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बीवी और बहन ने मुझे बहनचोद बना दिया

अजय पूनिया

03 Mar 2022 को प्रकाशित

बीवी और बहन ने मुझे बहनचोद बना दिया
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बहन चुदाई चुदाई कहानी में मेरी चचेरी बहन हमारे घर में रहती थी. मेरी शादी के बाद वह मेरी पत्नी की खास सखी बन गयी. एक बार घर में हम तीनों ही थे. तो मेरी बीवी ने क्या काण्ड किया.

मेरा नाम अजय है और मैं राजस्थान के सादुलपुर शहर में रहता हूँ।

मेरी उम्र 21 साल है और मेरा शरीर भी औसत ही दिखाई देता है।मेरा कद 5.8 इंच है। मेरे लंड 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।

हमारे परिवार में मैं, पापा, मम्मी और मेरी छोटी बहन कविता है।

यह बहन चुदाई चुदाई कहानी इसी कविता के साथ की है.

कविता मेरी सगी बहन नहीं है, वो मेरे चाचा की लड़की है।चाचा और चाची के गुजर जाने के बाद वो हमारे साथ ही रहती है।

कविता की उम्र 18 साल है। वह मुझसे 4 साल छोटी है।

पहले मैं और कविता एक ही रूम में अलग-अलग चारपाई पर सोते और पढ़ते थे।तब मैंने न तो उसे और न ही उसने मुझे उस नजर से देखा था।

मेरे 21 साल के होते ही पापा ने अपने दोस्त की लड़की के साथ मेरा रिश्ता पक्का कर मेरी शादी 2023 के अक्टूबर महीने में कर दी।मेरी बीवी का नाम पिंकी है और वो मुझसे 1 साल छोटी है।

शादी के बाद मैं और पिंकी अलग कमरे में सोने लग गए।

नई-नई शादी हुई थी तो मैं और पिंकी सारी रात चुदाई करते।हम दोनों रात के 3-4 बजे तक लगे रहते।

मैं और पिंकी अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश थे।

मेरी बहन और पिंकी में बहुत अच्छी बनती है।ये दोनों हर बात आपस में साझा करती हैं।

यह बात मुझे बाद में पता चली।

पिंकी हमारी चुदाई की हर बात अपनी ननद को बताती और वो बहुत अच्छे से सुनती – जैसे कि मेरा कितना बड़ा है और हम कैसे करते हैं।चुदाई की बातें सुनने से कविता का दिल भी चुदने को करने लगा था।

दिन में मैं और पिंकी जब अकेले होते तब कविता भी हमारे पास आने लगी।कविता मुझमें काफी रुचि लेने लगी थी, हालांकि मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता था।

एक बार मामा की तबीयत अचानक खराब हो जाने से मम्मी और पापा को उनके पास जाना पड़ा।अब घर पर हम तीनों ही बचे थे।

शाम को खाना खाने के बाद हम टीवी देख रहे थे तो कविता ने हमारे साथ में सोने की जिद की और पिंकी ने भी कोई आपत्ति नहीं दिखाई।क्योंकि घर पर और कोई नहीं था तो मैंने भी हाँ कर दी।

मैंने सोचा एक दिन नहीं कर पाऊँगा तो क्या हो जाएगा।उसके बाद पिंकी और कविता बर्तन धोने लगीं।

मैं अपने कमरे में आ गया।मैं अपने बेड पर लेट कर मोबाइल में रील देखने लगा।

तब तक पिंकी और कविता ने घर के सारे गेट अच्छे से बंद किए और घर की सारी लाइट ऑफ करने के बाद सोने के लिए मेरे कमरे में आ गईं।

काफी देर तक इधर-उधर की बातें करने के बाद मैंने उन दोनों को लाइट बंद कर सोने को कहा।पिंकी लाइट बंद कर मेरे और कविता के बीच में मेरी तरफ पीठ कर के लेट गई।

काफी देर के बाद मैंने थोड़ा सा आगे सरक कर अपना लंड उसकी गांड से टच कर दिया।इससे उसने भी अपनी गांड थोड़ा सा पीछे सरका दी।

अब वो गांड को थोड़ा-थोड़ा हिला के मजे ले रही थी।उसके हाथ में काफी चूड़ियाँ थीं जो बहुत आवाज कर रही थीं।

