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भाभी की चुदाई पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 776 बार

दीवाना देवर और सेक्सी भाभी की चुदाई- ऑडियो सेक्स स्टोरी

लक्ष्मी बाई

25 May 2025 को प्रकाशित

दीवाना देवर और सेक्सी भाभी की चुदाई- ऑडियो सेक्स स्टोरी
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मीटर गेज की ट्रेन थी, इसमें एयर कण्डीशन कम्पार्टमेन्ट में सिर्फ़ टू-टियर ही लगता था। कम्पार्टमेन्ट में चार बर्थ थी। सामने एक लगभग 45 वर्ष का व्यक्ति था और उसके साथ में एक जवान युवती थी, करीब 22-23 साल की होगी, साड़ी पहने थी। बातचीत में पता चला कि वो दोनों ससुर और बहू थे।

दिन का सफ़र था, मैं और मेरा देवर सामने के दो बर्थ में थे। बैठे बैठे मैं थक गई थी, सो मैं नीचे के बर्थ पर लेट गई। सामने भी वो युवती बार बार हमें देख रही थी, फिर उस व्यक्ति को देख रही थी। मेरी आंखे बंद थी पर कभी कभी मैं उन्हे देख लेती थी। मेरा देवर आंखे बंद किये ऊँघ रहा था।

अचानक मुझे लगा कि सामने वो आदमी युवती के पीछे हाथ डाल कर कुछ कर रहा है। मुझे शीघ्र ही पता चल गया कि वो उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे मल रहा था। वो बार बार उसे देख रही थी और उस पर झुकी जा रही थी, जाहिर था कि युवती को मजा आ रहा था।

मैंने अपनी आँखें कुछ इस तरह से बंद कर रखी थी कि सोई हुई प्रतीत हो। कुछ ही देर में उस आदमी ने उसकी चूची दबा दी। उस युवती ने अपना हाथ उसके लण्ड पर रख प्रिया और बड़ी आसक्ति से उसे देखने लगी।

मेरे मन में भी तरंगें उठने लगी, मेरे तन में भी एक हल्की अग्नि जल उठी। मैंने चुपके से देवर को इशारा किया। देवर ने नींद में ही सामने देखा और स्थिति भांप ली। थोड़ी ही देर में देवर भी गरम हो उठा। उसका लण्ड भी उठने लगा। उसने भी अपना हाथ धीरे से मेरी चूंचियों की तरफ़ बढ़ा प्रिया। मेरी बाहों के ऊपर से उसका हाथ रेंगता हुआ मेरे स्तन पर आ टिका, जिसे उस व्यक्ति ने आराम से देख लिया।

हमें भी इस हालत में देख कर वो कुछ खुल गया और उसने उस युवती की साड़ी के अन्दर हाथ घुसा प्रिया। लड़की उस आदमी पर लगभग गिरी सी जा रही थी, और उसे बड़ी ही आसक्ति से देख रही थी मानो चुदना चाह रही हो।

मेरे देवर ने भी मेरी चूचियों पर खुले आम हाथ फ़ेरना शुरू कर प्रिया। वो व्यक्ति अब मुस्करा उठा और उसने भी खुले आम उस लड़की के ब्लाऊज में हाथ डाल प्रिया और उसकी चूचियाँ दबाने और मसलने लगा। यह देख कर मेरे देवर ने मेरे ब्लाऊज में हाथ घुसा कर मेरी नंगी चूचियाँ पकड़ ली।

अब मैं उठ कर बैठ गई और उस व्यक्ति के सामने ही देवर का लण्ड पैन्ट की जिप खोल कर पकड़ लिया।

उस व्यक्ति ने देखा कि सभी अपने काम में लग गये हैं तो उसने लड़की को लिटा प्रिया और उसके ऊपर चढ़ गया, अपना लण्ड निकाल कर उसकी साड़ी ऊँची करके उसकी चूत पर लगा प्रिया। देवर भी मुझे लिटाने का प्रयास करने लगा। मैंने उसे इशारे से मना कर प्रिया। उधर उस लड़की की आह निकल पड़ी और वो चुदने लगी थी। पर वो मर्द जल्दी ही झड़ गया।

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https://soundcloud.com/user-842636301/deewana-devar-sexy-bhabhi-ki-chudai-audio-sex-story

देवर ने उसे इशारा किया तो उसने उसे सहमति दे दी। देवर ने उस लड़की की टांगें ऊँची की और अपना कड़क लण्ड निकाल कर उसकी चूत में घुसा प्रिया।

