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Behan Ki Chudai पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 977 बार

बड़ी बहन के साथ छुप-छुप कर बदन की आग बुझाई-9(Badi behan ke sath chhup chhup kar badan ki aag bujhayi-9)

sayko@07

05 Jul 2021 को प्रकाशित

बड़ी बहन के साथ छुप-छुप कर बदन की आग बुझाई-9(Badi behan ke sath chhup chhup kar badan ki aag bujhayi-9)
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भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-

छोटे से रेस्टोरेंट के उस तंग बाथरूम में हम दोनों अकेले खड़े थे। मैं उसके बिलकुल सामने था। उसने धीरे-धीरे अपनी पायज़ामा उतारा और उसे पास वाले बेसिन पर रख प्रिया। अब वह सिर्फ अपनी कुर्ती में थी—ऊपर ढकी हुई, लेकिन उसकी टांगें पूरी तरह नंगी, सफ़ेद टाइलों की ठंडक को महसूस करती हुई।

वह हल्का सा झुक कर मेरे और करीब आई, उसकी साँस मेरी छाती से टकरा रही थी। उसकी आँखों में वही शरारती चमक, वही गर्म सिहरन दौड़ रही थी। फिर उसने धीमी, काँपती आवाज़ में पूछा, “गोलू… क्या मैं अपनी कुर्ती भी उतार दूँ?”

मैंने उसकी बात सुन कर गर्दन झुकाई, दिल धड़कता हुआ। उस तंग बाथरूम की दीवारों के बीच उसकी आवाज़ और भी गहरी, और भी गूंजती हुई लग रही थी।मैंने हकलाई हुई आवाज़ में कहा, “स…स्पूजा दीदी… यहाँ?”

उसने मेरे होंठों पर अपनी उँगली रख दी। वही नरम उँगली, जो हमेशा मेरे अंदर एक अजीब गर्मी जगा देती थी।

“श्श्… दुनिया की फ़िक्र मत करो,” उसने फुसफुसा कर कहा। “अभी बस मुझे देखो… और ये महसूस करो कि तुम्हारी दीदी तुम्हें कितना चाहती है।”

फिर उसने धीरे-धीरे, बेहद धीरे, अपनी कुर्ती के नीचे वाली पकड़ ढीली की… और उसे ऊपर उठाना शुरू किया।

उसने कुर्ती को पूरी तरह ऊपर खींचा… धीरे-धीरे… जैसे हर इंच तुम्हें पागल करने के लिए ही बना हो। कपड़ा सिर के ऊपर से निकल कर उसके हाथों में आ गया। उसने वहीं कुर्ती भी पायज़ामा के ऊपर, बेसिन के पास रख दी।

अब वह मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थी, उस छोटे से बाथरूम की पीली रोशनी में उसका शरीर और भी चमक रहा था। उसकी ब्रा हल्के गुलाबी रंग की थी, कपड़े के पीछे उभरी उसकी गर्म, नरम साँसों की हर हलचल साफ दिख रही थी। नीचे उसकी पैंटी पतली और टाइट, उसकी कूल्हों की सुमन को और गोल, और भरा पूरा बनाती हुई।

वह मेरी तरफ आधा कदम और बढ़ी, इतनी करीब कि उसकी गर्मी मेरे पेट से छूने लगी। उसने धीमी मुस्कान के साथ पूछा, “अब बता गोलू… कैसी लग रही हूँ ऐसे?”

उसके बाल कंधों पर खुले गिर रहे थे, उसकी गर्दन पर हल्की सी पसीने की चमक थी, और उसका शरीर ऐसा कि मैं पलक भी झपकने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। मैंने उसकी ओर हाथ बढ़ाया, उसकी कमर के पास, बिल्कुल पैंटी की पतली सुमन के ऊपर। मेरी उँगलियाँ जैसे ही उसकी त्वचा से छूटीं, वह हल्के से काँपी, मगर पीछे नहीं हटी—बल्कि और पास आ गई।

उसकी साँस मेरी गर्दन के पास गर्म होकर टकराई। उसने अपनी उँगलियों से मेरी शर्ट का कॉलर पकड़ा और धीमे-धीमे उसे नीचे खींचने लगी, जैसे हर सेकंड को महसूस करना चाहती हो।