अचानक से उसने अपना हाथ पीछे कर मेरे बॉक्सर में से लंड बाहर निकाल लिया और पकड़ कर अपनी गांड में दबाने लगी।उसके हाथ के लगते ही मेरा लंड अपने रूप में आ गया।

मुझे काफी मजा आ रहा था तो मैंने भी हाथ आगे कर उसका सलवार का नाड़ा खोल दिया।सलवार को नीचे कर उसकी चूत में धीरे-धीरे उंगली करने लगा।

हम दोनों की सांसें तेज हो रही थीं।हम दोनों चुदाई के लिए मरे जा रहे थे।

मैंने सलवार को नीचे कर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।

लंड के अंदर जाते ही पिंकी की सिसकी निकल गई तो मैंने हाथ ऊपर कर उसके मुँह पर रख दिया और आराम-आराम से लंड को आगे-पीछे करने लगा।बदले में पिंकी भी गांड को आगे-पीछे कर अपनी खुशी का इजहार कर रही थी।

अब मैंने पिंकी के मुँह पर से हाथ हटा कर उसके चूचे पर रखा तो मुझे वहाँ कविता का हाथ होने का अनुमान हुआ।क्योंकि पिंकी का ऊपर वाला हाथ मेरी गांड पर था, जिससे वो आगे-पीछे होने का इशारा कर रही थी।

मैंने ज्यादा ध्यान ना देते हुए अपना काम जारी रखा।

चुदाई करते-करते कब मैंने पिंकी का कुर्ता और ब्रा को ऊपर किया, पता ही नहीं चला।अब मैं पिंकी के चूचे जोर-जोर से दबा रखा था और जोर-जोर से पिंकी की चूत में लंड मार रहा था।

जोर-जोर से आगे-पीछे होने से काफी आवाज आ रही थी और हमारी सांसें भी काफी तेज हो चुकी थीं।

हमें कविता का मानो कोई डर ही नहीं लग रहा था।हम दोनों चुदाई के मजे में खो चुके थे।

तभी मेरा हाथ किसी ने पकड़ के कविता के चूचों पर रखा जो पूरे बाहर निकले हुए थे।इस बात का अंदाजा मुझे तब हुआ जब मैंने हाथ को पूरे चूचों और पेट पर घुमाया।

पेट पर हाथ जाते ही किसी ने पकड़ कर चूत पर रख दिया और जोर-जोर से अंदर दबाने लगा।

मुझे कुछ गड़बड़ी सी लगी तो मैं बॉक्सर ऊपर कर लाइट जलाने गया।जैसे ही लाइट की रोशनी हुई तो मैंने पलट कर पीछे देखा।

पीछे का नजारा देख कर मेरे होश ही उड़ गए।कविता ने पूरे कपड़े निकाल रखे थे और दोनों मुझे देख कर मुस्करा रही थीं।

तभी पिंकी ने मुझे हाथ से दोनों के बीच में सोने के लिए कहा.और मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं चुपचाप जा कर दोनों के बीच लेट गया।

मेरे लेटते ही दोनों अपनी टाँगें मेरे लंड पर रख के मुझसे लिपट गईं।

पिंकी मेरे होंठों पर जोर-जोर से किस करने लगी और कविता मेरी छोटी सी चूची को चूसने लगी।

उन दोनों ने मुझे बोलने का मौका ही नहीं दिया।मैं उन दोनों के बीच में लेटे-लेटे आँखें बंद कर सिसकारियाँ भर रहा था।

कविता ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया तो पिंकी ने भी वैसा ही किया।अब मैं आँखें बंद किए हुए उन दोनों की चूत में उंगली कर रहा था।

पिंकी ने उठ कर मेरे और अपने पूरे कपड़े निकाल दिए।

अब पिंकी और कविता दोनों बैठ कर बारी-बारी मेरा लंड चूसने लगीं।

जैसे ही मैं कविता की तरफ देखता, कविता और पिंकी दोनों मेरी तरफ मुस्करा देतीं।मैं समझ गया था ये इन दोनों की चाल थी।

पिंकी ने उठ कर मेरे दोनों तरफ टाँगें कर मेरा लंड अपनी चूत पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया और कविता कभी मुझे तो कभी अपनी भाभी को किस कर रही थी।

पिंकी ने अब आहिस्ता-आहिस्ता पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया था और जोर-जोर से कूद रही थी।

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मैं और कविता भी पूरी तरह से खुल गए थे।