मैं बड़ी उत्सुकता से देवर को चोदते हुए देख रही थी। सिसकियों का दौर जारी था। कुछ ही देर में वो दोनों झड़ गये। चुदने के बाद हम सभी आराम से बैठ गये। वो लड़की मेरे देवर को बहुत ही प्यार भरी नजरों से देख रही थी। देवर से रहा नहीं गया तो वो उठा और उसे चूम लिया और उसके स्तन एक बार दबा दिये।

शाम ढल आई थी, ट्रेन स्टेशन पर आ चुकी थी। आगरा फ़ोर्ट आ चुका था। मेरा देवर बोगी के दरवाजे पर खड़ा था। गाड़ी के रुकते ही हम अपने थोड़े से सामान के साथ उतर पड़े। देवर ने सामान अपने साथ ले लिया और हम स्टेशन के बाहर आ गये। एक टेम्पो लेकर पास ही एक होटल में आ गये। रास्ते भर वासना का खेल देखते हुए और मेरे अंगो से छेड़छाड़ करते हुए आगरा पहुँचे थे। इतनी छेड़छाड़ से मैं उत्तेजित भी हो गई थी। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि बस अब कोई मेरे उभारों के साथ खूब खेले और मुझे मस्त कर दे।

होटल के बिस्तर पर आते ही मैंने अपनी साड़ी खोल कर एक तरफ़ फ़ेंक दी और मात्र पेटीकोट और ब्लाऊज में लेट गई।

मेरा देवर मुझे बड़ी उत्सुकतापूर्वक निहार रहा था। मेरी छातियाँ वासना से फूल और पिचक रही थी। छातियों का उभरना और सिमटना देवरजी को बड़ा ही भला लग रहा था। वो मेरे पास ही बैठ कर मेरे सीने को एकटक निहारने लगा।

मेरी आंख अचानक ही खुल गई। देवर को यूँ घूरते देख कर मैं एक बार फिर से वासना में भर गई। मैं झट से उठ कर बैठ गई। पर इस बात से अनजान कि मेरे ब्लाऊज के दो बटन खुल चुके थे और मेरी गोल गोल उभार ब्रा के साथ बाहर झांकने लगे थे। देवर का हाथ मेरे उभारों की तरफ़ बढ़ने लगे। जैसे ही उसके हाथ मेरे ब्लाऊज पर गये, मैंने उसके हाथ पकड़ लिये- देवर जी… हाथ दूर रखिये… क्या इरादा है?’ मैंने तिरछी नजरो से उसे निहारते हुए कहा।

देवर एकदम से हड़बड़ा गया- भाभी, मैं तो ये बटन बंद कर रहा था!’ पर उसका लण्ड तो खड़ा हो चुका था, इसलिये मैं तो यही समझी थी कि वो मेरे छातियाँ मसलना चाहता है। फिर मर्द नाम का तो वही था मेरे सामने, और उस ट्रेन में लड़की को चोद ही चुका था। मैंने तिरछी निगाहों से उसे देखा और उठ खड़ी हुई और बोली- तो लगा दे बटन…!’

देवर ने मेरे इशारे को समझ लिया और मेरे ब्लाऊज का बटन लेकर मेरे स्तन दबाते हुए लगाने लगा।‘भाभी ब्लाऊज तो टाईट है…!’

‘तो दबा कर लगा दे ना!’ मैंने अपने उभारो को थोड़ा और उभार प्रिया। देवर से रहा नहीं गया और उसके दोनों हाथों ने मेरे स्तनों को घेर लिया और अपने हाथों में कस लिया।

‘हाय रे देवर जी… इन्हें तो छोड़ो ना… ये ब्लाऊज थोड़े ही है…!’ मैंने उसे हल्का सा धक्का दे प्रिया और हंसती हुई बाथ रूम में चली गई। देवर मुझे प्यासी नजरों से देखता रह गया। मैंने अच्छी तरह नहाया धोया और फ़्रेश हो कर बाहर आ गई। कुछ ही देर में देवर भी फ़्रेश हो गये थे। उसके हाथ अभी भी मेरे अंगों को मसलने के लिये बैचेन हो रहे थे। उसके हाथ कभी मेरे चूतड़ों पर पड़ते थे और कभी किसी ना किसी बहाने छाती से टकरा जाते थे।

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हम दोनों तैयार हो कर नीचे खाना खाने आ गये थे। रात के नौ बज रहे थे, हम बाहर होटल के बाग में टहलने लगे। मेरा मन तो देवर पर लगा था । मन ही मन देवर से चुदने की योजना बना रही थी। मेरे तन बदन में जैसे आग सी लगी थी। तन की अग्नि को मिटाना जरूरी था।

मैंने देवर के चूतड़ों पर हाथ मार कर देखा तो पता चला कि उसने अंडरवियर नहीं पहनी थी। उसके नंगे से चूतड़ों का मुझे अहसास हो गया था।

मैंने भी पजामे के नीचे पेंटी और कुर्ते के अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी। बाग में घूमते घूमते मैंने कहा- देवर जी, मैं एक चीज़ बताऊँ…!