“इतना पास आने से डर नहीं लगता?” मैंने फुसफुसाया।

वह हँसी, धीमी, दबाई हुई, और पूरी तरह उकसाने वाली। “यहाँ डरने का वक्त नहीं है… सिर्फ महसूस करने का।”

मेरी शर्ट के ऊपरी बटन खुल चुके थे। उसके हाथ मेरी छाती पर रुके, उँगलियों से हल्के हल्के घूमते हुए, जैसे मेरी धड़कन को सुन रही हो।

वह और पास आकर अपने होंठ मेरे कान तक लाई और बमुश्किल सुनाई देने वाली आवाज़ में बोली, “अगर वापस जाना चाहो तो अभी भी वक्त है… लेकिन अगर एक कदम और बढ़ा प्रिया, तो मैं रुकने वाली नहीं हूँ।”

उसकी गर्म साँस, उसकी उँगलियों का छूना, और उस तंग बाथरूम में फैली उसकी खुशबू—सब ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे करीब खींचा, और वह बिना विरोध के पूरी तरह मेरे सीने से टिक गई।

उसने आँखें बंद करते हुए कहा, “तो फिर… यहीं से शुरू होने दो।”

वह और भी पास आई, इतनी कि उसकी साँस सीधी मेरे होंठों से टकरा रही थी। मैंने उसकी ठुड्डी को हल्का सा उठाया, और अगले ही पल मेरे होंठ उसके होंठों पर थे।

पहले स्पर्श में ही उसने एक धीमी सी साँस छोड़ी, जैसे कब से इस पल का इंतज़ार कर रही हो। उसके मुलायम होंठ मेरे होंठों से चिपकते ही मेरी उँगलियाँ उसकी कमर पर और कस गई। कुछ ही सेकंड में उसके होंठ खुले… और मेरी ज़बान उसके भीतर चली गई। उसने तुरंत जवाब प्रिया—अपनी ज़बान मेरी ज़बान से टकरा कर, उसे लपेट कर, जैसे हर स्वाद मुझे चखाना चाहती हो।

हम दोनों की साँसें एक दूसरे में घुलने लगीं। उसकी ज़बान मेरी ज़बान को कभी धक्का देती, कभी खींच लेती… कभी ऊपर से छूती, कभी नीचे से लिपट जाती। गर्म लार हमारे होंठों से बह कर आपस में मिल रही थी, और हर पल चखने में और गहराई आ रही थी।

वह अचानक मेरे होंठ दबा कर चूसने लगी, धीरे, लेकिन इतनी जुनून से कि मेरी सांस अटक गई। फिर उसने मेरे निचले होंठ को हल्का सा काटा और फुसफुसाई, “मुझे तुम्हारा लंड चाहिए, गोलू ”

“ठीक है स्पूजा दीदी।” मैंने जवाब प्रिया।

मेरे जवाब देते ही स्पूजा दीदी के होंठों पर वह शरारती, भूखी‌ सी मुस्कान और गहरी हो गई। वह थोड़ा पीछे हटी, लेकिन उसकी नज़रें मेरे शरीर पर ही टिकी रहीं, बिलकुल वहीं, जहाँ मेरे हाथ धीमे-धीमे बढ़ रहे थे। मैंने अपनी पैंट का बटन पकड़ा… धीरे से खोला… और पैंट नीचे सरका दी।

स्पूजा दीदी मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराई—एक धीमी, चाहत से भरी मुस्कान, जैसे वह हर पल को अपनी आँखों से पी रही हों। उनकी नज़रें मेरे शरीर पर से जरा भी नहीं हट रही थी। मैंने उनकी आँखों के सामने ही अपना अंडरवियर भी पकड़ कर नीचे खींच प्रिया, धीरे, पूरी तरह। एक पल के लिए बाथरूम में सिर्फ स्पूजा दीदी की भारी होती सांसें और मेरी तेज़ धड़कन की आवाज़ गूंज रही थी।

फिर स्पूजा दीदी भी खामोशी से अपनी पैंटी पर हाथ ले गई। उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए उसे धीरे से एक तरफ से पकड़ा… फिर अपनी कमर को हल्का-सा उठा कर पैंटी नीचे खींच दी। कपड़ा उनके पैरों से फिसलता हुआ नीचे गिर गया, और उन्होंने उसे एक टांग से हटा कर साइड कर प्रिया।