कविता आँखें बंद किए हुए मुझे किस कर रही थी और मैं भी उसकी छोटी सी चूत में जोर-जोर से उंगली कर रहा था।

तभी पिंकी जोर-जोर से कूदते हुए मेरे ऊपर लेट गई और मैंने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।

पिंकी उठी तो उसकी चूत से हम दोनों का पानी मिल कर बाहर निकल रहा था।इतना पानी हम दोनों का शुरू-शुरू में निकलता था जब हमारी नई-नई शादी हुई थी।

पिंकी ने कभी भी मेरा पानी अपने मुँह में नहीं लिया था, पर उस दिन पता नहीं उसे क्या हो गया था।वो मेरा लंड अपने मुँह में ले कर जोर-जोर से चूस रही थी, मेरे लंड के आसपास गिरा पानी भी चाट रही थी।आज वो पागल लग रही थी।

थोड़ी देर में वो सामान्य हुई तो उसने कविता को बोला, “आज तो बहुत मजा आया!”

अब तक हमारे तीनों के मुँह से एक लफ्ज़ भी बाहर नहीं निकला था।

पिंकी उठ कर बाथरूम की तरफ नग्न अवस्था में आगे बढ़ी।

उसके जाते ही मैंने अपनी बहन को अच्छी तरह से ऊपर से नीचे तक देखा।फिर जैसे ही हम दोनों की नजर मिली, वो शर्मा गई।

उसके शरमाते ही मैंने आगे बढ़ कर अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए और हम दोनों आपस में जोर-जोर से होंठ खाने लगे।हम दोनों के बीच में हवा का एक सांस भी नहीं बचा था।

कभी मैं उसके ऊपर तो कभी वो मेरे ऊपर – हम दोनों आपस में बहुत ज्यादा खो गए थे।

तभी पिंकी की आहट सुन कर हम दोनों अलग हुए।

पिंकी ने हँसते हुए कहा, “आज रात दोनों भाई-बहन फुल मजे करो!”

इतना बोल कर पिंकी ने आगे बढ़ कर कविता के चूचे मसलना शुरू कर दिया।मैंने कविता का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया तो वो कस के पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी।

थोड़ी ही देर में मेरा लंड विकराल रूप में आ गया।पिंकी ने कविता को सीधा लिटा दिया और वो बेड की ड्रावर में से वेसलीन निकाल लाई।

वह वेसलीन की उंगली भर कर मेरे लंड पर अच्छे से लगाने लगी तो मैंने भी एक उंगली भर कर कविता की चूत अच्छे से चिकनी कर दी।

कविता आँखें बंद किए हुए पूरा मजा ले रही थी और मेरा हाथ पकड़ कर आगे-पीछे कर रही थी।अब कविता पूरी तरह से मेरा लंड लेने के लिए तैयार हो गई थी।

अब मैं कविता की दोनों टाँगों के बीच में आ गया था।जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत पर घिसना शुरू किया तो उसकी आह निकल गई।

पिंकी ने आह सुनते ही कविता का मुँह अपने मुँह में ले लिया और हाथ के इशारे से मुझे आगे बढ़ने को कहा।मैंने भी देरी ना करते हुए अपना पूरा जोर लगा के एक ही दम में अपना पूरा लंड उसकी बच्चेदानी तक पहुँचा दिया।यहाँ वेसलीन की चिकनाई बहुत काम आई।

कविता की आँखें खुली की खुली रह गईं और आँसुओं का सैलाब सा निकलता हुआ दिखा।तभी पिंकी ने मुझे इशारे से रुकने के लिए कहा और खुद किस करते हुए कविता के चूचे जोर-जोर से दबाने लगी।

कविता के चूचे पूरी तरह से लाल हो गए थे और उसने पिंकी की गर्दन को पूरी तरह से जकड़ रखा था।

कविता थोड़ी देर में सामान्य हुई तो मैंने अपना सीना उसकी छाती से चिपकाते हुए आगे की कमान संभाली और पिंकी को साइड में कर दिया।

अब मैंने कविता के होंठ अपने मुँह में ले लिए और धीरे-धीरे रेल गाड़ी की तरह आगे बढ़ना शुरू कर दिया।दर्द के भाव अभी भी उसकी शक्ल पर दिख रहे थे।

पिंकी ने कविता की टाँगें पकड़ कर हवा में कर दीं।इससे मुझे चूत की जड़ तक लंड पेलने में आसानी हो रही थी।

