ऐस्स डिक स्टोरी में मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्र इकट्ठे हुए तो उनमें से 2 बहुत चिकने थे। दूसरे लड़कों ने चिकने लड़कों की गान्ड मारी।
दोस्तो, मैं आपका पुराना साथी आजाद गांडू एक बार पुनः अपने मिलने वालों की गांड चुदाई वाली ऐस्स डिक स्टोरी के साथ हाजिर हूँ.
आपको याद होगा कि मेरी गे सेक्स कहानीबड़े लंड से डॉक्टर की गांड चुदाईमें एक डॉक्टर सुरेन्द्र थे, जिनको गांड मारने और मरवाने का शौक था.
उन्होंने अपने जूनियर नीरव से गांड मरवा ली थी और वे दोनों सो गए थे.
जब नींद खुली तब तक सुबह हो गई थी.सुरेन्द्र डॉक्टर साहब उठे, फ्रेश होने गए और अपने रूम में जाने लगे.
जाने से पहले डॉक्टर साहब ने नीरव को बहुत सारा थैंक्यू दिया और उसके होंठ चूम लिए.
उन्हें लौंडे के होंठ अच्छे लगे तो वे बड़ी देर तक होंठ ही चूसते रहे.फिर बोले- यार, तुमने मजा बांध दिया.यह कह कर डॉक्टर साहब अपने कमरे में चले गए.
अपनी गांड मरवा कर जब डॉक्टर सुरेन्द्र अपने कमरे में पहुंचे तो वहां मस्त तमाशा दिखाई देने लगा था.कमरे में फर्श पर दीवार की तरफ पंडित जी लेटे हुए थे, फिर उनका साथी शाहिद उर्फ बबलू, दीवार की दूसरी तरफ दो मेडिकल स्टूडेंट और बीच में वह सबसे कम उम्र का सदस्य समीर लेटा हुआ था.
रात को समीर को पेशाब लगी तो वह पेशाब करने उठा.
जब लौटा तो दूसरा पंडित जी का साथी शाहिद करवट बदल कर उनसे थोड़ा दूर हो गया था.उसी वजह से समीर पंडित जी के बगल में उन दोनों के बीच में जाकर लेट गया.
पंडित जी बियर के नशे में तो थे ही, अब शायद नशा हल्का हो गया होगा, पर उतरा तो नहीं था.समीर उनकी तरफ पीठ किए लेटा था.
मैं पहले ही बता चुका हूँ कि सब एक दूसरे से सटकर लेटे हुए थे.
पंडित जी ने करवट बदली तो समीर के चूतड़ उनके लंड से रगड़ने लगे.उन्होंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे और अपने से चिपका लिया.
पंडित जी का लंड बुरी तरह फड़फड़ाने लगा और खड़ा हो गया.
उन्होंने हाथ डालकर मसला तो लंड अंडरवियर से बाहर निकल आया.
अब वे आधी नींद में ही उस लड़के के चूतड़ सहलाने लगे, फिर हल्का-हल्का मसलने लगे.कमरे में अंधेरा तो था ही, उन्होंने लौंडे का हौजरी का अंडरवियर नीचे को खिसकाना चाहा.अंडरवियर की इलास्टिक में हाथ डालकर उसे नीचे खींचा तो वह आसानी से नीचे खिसक गया.
अब पंडित जी थोड़े जागे.उन्होंने हथियार पर थूक लगाकर लौंडे की गांड पर टिका दिया.लौंडा शायद गहरी नींद में था या साला बन रहा था.
जब उन्होंने लंड पेला, झटका दिया, तो उनका सुपाड़ा गांड में अन्दर चला गया.लौंडे की गांड ढीली थी; दूसरे झटके में आधा लंड अन्दर था.
अब लौंडा कुनमुनाया, चूतड़ सिकोड़े, गांड टाइट कर ली.उसने पहले घुटने मोड़े हुए थे, अब टांगें सीधी कर लीं.
पहले पहल तो उसने पंडित जी की पकड़ से छूटने की कोशिश की.पर पंडित जी उसे कमर से जकड़े हुए थे.
पंडित जी ने उसे ताकत से औंधा कर दिया और उस पर चढ़ बैठे.उसकी गर्दन में हाथ डालकर एकदम चिपक गए और जोर के झटके के साथ पूरा लंड गांड में पेल दिया.
