैर ही चुत जोर-जोर से रगड़ने लगी, तो मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे अपने नीचे लेटा लिया और उसके ऊपर आ गया. फिर एक झटके से अपना लंड उसकी चुत में घुसा प्रिया. वो ‘आआहह…’ निकालते हुए अब नहीं रहा जा रहा है… आआआअ…

मैं उसकी गर्दन चाटने लगा, मम्मों को दबाने लगा और पूरा लंड बाहर निकाल कर चुत में पूरा अन्दर घुसेड़ने लगा. वो तो मानो पागल हो गई थी, उसने अपने पांवों से मेरी कमर को जकड़ लिया और अपने हाथ मेरी पीठ पर कस लिए. साथ ही उत्तेजना में उसने मेरे कंधे पर काट लिया… जिससे मेरी चीख निकल गई.

मैं अपना पूरा लंड जोर से उसकी चुत में पेल प्रिया और इसके जवाब में उसने अपने नाख़ून मेरी पीठ पर गड़ा दिए. मैंने भी जितना अन्दर जा सकता था, उतना लंड चुत में अन्दर तक गड़ाने लगा.बस वो आहें भरती रही- अहह बसस्स… उम्म्म्म… उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह…

तभी मेरा माल उसकी चुत में निकल गया और मुझे गर्म-गर्म सा लगने लगा. मेरे नीचे मेरी दिया हांफे जा रही थी.इस लम्बे सेक्स के बाद हम दोनों बस ऐसे ही लेटे रहे और कब नींद लग गई, पता ही नहीं चला.

जब मेरी आँख खुली तो मैं दिया के ऊपर ऐसे ही पड़ा था और मेरा लंड उसकी चुत पर रखा हुआ था. वो प्यार से मुझे देख रही थी और मेरे बालों में हाथ फेर रही थी.

मैंने बस प्यार से उसके होंठों पे एक किस किया… और उसके नीचे उतर कर उसे बाहों में भर लिया. वो मेरे सीने में सिर रख कर बोली- थैंक्यू सन्नी, इतना मज़ा… इतना प्यार… मुझे कभी नहीं मिला… मैं इसे कभी नहीं भूलूंगी. ऐसा लगता है कि मेरी पूरे जन्म की प्यास बुझ गई.

मैंने उसे उसके माथे पर किस किया और हाथ से उसके बालों से खेलने लगा. उसने मेरे होंठों पर किस किया तो मैंने देखा उसकी आँखें नम थीं.मैंने पूछा- अब क्यों रो रही हो?वो बोली- जनाब, ये खुशी के आँसू हैं.

उस रात में एक बार झड़ा था, पर वो 3 बार झड़ चुकी थी. हम लोग ने चाय पी… फ्रेश हुए और मैं बाहर निकल कर उसके लिए आई-पिल लेकर घर आया.

वो घर पर नहीं थी तो मैं अपने काम के लिए निकल गया. शाम को जब घर आया तो वो मेरा वेट कर रही थी. उसने एक गिफ्ट बॉक्स मेरे हाथ में थमा प्रिया और बोली- मना मत करना.

मैंने देखा उसके हाथ में बैग था, तो मैंने पूछा- कहाँ जाना है?बोली- विकास का कॉल आया था कि उसके अंकल की डैथ हो गई है तो मुझे जाना पड़ेगा… उसने मेरी टिकट करा दी है… रात की ट्रेन है. मैं बस तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी.

ये सुनकर मैंने उसे हग किया और पिल उसको दी. उसने पिल खा ली. फिर मैं उसे स्टेशन छोड़ने चला गया. रास्ते में हम लोग ने डिनर किया और साथ में बहुत ही अच्छा टाइम स्पेंड किया.शॉपिंग माल से उसको एक बार्बी ड्रेस भी लेकर दी… आख़िर उसने गिफ्ट दी थी तो मुझे भी कुछ देना पड़ेगा ना.

फिर ट्रेन में बिठाकर मैं घर आया और उसका बॉक्स खोला तो उसके अन्दर एक चिट्टी भी थी और उसमें लिखा था- शायद विकास अपने अंकल का बिजनेस संभाल लेगा इसलिए अब मैं कभी यहाँ वापिस नहीं आऊंगी… पर तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे और ये गिफ्ट हमेशा अपने पास रखना.

जब मैंने गिफ्ट खोला तो बहुत ही मस्त उसमें एक स्मार्टफोन था.मेरी सेक्सी कहानी कैसी लगी?support@mohakkisse.com

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