‘हाँ बताओ…’ उसने उत्सुकता से पूछा।‘पहले आँखें बंद करो… फिर एक जादू बताती हूँ…’ मैंने शरारत से कहा। मेरी वासना उबल रही थी।

उसने आंखें बंद कर ली। मैंने अपना हाथ धीरे से उसके उठते हुए लण्ड पर रख प्रिया- देवर जी आंखें बंद ही रखना… प्लीज मत खोलना…!’ धीरे से मैंने उसके लण्ड पर कसाव बढ़ा प्रिया.‘आह… भाभी…!’ उसके मुख से आह निकल पड़ी।‘देखो आंखें नहीं खोलना… तुम्हे मेरी कसम…!’ और लण्ड को हौले से उपर नीचे करने लगी।‘सी सीऽऽऽऽऽऽ… आह रे…’ उसकी सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी।‘तुम्हें मेरी कसम है… आंख बंद ही रखना…!’ मैंने सावधानी से बाग में इधर उधर देखा, और पजामे में हाथ घुसा कर उसका नंगा लण्ड थाम लिया। बस मसला ही था कि कुछ आहट हुई, मैंने तुरन्त ही हाथ बाहर खींच लिया। देवर की आंखें खुल गई- भाभी, मैं कोई सपना देख रहा था क्या?’‘चुप भी रहो… बड़ा आया सपने देखने वाला… अब चलो कमरे में…’ मैंने उसे झिड़कते हुए कहा ।

हम दोनों वापस कमरे में आ गये। डबल बेड वाला कमरा था। देवर बड़ी आस लगाये मुझे देख रहा था। पर मैंने अपने बिस्तर पर लोट लगा दी और आंखें बंद करके लेट गई। देवर ने बत्ती बुझा दी। मैं इन्तज़ार करती रही कि इतना कुछ हो गया है, देवर जी चोदे बिना नहीं छोड़ेंगे। पर बस मैं तो इन्तज़ार ही करती रह गई। उसने कुछ नहीं किया। अंधेरे में मैंने उसे देखने का प्रयास किया, पर वो तो चित्त लेटा आंखें बंद किए हुए था।

मुझे कुलबुलाहट होने लगी, चूत में आग लगी हुई थी और ये लण्ड लिये हुए सो रहा था। अब मैंने सोच लिया था कि चुदना तो है ही। मैंने धीरे से अपने पूरे कपड़े उतार लिये। फिर देवर के पजामे का नाड़ा धीरे से खींच कर ढीला कर प्रिया और पजामा नीचे खींच प्रिया। उसका लण्ड सीधा तना हुआ खड़ा था। यानि उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार था।

मैं धीरे से उठी और देवर के ऊपर चढ़ कर बैठ गई। उसके लण्ड को सीधे ही अपनी चूत से लगा प्रिया और धीरे से जोर लगा प्रिया। उसका लण्ड फ़क से अन्दर घुस गया। देवर या तो पहले से ही जगा हुआ था या आधी नींद में था… झटके से उसकी आंख खुल गई। पर देर हो चुकी थी। मैंने उसके जिस्म पर कब्जा कर लिया था और उसके ऊपर लेट कर उसे जकड़ लिया था।

मेरी चूत जोर लगा कर उसके लण्ड को लील चुकी थी।‘अरे…रे… भाभी… ये क्या… हाय रे… ‘ उसके लण्ड में मीठी मीठी गुदगुदी हुई होगी। उसके हाथ मेरी कमर पर कसते चले गये।‘देवर जी, नींद बहुत आ रही है क्या…? फिर तेरी भाभी का क्या होगा…?’‘मैं तो समझा था कि आप मुझसे सेक्सी मजाक कर रही हैं…!’‘हाय… देवर जी… लण्ड और चूत में कैसी दोस्ती… लण्ड तो चूत को मारेगा ही…!’‘भाभी, आप बड़ी प्यारी है… मेरा कितना ध्यान रखती है… आह रे… लण्ड के ऊपर बैठ जाओ ना…!’