लड़का ‘आ … आ …’ करने लगा तो उसके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से फुसफुसाते हुए बोले- भैया मेरे … ज्यादा नहीं चिल्लाओ. अब तो पूरा चला गया है मजा लो. अगर और सब जग गए तो वे भी सब मजा लेंगे, तुम्हें सबसे करवाना पड़ेगा. चुप रह, अब मैं वैसे ही लेटा हूँ, कुछ नहीं कर रहा. जब तुम कहोगे तभी करूंगा. बस चुपचाप रहो, थोड़ी देर लगेगी फिर सब ठीक हो जाएगा.
कुछ पल तक लौंडा चुप रहा.
पंडित जी ने अब उसकी टांगों को हाथ लगाकर कहा- टांगें फैला लो, छेदा थोड़ा ढीला कर लो … अब चला तो गया ही है, खुल कर मजा भी ले लो!
समीर कराहता हुआ बोला- अरे बहुत लग रही है पंडित जी … निकाल लो आप, मेरी फटी जा रही है बस आ … आ … ई… तुमने पूरा पेल दिया. अब तो इत्ती देर हो गई, निकाल लो न!भूरे पंडित बोले- अरे अभी तो यार कुछ किया ही नहीं, बस थोड़ा रुको, थोड़ी ढीली कर लो. देखो तुम्हें भी मजा आएगा.
उन्होंने उसे पटाने के लिए उसके सर पर हाथ फेरा, मक्खन लगाया, अपने गाल से उसका गाल सटाया और लगातार कान के पास होंठ रखकर फुसफुसाते हुए बात करते रहे- अरे कभी तो कराई होगी? तुम इतने माशूक और चिकने हो, किसी ने नहीं पटाया हो … ऐसा हो ही नहीं सकता बताओ न किससे किससे कराई?
समीर बोला- वह जो दीवार की तरफ लड़का लेटा हैं अधीर … उसने परसों मारी थी. थियेटर हॉल के ही अन्दर शो के बाद. तब उसने हमें देर तक घर पहुंचाने की कहकर रोक लिया था, फिर मारी थी. वहीं खाली स्टेज पर अंधेरे में. उसका दूसरा दोस्त बाहर खड़ा रहा था.
भूरे पंडित बोले- तो उस दूसरे दोस्त ने नहीं मारी?समीर बोला- नहीं, उसने तो नहीं ली थी. असल में वह दूसरा खुद अधीर से मरवाता है, उससे दबता है. फिर बाद में वे दोनों मुझे घर छोड़ आए थे.
भूरे पंडित बोले- यार भैया मेरे … जब लेते रहते हो … तो फिर थोड़ी मेरे से भी करवा लो, ढीली कर लो … बस थोड़ी देर ही करूंगा. वैसे सख्ती से करूंगा तो तुम्हें लगेगी!समीर बोला- तुम्हारा बहुत बड़ा है … लग रही है, जल्दी जल्दी कर लो. ऐसे करो कि लगे नहीं, तुम्हारा बहुत मोटा है … अरे आह पेलो मत यार पंडित जी … अभी बस निकाल लो मुझे बहुत लग रही है … आ … आ …. हटो जल्दी से वर्ना चिल्ला दूंगा!भूरे पंडित बोले- अच्छा, धीरे-धीरे करूंगा, बिल्कुल नहीं लगेगी. पहले थोड़ी लगेगी, सहन कर लो भैया मेरे … हां तो शुरू हो जाऊं?
समीर ने कुछ नहीं कहा, तो पंडित जी ने धीरे-धीरे धक्के देना शुरू कर दिए.वे बहुत प्रसन्न थे कि इतने माशूक लौंडे की गांड मारने को मिली.
पंडित जी धीरे-धीरे शुरू हुए, पर फिर अपनी पर आ गए.उनके झटके तेज होते गए.
लौंडे की गांड भी ढीली हो गई थी. वह चुप था, उसने अपनी टांगें चौड़ी कर ली थीं और मजा ले रहा था.
अब पंडित जी के झटके जोर के हो गए. उनकी जोर जोर से सांसें चल रही थीं ‘हूं … हूं …’गांड और लंड की टक्कर से अजीब सी ‘चप … चप …’ की आवाज हो रही थी.बीच-बीच में लौंडा भी ‘आ … आ …’ कर ही रहा था.
तभी हुआ बवाल … समीर के बगल वाला उसका साथी जाग गया.वह उन दोनों की गांड मराई देख रहा था.
पंडित ने उसे देखते ही इशारा किया- चुप रहना!
पंडित अपने उस साथी की कई बार मार चुका था.वह गांड मराने का आदी था.वह पंडित जी का इशारा समझ गया और मुस्कुराने लगा.अब वह समीर की चुदाई देखने लगा.
