सिद्धार्थ वर्मा SV
सत्यापित कहानीकार (Verified)@sathathharatha-varama-sv
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
सिद्धार्थ वर्मा SV की रचनाएं
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-7
मैंने उन्हें उत्तर देते हुए कहा- आंटी, आप कह रही थी कि मेरा लिंग अधिक मोटा है इसलिए आप ही मेरे ऊपर आकर आराम से इसे खुद ही अपने अन्दर डाल लो। इससे आपको कोई तकलीफ नहीं होगी तथा आप जितना अन्दर डालना चाहेंगी उतना ही डाल कर संसर्ग शुरू कर सकती हैं।मेरी...
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-6
अगले दिन पापा के ऑफिस जाने के बाद मैंने कॉलेज से छुट्टी मारने की सोची और दस बजे के बाद अपने घर को बंद करके आंटी के दरवाज़े पर दस्तक दी जो कुछ की क्षणों के बाद उन्होंने खोला।उनको देख कर मैं स्तब्ध रह गया क्योंकि उस समय आंटी ने अपने शरीर को सिर्फ एक ...
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-5
मैं आंटी के पीछे पीछे बाहर जा कर उनसे कहा- मुझे मालूम है कि आपके पास मेरे प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं है क्योंकि मैं यह वीडियो के ऐसे दृश्य देखते ही समझ गया था कि आप मेरे पापा के साथ रंगरेलियाँ मनाती हो। अगर अंकल को इस बात का पता चल गया तो आपके लिए...
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-4
अभी तक आपने मेरी सेक्स कहानी में पढ़ा कि मुझे अपने पापा और पड़ोस की आंटी के बीच सेक्स संबंधों के बारे में पता चला. मैं अपनी तरफ से इस समस्या को गंभीर मान कर इसके हल में लग गया.अब आगे:लगभग दस मिनट के बाद आंटी नहा कर बैठक में आई तब पहली बार उनके तरो त...
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-3
रात का खाना खा कर जब मैं सोने के लिए बिस्तर पर लेटा तब पापा फ़ोन पर किसी से बात कर रहे थे और उनकी बातों एवं चेहरे के हावभाव से मुझे अंदेशा हुआ कि वे ऋतु आंटी के साथ रात का कार्यक्रम तय कर रहे थे।मैं इस अवसर को गंवाना नहीं चाहता था इसलिए लैपटॉप को च...
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-2
अगले दिन जब मैं कॉलेज से वापिस आया तब मुझे ऋतु आंटी सीढ़ियाँ उतरते हुए मिली तो बोली- अरे अनु, तेरी मम्मी कहाँ है? आज सुबह से दिखी नहीं और जब मैंने ऊपर जा कर देखा तो दरवाज़े पर ताला लगा हुआ है।मुझे मक्कार ऋतु आंटी की बात सुन कर थोड़ा आश्चर्य और गुस्सा...
घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-1
अनुराग और मैं पहली कक्षा से दसवीं कक्षा तक एक साथ पढ़े थे और उन लड़कपन के दिनों में सभी प्रकार की अच्छी एवं गंदी गतिविधियों में एक साथ भाग लिया था।दसवीं की परीक्षा में मैं तो उत्तीर्ण हो गया था लेकिन अनुराग की एक विषय में असफल हो जाने के कारण मुझसे ...
कामवाली की मंझली बहू-2
कामवाली की मंझली बहू-1लेखक: अभिनव गुप्तासंपादक एवम् प्रेषक: सिद्धार्थ वर्मारात में कामवाली की युवा बहू के साथ सेक्स के बाद हम दोनों सो गए थे.अब आगे:उस दिन सुबह आठ बजे मेरी नींद खुली तो देखा नग्न माला मेरी ओर करवट किये मेरी बाएं बाजू पर सिर रखे सो ...
मेरी लवलीन कामुक है कामान्ध नहीं-2
लेखक: नामित जैनसम्पादक: सिद्धार्थ वर्माशाम को मैं लवलीन के पापा को बाईक से स्टेशन ले गया और गाड़ी पर चढ़ा कर घर आया। वापिस आने के बाद मैंने देखा कि दीदी तैयार होकर अपने बॉयफ्रेंड से मिलने के लिए बाहर चली गई थी और माँ रसोई काम कर रही थी।
मेरी लवलीन कामुक है कामान्ध नहीं-1
आज आप सब के लिए जो रचना मैं ले कर आया हूँ वह मेरे एक अति प्रिय मित्र नामित जैन की है जिसे मैं लगभग पिछले चार वर्षों से जानता हूँ।नामित एक बहुत ही सुशील एवं संस्कारी तथा सामान्य स्वभाव का पुरुष है जो अपने काम के इलावा किसी और चीज़ से कोई वास्ता नहीं...