अरुण
सत्यापित कहानीकार (Verified)@aranae
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
अरुण की रचनाएं
मेरी बीवी के बदन की एक बानगी-3
खैर अंकल जी तो उसे पैंटी ब्रा पहनाने पे तुले हुए थे तो बोले- मैं मुँह घुमा लेता हूँ, तुम आराम से पहन लो।मैंने भी कहा- यार, बहुत लेट हो रहे हैं, जल्दी से देख-दाख लो, अंकल जी को भी जाना होगा।और फिर इसके बाद जो हुआ, वो हम तीनों के लिए ही बहुत उत्तेजक...
मेरी बीवी के बदन की एक बानगी-2
मेरी बीवी ने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोला।और एकदम की ब्रा की पकड़ उसके शानदार और उन्नत वक्षस्थल पर ढीली पड़ गई, उसके वक्ष के उभार बाहर झाँकने लगे।सही में उसके बूब्स उस ब्रा में फंसे ही हुए थे, ऐसा लगा कि जैसे उन उभरी हुए छातियों ने चैन की ...
मेरी बीवी के बदन की एक बानगी-1
आज मैं आप लोगो के लिए कोई कहानी लेकर नहीं आया हूँ, यह सिर्फ एक घटना है जिसमें सम्भोग और यौन क्रिया-कलाप नहीं है, इसलिए आप में से कुछ पाठकों को शायद यह पसंद ना आए लेकिन यह घटना उत्तेजक है और बहुत से पाठक और पाठिकाएँ ऐसे भी हैं जो सम्भोग के अलावा जि...
शालिनी ने जो चाहा वो पाया-4
मालकिन और नौकर का भेदभाव जाता रहा, उस नौकर राजू ने शालिनी के हाथ से पाइप छीन कर दूर फेंका और उसके कपड़े उतारने को लपका।
शालिनी ने जो चाहा वो पाया-3
शालिनी के अभी तक के दोनों सेक्स अनुभव बाथरूम में ही हुए थे और वो भी अकेले ही हुए थे, और बहुत ही अच्छे हुए थे और उसने बहुत एन्जॉय भी किया था।
शालिनी ने जो चाहा वो पाया-2
नहाते समय उसने जो कुछ देखा, महसूस किया और उसके बाद खुले आसमान के नीचे गंदी सी पड़ी बालकनी के खुरदरे फर्श पर किये हस्त-मैथुन ने उसे असीम आनन्द प्रदान किया था।
शालिनी ने जो चाहा वो पाया-1
इस क्षेत्र के मेरे जैसे जैसे अनुभवी लोगों का फायदा नए और संकोची लोगों को मिल रहा है।
दोस्त की अर्धनग्न पत्नी -मेरी ज़ुबानी
असल में पूर्व में मेरे लिखे गए ज्ञानवर्धक, सेक्स सलाह और सेक्स समस्याओं से सम्बंधित पाठक पाठिकाओं के मेल आते रहते हैं और मैं उन्हें जवाब देता रहता हूँ, इसी वजह से मुझे कुछ नए मित्र भी मिले हैं।
प्रफुल्ला-4
दोस्तो, मेरे सामने पलंग पर निर्वस्त्र और नग्नावस्था में पसरी पड़ी प्रफुल्ला और और मेरे बीच में अब यदि कोई दूरी बची हुई थी तो वो थी उसके पति चेतन की मौजदगी की वजह से मेरा संकोच, अन्यथा उसकी ऐसी अवस्था को देख कर कोई भी पुरुष अपने आप को रोक ही नहीं स...
प्रफुल्ला-3
हम बड़े से ड्राइंग रूम में आये, प्रफुल्ला मेरे लिए बारी बारी से पानी, चाय, नाश्ता लाती रही, चेतन भी उसका भरपूर सहयोग कर रहा था, पर मारे उत्तेजना के और आने वाले पलों की कल्पना मात्र से मैं उत्तेजित हो रहा था, मुझसे कुछ भी खाया-पीया ही नहीं जा रहा था।
प्रफुल्ला-1
और जिस तरह की घटना का मैंने जिक्र अपनी कहानियों में किया था, तो लड़कों के इस तरह के पत्र स्वाभाविक भी थे, लेकिन मेरे लिए आश्चर्यजनक बात यह थी कि लड़कियों के भी बहुत ज्यादा इमेल आये, जो दोस्ती करना चाहती थी और उनमें से कुछ मेरी मित्र भी बन गई फेसबुक ...