वह बाजू वाला लड़का शाहिद चुदाई देखते हुए अपना लंड सहलाने लगा.
तभी अधीर भी उठ गया और वह समीर की गांड चुदाई देखकर सही से उठकर बैठ गया.तब तक पंडित का लंड झड़ने लगा था.
कुछ देर बाद पंडित जी निपट कर टॉयलेट चले गए.समीर भी टॉयलेट में ही आ गया.
अधीर ने पंडित जी के लौटने पर उनसे कहा- पंडित जी, आप भी शौक रखते हैं? अब तो इस लौंडे से मैं भी निपटूंगा.भूरे पंडित बोले- अरे तो वह आता ही है, आप भी निपट लो, मुझे क्या!अधीर बोला- वह आता है नहीं, आप अपना अंडरवियर खोलो और लेट जाओ.
पंडित बोले- अरे वह माशूक है, मैं तो अब माशूक नहीं … तुमसे बड़ा हूँ. मेरे से करने में मजा नहीं आएगा!अधीर बोला- आपके आगे वह लौंडा कुछ नहीं है. मैंने आपसे सुंदर अब तक कोई नहीं देखा, देखो नखरे नहीं करना वर्ना समझ लीजिए कि मैं क्या कर सकता हूँ!
पंडित जी गिड़गिड़ाते हुए बोले- अरे डॉक्टर साहब मैं तो आपसे बड़ा हूँ, मेरे में क्या मजा आएगा? वह आ रहा है न!अधीर बोला- पंडित जी, नखरे बिल्कुल नहीं. ये मेरा कॉलेज है, पांच मिनट में आपको पता लग जाएगा. पूरी गैंग उतरेगी आपके ऊपर … जल्दी से अंडरवियर खोलो और औंधे लेट जाओ.पंडित जी सकपकाए हुए खड़े थे.
वह आगे बोला- उस लड़के की तो आपने रात भर मार-मारकर लाल कर दी, दर्द कर रही होगी … इसलिए उसे परेशान नहीं करूँगा.
यह कहते हुए अधीर ने पंडित जी का अंडरवियर नीचे खिसका दिया.अब उजाला थोड़ा-थोड़ा होने लगा था. अधीर ने पंडित जी को लिटा दिया.
मुँह में लंड पेलकर चुसाई का मजा
वे लेटते-लेटते बड़बड़ा रहे थे, पर लेट गए.अधीर ने उन्हें औंधा किया और उनके बगल में लेटे बबलू से कहा- उठ और उस अलमारी में एक तेल की शीशी होगी, उसे ले आ.
वह अधीर को शीशी दे रहा था कि अधीर ने कहा- मादरचोद दिखा क्या रहा है? ढक्कन खोलकर तेल अपनी हथेली पर निकाल और मेरे लंड पर मल.उसने वैसा ही किया.
फिर अधीर बोला- अब अपनी ये तेल से भीगी उंगलियां इसकी गांड में डाल.वह चौंका, पर अधीर के आदेश का पालन किया.अपनी दोनों उंगलियां पंडित जी की गांड में डालकर पहले आगे-पीछे हिलाईं, फिर देर तक गोल-गोल घुमाता रहा.
अब अधीर उसकी ओर देखकर मुस्कुराया और बोला- यार, तुम भी इस काम में पुराने पापी लगते हो … काम अच्छी तरह जानते हो कि कैसे करना है. तुम तो पंडित से ज्यादा नमकीन लग रहे हो. कितने लौंडों की मारी है? अभी इस महीने में कितने लौंडे निपटाए?
बब्लू चुप रह गया, वह टेंशन में था.उसे लग रहा था कि पंडित जी के बाद उसका नंबर तो नहीं लग जाएगा.
अधीर बोला- बोलो-बोलो, घबड़ाओ नहीं तुम बहुत नमकीन हो, मेरे से छोटे ही होगे. हीरे हो हीरे … बहुत से लौंडे तुम पर मरते होंगे. तुमने कितने लौंडे निपटाए?
यह कह कर अधीर ने अपना तेल से भीगा लंड, जो उचक रहा था, भूरे पंडित की गांड में टिकाया और पूरा पेल दिया.पंडित जी ‘आ … आ … ’ करने लगे.
तो अधीर बड़ी मीठी आवाज में बोले- पंडित जी, आप तो नए लौंडे की तरह कर रहे हो, मेरे से बड़े-बड़े हथियार झेले होंगे … नखरे नहीं करो और ढीली करके लेटे रहो. पूरा चला गया है तो मस्ती से मजा लो!