कविता ने भी अपने हाथ मेरी पीठ पर रख कर अपने आप को पूरी तरह से मुझे समर्पित कर दिया।

मैंने भी पूरे जोश से उसे चोदना शुरू कर दिया था।

हम दोनों को देख कर पिंकी भी उत्तेजित हो रही थी और वो अपनी ननद को देख कर मुस्करा रही थी – जैसे कि उसने अपना कर्तव्य निभा दिया हो।

कविता बहुत-बहुत जोर-जोर से आह आह कर रही थी।मेरे टट्टेबहन की गांडसे टकरा कर बहुत आवाज निकाल रहे थे।

अब कविता ने भी नीचे से अपनी कमर को तेज-तेज हिलाना शुरू कर दिया था और जोर-जोर से “आई लव यू भाई! आई लव यू भाई!” बोल रही थी।

उसकी अकड़न से पता चल रहा था कि उसका होने वाला है।तभी उसने “भाई किस!” कहा और मैंने अपने होंठ उसके हवाले कर दिए।

उसने मेरे होंठ खाते हुए मुझे कस कर पकड़ लिया और कमर हिलाते हुए शांत हो गई।

मेरा तो एक बार पानी निकल गया था तो मेरा इतना जल्दी होने वाला नहीं था।

कविता का पानी मेरे लंड से चिपक कर बाहर निकल रहा था।उसे अब दर्द होने लगा था तो उसने अपनी आँखें और अपना मुँह जोर से भींच लिया था।

इससे उसकी चूत भी मुझे टाइट लगने लगी थी तो मैं भी जोर-जोर से धक्का लगाने लगा था।

अब उसकी चूत से चप-चप की आवाज आने लगी थी।पास में बैठी पिंकी ने मेरी पीठ पर हाथ रख मुझे लगे रहने को कहा।

मैंने कविता को कस कर पकड़ लिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी।उसकी आँख से आँसू आने शुरू हो गए थे।

25-30 धक्कों के बाद मैंने भी हार मान ली और उसे कस के पकड़ कर उसकी बच्चेदानी में अपने पानी का फव्वारा छोड़ दिया।तब तक उसे भींच कर रखा जब तक मेरी आखिरी बूंद उसकी चूत में गिर न गई।

बूंद चूत में गिरते समय मेरा लंड झटके खा रहा था तो बहन चुदाई चुदाई में उन झटकों का आनंद लेते हुए सिसकारियाँ मार रही थी।

वो आँखें बंद किए हुए अपना मुँह खोले “आई लव यू भाई!” कहते हुए हर एक बूंद को महसूस कर रही थी।

मैं काफी देर तक कविता को किस करते हुए अपनी खुशी का इजहार करता रहा और बदले में वो भी मुझे चूमते हुए अपनी संतुष्टि जाहिर कर रही थी।

अब तक पिंकी ने ब्रा और पैंटी पहन ली थीं और वो हमें देखते हुए “कुछ खाने को लाती हूँ!” बोल कर किचन की तरफ चली गई।

पीछे से हम दोनों भाई-बहन उठ कर कपड़े पहनने लगे।आज रात हम तीनों को सोना नहीं था और हमें जम कर सेक्स करना था।

अगली कहानी में बताऊँगा कि कैसे हम तीनों ने अलग-अलग पोजीशन में सेक्स किया और कैसे मैंने दोनों की गांड मारी।

अब हम तीनों में अब छुपाने लायक कुछ नहीं बचा है।हम तीनों को जब भी मौका मिलता, हम लग जाते हैं।

मेरी बीबी अपने गाँव जाती है तो मेरी बहन को बोल के जाती है कि मेरा पूरा खयाल रखे।

मेरी बहन की शादी के बाद हमने मेरे जीजा को भी इस खेल में शामिल कर लिया है।

बहन चुदाई चुदाई कहानी अच्छी लगी होगी.चूंकि यह मेरी पहली कहानी है तो कुछ गलती हो तो माफ करें।कुछ भी हो मुझे मेल अवश्य करेंsupport@mohakkisse.com

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15 मिनट 754

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

देवेन्द्र कुमार

2 weeks ago

बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी लिखी है भाई। मजा आ गया।

छुपा रुस्तम

1 month ago

रिश्तों की ये कहानी सच में बहुत ही कामुक थी। अंत बहुत ही गर्म था।

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