नील
सत्यापित कहानीकार (Verified)@nal
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
नील की रचनाएं
नाजायज सम्बन्ध : पुरुष मजा लेता है स्त्री बर्बाद होती है-2
अब तक आपने पढ़ा..हर्षा भाभी के संग पहली बार मेरे सेक्स सम्बन्ध बनने जा रहे थे।अब आगे..
नाजायज सम्बन्ध : पुरुष मजा लेता है स्त्री बर्बाद होती है-1
यह कहानी स्त्री पुरुष औरत मर्द के नाजायज सम्बन्धों पर आधारित है। इसमें थोड़ी सीख भी है.. खास कर उन पुरुषों और औरतों के लिए, जो कभी कभार बहकने की रीमा पर पहुँच जाते हैं और कोई गलत कदम भी उठा लेते हैं, या जो बहक गए हैं, उनका भविष्य कैसा होगा.. इसका व...
लड़कियों की आजादी लेकिन किस कीमत पर?
इस कहानी का आधार सेक्स नहीं है, यह कहानी आजकल के युवा वर्ग विशेषकर युवतियों की जागरूकता के लिए है।जो लड़कियाँ बिना सोचे समझे और बिना देखे प्यार कर लेती हैं, वे बाद में पछताती हैं क्योंकि या तो वे धोखे का शिकार होती हैं और उनका यौन शोषण होता है या फ...
समय और संयोग : ईर्ष्या और बदला
नमस्कार सभी पाठकों को सेक्स भरा प्रणाम। मैंने आपको पिछले भाग में बताया था कि मुझे टाइपिंग करने में आलस आता है.. वरना कहानी का दूसरा भाग लिखने में देर नहीं लगती। अभी तो एक और समस्या भी है कि मॉडलिंग में से वक्त नहीं मिलता।
समय और संयोग: मस्ती सस्ती नहीं, कभी मंहगी भी पड़ती है
मेरी कहानी तो पढ़ी होगी आप सबने.. पर यह कहानी उसके बाद की नहीं उसके पहले की है, मैंने कहानी की शुरूआत बीच में से की थी..जैसे बाहुबली की स्क्रिप्ट की तरह.. अगर मैं साधारण तरीके से कहानी लिखता तो यह कहानी पहले आती.. पर उस कहानी का महत्व कम हो जाता।
अनजाना अंजाम: वाइफ़ स्वैपिंग का भूत-2
दोनों कपल में एक दूसरे के प्रति लगाव हो गया था, वे एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे, दोनों की बीवियाँ एक दूसरे के पति को प्रेम करने लगी थी। जिसमें नैना को आरव से बहुत ज्यादा प्यार हो गया था, वह जब आरव के साथ घूमने वगैरा जाती तो बोलती- काश मैं तुम्...
अनजाना अंजाम: वाइफ़ स्वैपिंग का भूत-1
यह कहानी सब कहानियों से अलग और सत्य घटना पर आधारित है, आज तक की मेरी सारी कहानियों में मैं खुद को एक पात्र बना कर कहानी लिखता मगर इस कहानी को मैं सुना रहा है।
समय और संयोग : दोस्त की सच्चाई, बीवी की अच्छाई -2
अब तक आपने पढ़ा..वो शरमा गई और कुछ हड़बड़ा भी गई। हड़बड़ाहट की वजह से उसने टी-शर्ट ठीक नहीं की और कमोबेश मेरे भी होश उड़े हुए थे। अन्दर से हवस कब जग गई.. पता नहीं चला और कुछ सोचे-समझे बिना मैं उसके मम्मों को दबाने लगा।अब आगे..