यह कह कर अधीर पंडित जी की गांड में झटके देने लगा.
अब पंडित जी भी शर्म छोड़कर उसका साथ देने लगे, उचक-उचककर गांड ढीली करने और सिकोड़ने लगे, चूतड़ उचकाने लगे.अधीर के मुँह से बरबस निकला- वाह पंडित जी वाह-वाह.
तब तक समीर फ्रेश होकर ब्रश करके आ गया.उसके सामने ही अधीर बोला- आप कहते थे न कि मजा नहीं आएगा, ये लौंडा समीर जो लगातार चिल्लाता रहा, इसी ने हम सबको जगा दिया … गांड सिकोड़ता था, आपको परेशान करता रहा … ये साला कहां आपकी बराबरी कर सकता है? आपने तो कितनी मस्ती से
पूरा लंड झेल लिया और क्या मजा दे रहे हैं … आह और क्या नमकीन हैं … इतना सुंदर जवान मुझे नहीं मिला.
कुछ देर बाद अधीर झड़ गया था.उसका पानी छूट गया था.
पंडित जी की गांड से लंड निकाल कर वह बाथरूम चला गया.आधा घंटा में फ्रेश होकर नहाकर आ गया और अब वह कपड़े बदल रहा था.
पंडित जी के पास एक्स्ट्रा कपड़े नहीं थे, उन्हें तौलिया दे दिया गया.वे भी नहाकर आ गए.
लोग तैयार हो रहे थे, कुछ बाथरूम में थे.कमरे में तीन ही लोग थे … अधीर, पंडित जी और समीर.
अधीर बोला- आपकी क्या जांघें हैं … क्या चूतड़ हैं … कसरत करते हैं क्या? पेट तो बिल्कुल अन्दर घुसा रखा है, दिखता ही नहीं, ऐसी बॉडी इस कॉलेज में किसी की नहीं है!
पंडित जी बोले- अब ऐसा कुछ नहीं करता, बस डांस करता हूँ, उसे ही जो चाहे समझ लें. तबला बजाता हूँ, ढोलक बजाता हूँ.अधीर उनके बाद बोला- और लौंडे भी तो बजाते हो.
यह कह कर वह जोर से हंस दिया- आपके सामने समीर भी क्या मजा दे पाएगा, कुछ नहीं!फिर वह पंडित जी के साथी बबलू की तरफ मुड़ा और बोला- तुमने भी लौंडे निपटाए होंगे?
बबलू, जिसका नाम शाहिद था, वह झेंप गया.
अधीर बोला- लौंडियां चोदी हैं? मैं दिलवाऊंगा … बोलो चोदोगे?यह कह कर अंडरवियर में हाथ डालकर अधीर ने उसका लंड पकड़ लिया, फिर बाहर निकाल लिया और मुट्ठी मारने लगा.
अभी दो-चार झटके ही दिए थे कि उसका लंड खड़ा हो गया.
अधीर आंखें फाड़ता हुआ बोला- बाप रे लंड है या हथौड़ा … इतना बड़ा अगर मेरी गांड में डालोगे तो मेरी तो फट ही जाएगी … किसी और से मराने लायक नहीं रहूँगा!
फिर वह समीर की ओर इशारा करते हुए बोला- इसकी मारोगे? नमकीन लौंडा है. तुम्हारा तो पंडित जी से ड्योढ़ा है.
फिर से लंड पकड़ कर दबाते हुए बोला- कितना मोटा है बाप रे … मेरी तो देखते ही फट गई, अगर गांड में जाएगा तो जाने क्या हालत होगी. अभी मेरे बराबर मुश्किल से ही होगे, तब ये हालत है … मूसल सा हथियार लेकर घूम रहे हो … इस फील्ड में दो चार साल बाद तो अफ्रीका से टक्कर लेने लगोगे!वह झेंप गया.
अधीर- अच्छा, उस लौंडे से मिलवाओ … जिसकी तुमने मारी थी. क्या वह एकदम ठीक-ठाक है? साले की फटी नहीं? वैसे इतना बड़ा हथियार देखकर मेरी तो कुलबुलाने लगी है. मैंने कभी देखा ही नहीं ऐसा … इसे तो गांड में डलवाने की इच्छा हो रही है, मारोगे मेरी? वर्ना तमन्ना मन में ही रह जाएगी … तुम्हारी भी और मेरी भी!