अब वह पूरी तरह मेरे सामने थी, और उनके होंठों पर वही भूखी, जली हुई मुस्कान। फिर वह आधा कदम पीछे गई और बाथरूम के बेसिन पर दोनों हाथ रख कर हल्का-सा झुक गई। उनकी कमर ऊपर उठ गई, पीठ खूबसूरती से तरह मुड़ गई, और उनका पूरा शरीर मेरे सामने खुल कर… दमक उठा।

उसी पोज़ में रहते हुए उन्होंने अपनी गर्दन थोड़ी मोड़ कर पीछे देखा और धीमे, काँपती लेकिन हुक्म देने वाली आवाज़ में बोली,‌ “गोलू… मेरे पास आओ।”

मैं उनके पास धीरे-धीरे गया, दिल धड़क रहा था और सांसें तेज़ हो रही थी। जैसे ही मैं पास पहुँचा, मैंने उनका पिछवाड़ा देखा। यह गोल और भरा हुआ था, पूरी तरह आकर्षक शेप में। बीच का हिस्सा पूरी तरह से गोल और साफ दिखाई दे रहा था, किनारे हल्के और गोल थे। रंग त्वचा का साफ़ और चिकना था, और हल्की चमक इसे और नेचुरल बना रही थी।

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मैं बस खड़ा होकर उसे देखता रहा, उसकी गोलाई और आकार में खो गया। मैंने उसे छूना चाहा तभी उन्होंने मेरी उंगली को रोका और धीरे से बोली, “गोलू… इसे अपने हाथ से मत छुओ। इसे अपने लंड से छुओ।”

मैंने धीरे से कहा, “जैसा आप चाहो, दीदी।” और फिर अपने लंड को उनके पिछवाड़े पर रगड़ना शुरू किया। उन्होंने धीरे-धीरे हल्की आवाज़ में कराहना शुरू किया। उनका पिछवाड़ा मेरे लंड के नीचे पूरी तरह महसूस हो रहा था और हर हल्की रगड़ के साथ उनकी आवाज़ और बढ़ती जा रही थी।

मैंने रगड़ते हुए धीरे-धीरे गति बढ़ाई। दीदी की सांसें अब तेज़ और कंपी थी। उनकी कमर हल्की-सी हिल रही थी और पिछवाड़े की गोलाई मेरे हाथों और लंड पर पूरी तरह महसूस हो रही थी। हर रगड़ के साथ उनकी हल्की कराह और बढ़ती सांसें मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मैं धीरे-धीरे उनके ऊपर-नीचे हाथ और लंड की रगड़ को महसूस कर रहा था, और दीदी की हल्की-हल्की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थी।

तभी उन्होंने मेरी कान के पास झुक कर कहा, “गोलू… मुझसे मत खेलो, इसे अंदर डालो।”

मैंने महसूस किया कि मेरा लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा हो गया था, उनके पिछवाड़े को छूते ही मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। दीदी की आवाज़, हल्की कराह और हाँफन मेरे अंदर की आग को और भड़का रही थी। धीरे-धीरे मैंने लंड को अंदर डालने की कोशिश शुरू की। मेरी पहली टिप जैसे ही उनके अंदर गई, दीदी चिल्लाई और थोड़ी दर्द महसूस होने लगी, लेकिन उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। उसने बेसिन को मजबूती से पकड़ा और दर्द को सहन करने की कोशिश की, अपनी सांसें तेज़ और कांपती हुई।

मैंने महसूस किया कि मेरा लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा हो गया था, उनके पिछवाड़े को छूते ही मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। दीदी की आवाज़, हल्की कराह और हाँफन मेरे अंदर की आग को और भड़का रही थी। धीरे-धीरे मैंने लंड को अंदर डालना शुरू किया। मेरी पहली टिप जैसे ही उनके अंदर गई, दीदी ने थोड़ी दर्द की आवाज़ में चिल्लाया, लेकिन उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। उसने बेसिन को मजबूती से पकड़ा और दर्द को सहन करते हुए खुद को संभालने की कोशिश की।

कुछ समय तक धीमी गति में जाने के बाद, मैंने धीरे से पूछा, “स्पूजा दीदी, क्या मैं तेजी से करूं?”

