जलगाँव बॉय
सत्यापित कहानीकार (Verified)@jalgava-bya
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
जलगाँव बॉय की रचनाएं
धोबी घाट पर माँ और मैं -14
माँ ने मेरे चेहरे को अपने होंठों के पास खींच कर मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्बन लिया और अपनी कातिल मुस्कुराहट फेंकते हुए मेरेकान के पास धीरे से बोली- सिर्फ़ दूध ही पीयेगा या मालपुआ भी खायेगा? देख तेरा मालपुआ तेरा इन्तजार कर रहा है राजा।
धोबी घाट पर माँ और मैं -13
माँ एक बार जरा पीछे घूम जाओ ना!’‘ओह, मेरा राजा मेरा पिछवाड़ा भी देखना चाहता है क्या? चल, पिछवाड़ा तो मैं तुझे खड़े खड़े ही दिखा देती हूँ। ले देख अपनी माँ के चूतड़ और गाण्ड को।’इतना कह कर माँ पीछे घूम गई।
धोबी घाट पर माँ और मैं -11
ओह माँ, दिखा दो ना, बस एक बार। सिर्फ़ देख कर ही सो जाऊँगा।’पर माँ ने मेरे हाथों को झटक प्रिया और उठ कर खड़ी हो गई, अपने ब्लाउज़ को ठीक करने के बाद छत के कोने की तरफ चल दी।
धोबी घाट पर माँ और मैं -10
मुझे तो ज़ल्दी से माँ के साथ सोने की हड़बड़ी थी कि कैसे माँ से चिपक के उसके माँसल बदन का रस ले सकूँ। पर माँ रसोई साफ करने में ज़ुटी हुई थी, मैंने भी रसोई का सामान सम्भालने में उसकी मदद करनी शुरु कर दी।कुछ ही देर में सारा सामान ज़ब ठीक ठाक हो गया तो हम ...
धोबी घाट पर माँ और मैं -9
शाम होते-होते हम अपने घर पहुंच चुके थे। कपड़ों के गठर को ईस्तरी करने वाले कमरे में रखने के बाद, हमने हाथ-मुंह धोये और फिर माँ ने कहा कि बेटा चल कुछ खा-पी ले।भूख तो वैसे मुझे कुछ खास लगी नहीं थी (दिमाग में ज़ब सेक्स का भूत सवार हो तो भूख तो वैसे भी म...
धोबी घाट पर माँ और मैं -8
ज़लगाँव बॉयमेरा लौड़ा अब पूरी तरह से उसके थूक से भीग कर गीला हो गया था और धीरे- धीरे सिकुड़ रहा था। पर उसने अब भी मेरे लण्ड को अपने मुँह से नहीं निकाला था और धीरे-धीरे मेरे सिकुड़े हुए लण्ड को अपने मुँह में किसी चॉकलेट की तरह घुमा रही थी।कुछ देर तक ऐस...
धोबी घाट पर माँ और मैं -7
कैसे हो मित्रो, क्षमा करना, यह भाग लिखने में थोड़ा समय लगा। मुझे बहुत मेल आये, खास करके महिलाओं के!मैंने लगभग सभी के मेल को ज़वाब प्रिया है और आशा करता हूँ कि और नए महिला पुरुष ज़रूर मेल करेंगे।अब आगे:
धोबी घाट पर माँ और मैं -6
मैं भी झाड़ियों के पीछे चला गया और पेशाब करने लगा।बड़ी देर तक तो मेरे लंड से पेशाब ही नहीं निकला, फिर जब लंड कुछ ढीला पड़ा तब जा के पेशाब निकलना शुरु हुआ। मैं पेशाब करने के बाद वापस पेड़ के नीचे चल पड़ा।
धोबी घाट पर माँ और मैं-5
मेरे मुख से तो आवाज ही नहीं निकल रही थी।फिर उसने हल्के-से अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रखा और सहलाते हुए बोली- हाय, कैसे खड़ा कर रखा है, मुए ने?
धोबी घाट पर माँ और मैं-4
माँ ने मेरे हाथ को अपने हाथों में ले लिया और कहा- इसका मतलब तू मुझे नंगी नहीं देख सकता, है ना?
धोबी घाट पर माँ और मैं-3
सुबह की पहली आरती के साथ जब मेरी नींद खुली तो देखा कि एक तरफ बापू अभी भी लुढ़का हुआ है और माँ शायद पहले ही उठ कर जा चुकी थी।मैं भी जल्दी से नीचे पहुँचा तो देखा कि माँ बाथरुम से आकर हेन्डपम्प पर अपने हाथ-पैर धो रही थी, मुझे देखते ही बोली- चल जल्दी स...