शाहिद बोला- अरे डॉक्टर साहब आप तो इतने जवान, हट्टे-कट्टे, गोरे-पीले, मस्त हो, सजे-संवरे हो … मेरे से तगड़े भी हो. मैं गरीब हूँ, यूँ ही मेरी मार लो आप तो … मेरे से क्यों करवाओगे? खुदा न करे आपकी फट फटा गई तो गाली दोगे … इसलिए मेरा मजाक मत उड़ाओ.
यह कह कर शाहिद ने हाथ जोड़ लिए.
अधीर मुस्कुराने लगा और बोला- अरे नहीं शाहिद भाई, आपका लंड देखकर दिमाग चकरा गया, जब मैं माशूक चिकना लौंडा था, तो खूब करवाता था. कई दोस्तों ने चूतिया बनाकर जबरदस्ती रगड़ दी. तब लंड बड़े लगते थे. बाद में भी करवाई, पर जब-तब … कई लोगों ने मारकर कसके भी रगड़ दी. उस वजह से दो-तीन दिन तक गांड किल्लाती भी रही थी. कई के लंड बड़े थे, पर किसी साथी का इतना बड़ा लंड मैंने आज तक नहीं देखा!
यह कह कर अधीर उसका लंड सहलाने लगा.अब शाहिद का लंड मस्त खड़ा हो गया था. वह करीब दस इंच का रहा होगा.मोटा भी इतना था कि अधीर की मुट्ठी में ठीक से नहीं आ रहा था.
अधीर बस उसके लौड़े को आंखें फाड़े देखे जा रहा था और बार-बार कह रहा था- यार गजब है लंड है … तुम्हारा ये मूसल तो गधे के लंड जैसा है.शाहिद उसकी आंखों में आंखें डालकर वासना से देखने लगा.
कुछ पल बाद अधीर बेशर्मी से बोला- मेरी तो पिलवाने को कुलबुलाने लगी, मैं भी पुराना गांडू हूँ. बचपन में जब तक चिकना था, तब तक खूब लंड लिये तुम्हारा हथियार देखकर तबीयत मचल गई … सही में मजाक नहीं कर रहा, मेरी मारोगे? अपन न जाने फिर कब मिलेंगे? कहां रहते हो? यार तुम तो माशूक भी बहुत हो … मेरे से करवाओगे, बोलो!
शाहिद बोला- आपने ये आखिर में सही बात कही, जब चाहो आप मेरी मार लेना … मैं रेडी हूँ. जब आपने मेरे आगे पंडित जी की मार ली, तो मैं क्या हूँ? वे मेरे उस्ताद हैं. जब उस्ताद की गांड चोद दी तो मेरी क्या हैसियत कि मैं मना करूं. जब आप कहोगे, जिधर कहोगे … उधर आ जाऊंगा.
अधीर हंसने लगा.
शाहिद- आपकी और बातें झूठी हैं. हां, ये सही है कि मेरा हथियार बड़ा है, ये बात तो कई लोग कहते हैं.अधीर बोला- मैं झूठ नहीं कह रहा यार, वाकयी में मेरा तुम्हारे लंड पर दिल आ गया है. मैं अपनी में पिलवाना चाहता हूँ. अच्छा, जल्दी में मैं एक काम करके तुम्हें दिखाता हूँ.
अधीर एकदम घुटनों के बल बैठ गया और शाहिद का लंड मुँह में लेकर लप-लप चूसने लगा.दो-चार चटकारे मारे होंगे कि उसका लंड अकड़ कर खड़ा हो गया.
अधीर बोला- अभी ज्यादा नहीं चूस सकता, फिर कभी … अभी सब आ रहे होंगे. फिर कभी मिलेंगे. मेरा वादा रहा.अधीर ने शाहिद का लंड छोड़ दिया.
शाहिद ने जल्दी पैंट के अन्दर कर लिया, पर उसका लंड खड़ा था, तो बाहर से दिख रहा था.
अधीर शाहिद को देखकर मुस्कुरा रहा था.उसने शाहिद का मुँह चूम लिया और जोर से उसके होंठ चबाने लगा.
तब तक और लोग आ गए और सुरेंद्र सर के कहने से सब मेस में नाश्ता करने तैयार होकर निकल आए.
दोस्तो, इस बार की ऐस्स डिक स्टोरी पूरी नहीं लिखी है.लेकिन वादा है कि जैसे ही शाहिद और अधीर की गांड चुदाई होगी, मैं आपके लिए वह लजीज गे सेक्स कहानी लेकर हाजिर होऊंगा.आप अपने मेल जरूर भेजें.
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