दीदी ने सांसें लेती हुई और हल्की कराहों के बीच कहा, “हाँ गोलू, मैं इस दर्द को सह सकती हूँ।”

मैंने अपने लंड पर हल्की थूक की और उसे उनके पिछवाड़े पर रगड़ प्रिया, ताकि वह और चिकना और आसानी से अंदर-बाहर हो सके। दीदी ने तुरंत जोर से कराहना शुरू किया, उनकी आवाज़ में दर्द और सुख का मिश्रण था। मैं अब धीरे-धीरे हिप्स को तेजी से हिलाने लगा। हर अंदर-बाहर की हरकत के साथ दीदी जोर से चिल्ला रही थी, “आह… गोलू… हाँ… और… हाँ…” उनकी आवाज़ में दर्द की कड़क और आनंद की हल्की फुहार मिल रही थी।

मैंने अपनी गति और बढ़ा दी, हर हरकत पर उनका पिछवाड़ा मेरे लंड के चारों ओर कसता और फैलता महसूस हो रहा था। दीदी बेसिन को मजबूती से पकड़ कर खुद को सहन कर रही थी, उनके चेहरे पर हल्की पसीने की चमक और तेज़ सांसें उनकी पूरी उत्तेजना दिखा रही थी। वह लगातार कराह रही थी, कभी दर्द की, कभी खुशी की, लेकिन कभी भी रुकने को नहीं कह रही थी। हर तेजी से हिलाने पर उनकी आवाज़ और तेज़ होती जा रही थी, कमरे में उनका शोर गूंज रहा था, और मैं पूरी तरह उसके अंदर खो गया।

कुछ समय बाद, मैंने कमर की बढ़ाते हुए जोर की आवाज़ में कहा, “दीदी, मैं आ रहा हूँ।”

दीदी ने सांस लेते हुए और हल्की कराहों के बीच मुझे जवाब प्रिया, “गोलू… तुम इसे मेरे अंदर कर सकते हो।”

मैंने अपने कमर और गति पर और जोर लगाया, और धीरे-धीरे मैं अंदर ही अंदर फूटने लगा। मेरा लंड उनके अंदर सिकुड़ता और फैलता महसूस हो रहा था। पहले कुछ छींटे उनके अंदर ही रुके, लेकिन जल्दी ही इतना भर गया कि सब अंदर नहीं समा सका और थोड़ा-थोड़ा उनके पैरों तक टपकने लगा। दीदी ने जोर से कराहते हुए बेसिन को कस कर पकड़ा और अपने शरीर को संभालते हुए खड़े रहने की कोशिश की। उनके चेहरे पर हल्की पसीने की चमक और तेज़ सांसें उनके पूरे शरीर को बता रही थी कि वह दर्द और सुख को एक साथ सह रही हैं। हर फटते हुए छींटे के साथ वह कराह रही थी, “आह… गोलू… हाँ… और… हाँ…”

जैसे ही ज्यादा मैं बह गया, उसका कुछ हिस्सा उनके पिछवाड़े और पैरों पर फैल गया। सफेद, गाढ़ा तरल उनके चिकने पिछवाड़े पर चमक रहा था और पैरों से धीरे-धीरे टपक रहा था। दीदी की त्वचा पर चमक और सफेदी उनके पूरे पिछवाड़े को ढक रही थी।

फिर दीदी ने मुड़ कर मुझे गले लगा लिया और अपने होंठों से मुझे चूमना शुरू किया। उसने धीरे से कहा, “मेरा छोटा भाई दुनिया में सबसे अच्छा है।”

अगले दिन मैं और स्पूजा दीदी सुबह-सुबह तैयार होकर अस्पताल जाने के लिए निकले। मौसम थोड़ा ठंडा था, इसलिए दीदी ने अपने दुपट्टे को कंधों पर अच्छे से लपेट लिया। उनको यह जानना था कि जब हम दोनों सामने की तरफ से करते हैं तो वह तकलीफ़ क्यों नहीं सह पाती।

जब हम अस्पताल पहुँचे तो पूरा अस्पताल लगभग खाली सा लग रहा था। लंबी सफ़ेद गलियारे में बस ट्यूब लाइट की धीमी सी रोशनी थी। ना कोई मरीज़, ना कोई नर्स… बस हल्की सी दवा की महक हवा में तैर रही थी।

