मधुरेखा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@mathharakha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
मधुरेखा की रचनाएं
पर-पुरुष सम्मोहन
मेरे मित्र ने जितना मुझे समझाया था, वो मैंने सफ़लतापूर्वक कार्यान्वित कर लिया था। अब मुझे प्रतीक्षा थी अपने मित्र से आगे के निर्देशों की ! मुझे पता नहीं था कि वे कब ऑनलाइन मिलेंगे मुझे तो मैं खुद ऑनलाइन होकर प्रतीक्षा में बैठ गई।
पर पुरुष समर्पण-3
ब्रा और ब्लाउज दोनों का साइज पहले से बड़ा था, वो जानते थे कि मान्या के जन्म के कारण मेरा वक्ष काफ़ी बढ़ गया है।असल में ही मैं मोटी हो गई हूँ।
पर पुरुष समर्पण-4
ठीक 6:30 पर मेन-गेट खुलने की आवाज आई, मैंने खिड़की से देखा कि शचित आ गये हैं।
जो पहले कर ना सकी थी
लगातार मेरी नाक बह रही है, सारा बदन टूट रहा है, अभी उठी हूँ… श्रेया ने कॉफी बना कर दी, उससे भी ज़्यादा कुछ फ़र्क नहीं लगा उसने पूछा- कैसी तबीयत है?