Office Sex
कामुक, बोल्ड और रोमांचक हिंदी कहानियों का बेहतरीन संग्रह।
कमाल की हसीना हूँ मैं-30
मेरे ससुर ताहिर अज़ीज़ खान जी मुझे ऊपर से नीचे तक कुछ देर तक निहारते ही रह गये। उनके होंठों से एक सीटी जैसी आवाज निकली, जैसी आवाज आवारा टाईप के मजनूं निकाला करते हैं।
कमाल की हसीना हूँ मैं-26
मेरा सिर नशे में बुरी तरह झूम रहा था और दिमाग पर नशे की जैसे एक धुँध सी छाई हुई थी।
कमाल की हसीना हूँ मैं-25
स्वामी आज मुझ पर रहम करने के मूड में बिल्कुल नहीं था। उसने वापस अपने लंड को पूरा बाहर खींचा तो एक फक सी आवाज आई जैसे किसी बोतल का कॉर्क खोला गया हो।
कमाल की हसीना हूँ मैं-24
मैं उसके लंड की टिप को अपनी चूत की दोनों फाँकों के बीच महसूस कर रही थी। मैंने एक बार नजरें तिरछी करके जावेद को देखा।
कमाल की हसीना हूँ मैं-23
मैं उत्तेजना में अपनी दोनों जाँघों को एक दूसरे से रगड़ रही थी और अपने दोनों हाथों से उन दोनों के तने हुए लौड़ों को अपनी मुठ्ठी में लेकर सहला रही थी। अब मुझे उन दोनों के चुदाई में देरी करने पर गुस्सा आ रहा था। मेरी चूत में मानो आग लगी हुई थी। मैं सिस...
कमाल की हसीना हूँ मैं-22
मुझे वहाँ मौजूद हर मर्द पर गुस्सा आ रहा था लेकिन मेरा जिस्म, मेरे दिमाग में चल रही उथल पुथल से बिल्कुल बेखबर अपनी भूख से पागल हो रहा था।
कमाल की हसीना हूँ मैं-21
मैं हाई-हील सैंडलों में धीरे-धीरे कदम बढ़ाती हुई उनके पास पहुँची। मैं अपनी झुकी हुई नजरों से देख रही थी कि मेरे आजाद मम्मे मेरे जिस्म के हर हल्के से हिलने पर काँप उठते और उनकी ये उछल-कूद सामने बैठे लोगों की भूखी आँखों को राहत दे रही थी।
कमाल की हसीना हूँ मैं-20
“कल आप उनको कह दो कि लड़कियों का इंतज़ाम हो जायेगा।” मैंने कहा, “देखते हैं उनके यहाँ पहुँचने से पहले क्या किया जा सकता है।”
मेरी हसीन किस्मत- 1
मैंने एक जवान लड़की की चाहत की. लेकिन वो मेरी पहुँच से बाहर दिख रही थी. फिर भी दिल है कि मानता नहीं. मैंने अपने अरमान दिल में संजो कर रखे.
जवान लड़कों से चूत गांड फटवायी- 2
हिंदी कहानी के प्रथम भागसेक्स लाइफ में कुछ नया करने की चाहतमें आपने पढ़ा कि मेरा मन चलती बस में कुछ कामुक हरकत करने का हुआ तो मैं लोकल बस में चढ़ गयी. कुछ लड़कों ने मेरे साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दी.मैंने भी उनको करने प्रिया. फिर चुदाई की सेटिंग भी कर ...
कमसिन जवानी पर अपनी हवस पूरी की- 1
एडल्ट गर्ल सेक्स कहानी में ऑफिस के लिए मैंने 20 साल की एक लड़की सहायिका रखी. जरूरत भी थी और फिर सहायिका तो चुदाई में सहायक बनेगी ही.
कमाल की हसीना हूँ मैं -3
‘देखो तुम मेरे बेटे से मिलो, उसे अपना बॉय फ्रेंड बना लो। बहुत हेंडसम है वो। मेरा तो अब समय चला गया है तुम जैसी लड़कियों से फ्लर्ट करने का…’ उन्होंने मुझे अपनी गोद से उठाते हुए कहा- देखो यह ऑफिस है। कुछ तो इसकी तहज़ीब का ख्याल रखा कर। मैं यहाँ तेरा ब...