देवर ने बत्ती जला दी। मैं अपनी पोजीशन बदल कर खड़े लण्ड पर सीधे बैठ गई। लण्ड चूत में जड़ तक उतर गया और पैंदे से टकरा गया। हल्का सा दर्द हुआ। उसके हाथ आगे बढ़े और मेरी चूंचियों को अपने कब्जे कर लिया और उन्हें मसलने लगा। मेरा जिस्म एक बार फिर से मीठी आग में जल उठा। मैं धीरे से उस पर लेट गई और हौले हौले चूत ऊपर नीचे करके लण्ड को अन्दर बाहर करके स्वर्गीय आनन्द लेने लगी।

उसके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और सिसकारी भर भर कर हिलते हुए चुदने लगी। देवर भी वासना भरी आहें भरने लगा। पर देवर ने जल्दी ही मुझे कस कर लपेट लिया और और एक कुलांची भर कर ऊपर आ गया। मुझे उसने दबा लिया।

पर अब उसके लण्ड का निशाना मेरी गाण्ड थी। इशारा पाते ही मैंने अपनी गाण्ड थोड़ी सी ऊँची कर ली । बस फिर तो राही को रास्ता मिल गया और मेरे चूतड़ों के पट खोलते हुए छेद पर आ टिका, उसने मेरी आंखों में आंखें डाल दी और आंखों ही आंखों में मुझे चोदने लगा। मैं उसके आंखों के वार सहती रही… मेरी आंखें चुदती रही… और मेरे मुख से आह निकल पड़ी।

उसका प्यारा सा लण्ड मेरी गाण्ड में उतर गया। प्यार से वो मुझे आंखों से चोदता रहा… उसकी ये प्यारी स्टाईल मुझे अन्दर तक मार गई। मेरी आंखों में एकटक देखने से पानी आ गया और मैंने अपने चक्षु धीरे से बन्द कर लिये। मेरी गाण्ड लण्ड को पूरा निगल चुकी थी। गाण्ड की दीवार में तेज गुदगुदी चल रही थी। उसके धक्के तेज हो गये थे… लग रहा था कि उसका माल निकलने वाला है।

मैंने उसे इशारा किया और उसके पलक झपकते ही लण्ड गाण्ड में से निकाल कर चूत में फिर से पेल प्रिया। मेरा अन्तरंग आनन्द से नहा गया। चूत की चुदाई स्वर्ग जैसी आनन्ददायी लग रही थी। मेरी चूत उछल उछल कर उसका साथ देने लगी। मेरे जिस्म में तंरगें उठने लगी… सारा शरीर सनसनाहट से भर उठा। सारा शरीर आनन्द से भर उठा। आंखे बंद होने लगी। देवर का लण्ड भी मोटा प्रतीत होने लगा। दोनों ओर से भरपूर कसावट के साथ चुदाई होने लगी।

लण्ड मेरी चूत में तरावट भर रहा था। मेरी चूत अब धीरे धीरे रस छोड़ने लगी थी. अचानक उसका लण्ड अत्यन्त कठोर होकर मेरी चूत के पेंदे में गड़ने लगा और फिर एक गरम गरम सा अहसास होने लगा। उसका वीर्य मेरी चूत में भरने लगा। तभी मेरी चूत ने भी अंगड़ाई ली और उसके वीर्य में अपना रस भी उगल प्रिया। दोनों रस एक हो गये और चूत में से रिसने लगे।

देवर ने मुझे कस कर दबोच रखा था और चूतड़ को दबा दबा कर अपना वीर्य निकाल रहा था। मैं भी चूत को ऊपर उठा कर अपना पानी निकाल रही थी। देवर ने पूरा वीर्य चूत में खाली कर प्रिया और उछल कर खड़ा हो गया। मैंने भी सन्तुष्ट मन से करवट बदली और गहरी नीन्द में सो गई। सुबह देर से उठी तब तक देवर उठ चुका था। मुझे जगा हुआ देख कर उसने मेरी टांगें ऊपर की और मेरी चूत को खोल कर एक गहरा चुम्बन लिया।

‘घर में भाभी का होना कितना जरूरी है यह मुझे आज पता चला…! है ना…?’ देवर ने प्यार से देखा।

‘हाँ सच है…पर देवर ना हो तो भाभी किससे चुदेगी फिर… बोलो…?’ हम दोनों ही हंस पड़े और बाहर जाने की तैयारी करने लगे…

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Dosto kaise ho kya chal rha hai . sabhi maje le rahe hai na . to my dear frnd aaj mai bhi aap ko ek bahut he sexy kahni sunne jar ha hu. Kahani aap ko jaisi lage vaisa he rply dalna plz < support@mohakkisse.com

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Hi, mera naam maddy hai aur mai mumbai ka rehne wala hu, ye kahani ek sachi ghtna par adharit hai, jaha maine mere samne wali bhabhi tejaswini ko jamkar choda wo bhi uski saas ke samne..

11 मिनट 917

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