कमरे के अंदर एक महिला डॉक्टर अपनी कुर्सी पर बैठी फ़ाइल देख रही थी। जैसे ही स्पूजा दीदी अंदर गई, डॉक्टर ने दरवाज़ा बंद करके लॉक कर प्रिया। मैं बाहर कुर्सी पर बैठ कर इंतज़ार करने लगा। अंदर से बहुत धीमी धीमी आवाज़ें आ रही थी। जैसे डॉक्टर उन्हें धीरे से कुछ समझा रही हों, कहीं-कहीं दीदी की हल्की सी साँसें भी सुनाई देती।

काफ़ी देर बाद *टक* की आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुला। डॉक्टर ने मुझे अंदर आने का इशारा किया। मैं धीरे से अंदर गया। स्पूजा दीदी सामने वाली कुर्सी पर बैठी थी, उनके गाल हल्के से लाल थे, जैसे अभी कुछ देर पहले उन्हें पूरा चेकअप किया गया हो।

मैं उनके पास जाकर बैठ गया। डॉक्टर ने अपनी चश्मे के ऊपर से हमें देखते हुए पूछा, “तुम दोनों का रिश्ता क्या है?”

मैं कुछ कह पाता, उससे पहले ही दीदी ने बिना पलक झपकाए नॉर्मल आवाज़ में कहा, “ये… मेरा फ़्यूचर हसबैंड है।” उनके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आई, और मेरी साँस अंदर ही अटक गई।

डॉक्टर ने अपनी चश्मे के ऊपर से हमें देखते हुए कहा, “स्पूजा की स्किन बाकी लड़कियों की तरह स्ट्रेचेबल नहीं है, इसलिए सेक्स करते समय उन्हें ज्यादा दर्द होता है। मैंने कुछ दवा दी है और साथ में एक किताब दी है, जिसमें एक्सरसाइज़ हैं ताकि त्वचा धीरे-धीरे ढीली हो सके।”

जब हम अपार्टमेंट पहुँचे और किताब खोली, तो वह बिल्कुल आम किताब नहीं थी। यह सेक्स पोज़िशन, फिंगरिंग की ट्रिक्स और ऐसे कई टिप्स से भरी हुई थी। दीदी ने मेरी तरफ देखा, उनका चेहरा हल्का सा शर्मीला था, आँखों में झिझक और हल्की लालिमा थी। उनके हौले से मुस्कुराने और मेरी तरफ देखने के अंदाज़ ने माहौल को और नाज़ुक और निजी बना प्रिया।

मैंने धीरे से पूछा, “दीदी… ये सब हमें करना पड़ेगा?”

दीदी ने होंठ दबाते हुए किताब बंद की और मेरी ओर थोड़ा झुक कर धीमी आवाज़ में बोलीं, “डॉक्टर ने कहा है… इसमें जो एक्सरसाइज हैं, वो करनी होगी।”

हमने किताब को फिर से खोल कर पढ़ना शुरू किया। जैसे जैसे पन्ने पलटते गए, दीदी अचानक एक पन्ने पर रुक गई और धीमी आवाज़ में बोलीं, “हम क्या इसे अभी ट्राय कर सकते हैं?”

मैंने पन्ने देखा और समझ गया कि यह उस हिस्से के बारे में था जिसमें लिखा था कि सेक्स करते समय लड़की के पीठ के नीचे कुछ रखा जाए और लोशन का इस्तेमाल किया जाए। दीदी ने बिना किसी झिझक के, पूरे उत्साह और चाहत के साथ सब कुछ बताना शुरू कर प्रिया, जैसे वह इसे मेरे साथ अभी करना चाहती हो। उसका चेहरा थोड़ा लाल था, लेकिन आँखों में खुशी की झलक थी।

मैंने धीरे से कहा, “ठीक है दीदी, हम इसे ट्राय कर सकते हैं।” दीदी ने अपनी टी शर्ट धीरे से उतारी और बिस्तर पर लेट गई। उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। वह पूरी तरह खुश लग रही थी, यह देखने के लिए कि इस बार क्या होने वाला है। उसका शरीर तैयार था, और वह अपने छोटे भाई से मिलने वाले दर्द को सहन करने के लिए तैयार थी।

अगला भाग पढ़े:-बड़ी बहन के साथ छुप-छुप कर बदन की आग बुझाई-10

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